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Navratri 2025: ज्वालादेवी शक्तिपीठ की कथा और नौ ज्वालाएं

ज्वालादेवी शक्तिपीठ की कथा जानें, जहां मां के नौ रूपों को दर्शाती हैं नौ ज्वालाएं। Navratri 2025 में इस पावन स्थान की महिमा और आध्यात्मिक महत्व को समझें।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

Navratri 2025: ज्वालादेवी शक्तिपीठ की पावन कथा

नवरात्रि का पावन पर्व देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का समय होता है। भारत के प्राचीन शक्तिपीठों में से एक ज्वालादेवी मंदिर हिमाचल प्रदेश में स्थित है, जहां मां के नौ रूपों को नौ ज्वालाओं के रूप में पूजा जाता है। इस लेख में हम ज्वालादेवी की अद्भुत कथा, मंदिर का इतिहास और नवरात्रि के विशेष महत्व को जानेंगे।

Contents
Navratri 2025: ज्वालादेवी शक्तिपीठ की पावन कथाज्वालादेवी मंदिर: एक दिव्य शक्तिपीठज्वालादेवी की पौराणिक कथानवरात्रि में ज्वालादेवी का विशेष महत्वज्वालादेवी मंदिर की वैज्ञानिक रहस्यमयताज्वालादेवी दर्शन की विधिनवरात्रि 2025 में ज्वालादेवी के दर्शन का शुभ मुहूर्तज्वालादेवी आरती और मंत्रनिष्कर्ष

ज्वालादेवी मंदिर: एक दिव्य शक्तिपीठ

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां देवी सती की जीभ गिरी थी। मंदिर की सबसे विशेष बात यह है कि यहां नौ ज्वालाएं प्राकृतिक रूप से सदियों से जल रही हैं, जिन्हें देवी के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है।

  • महाकाली: प्रथम ज्वाला
  • महालक्ष्मी: द्वितीय ज्वाला
  • महासरस्वती: तृतीय ज्वाला
  • अन्नपूर्णा: चतुर्थ ज्वाला
  • चंडी: पंचम ज्वाला
  • विंध्यवासिनी: षष्ठ ज्वाला
  • भद्रकाली: सप्तम ज्वाला
  • अम्बिका: अष्टम ज्वाला
  • अन्नदा: नवम ज्वाला

ज्वालादेवी की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार, जब भगवान शिव देवी सती के मृत शरीर को लेकर ब्रह्मांड में भटक रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया। जहां-जहां ये अंग गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। ज्वालादेवी मंदिर वह स्थान है जहां देवी की जीभ गिरी थी।

एक अन्य कथा के अनुसार, राजा भूमि चंद ने स्वप्न में देवी के दर्शन किए और उनके निर्देशानुसार इस स्थान पर मंदिर की स्थापना की। तभी से यहां नौ ज्वालाएं प्रज्वलित हैं जो कभी नहीं बुझतीं।

नवरात्रि में ज्वालादेवी का विशेष महत्व

नवरात्रि के नौ दिनों में ज्वालादेवी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष रूप को समर्पित होता है और संबंधित ज्वाला की विशेष पूजा की जाती है।

  • प्रतिपदा: शैलपुत्री पूजन
  • द्वितीया: ब्रह्मचारिणी पूजन
  • तृतीया: चंद्रघंटा पूजन
  • चतुर्थी: कुष्मांडा पूजन
  • पंचमी: स्कंदमाता पूजन
  • षष्ठी: कात्यायनी पूजन
  • सप्तमी: कालरात्रि पूजन
  • अष्टमी: महागौरी पूजन
  • नवमी: सिद्धिदात्री पूजन

ज्वालादेवी मंदिर की वैज्ञानिक रहस्यमयता

इस मंदिर की नौ ज्वालाएं वैज्ञानिकों के लिए भी आश्चर्य का विषय हैं। ये ज्वालाएं बिना किसी ईंधन के सैकड़ों वर्षों से निरंतर जल रही हैं। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां भूगर्भ से प्राकृतिक गैस निकलती है जो इन ज्वालाओं को जलाए रखती है।

ज्वालादेवी दर्शन की विधि

ज्वालादेवी के दर्शन करने की एक विशेष विधि है:

  • सर्वप्रथम मंदिर के निकट स्थित गोरखनाथ की गुफा में दर्शन करें
  • मंदिर में प्रवेश से पूर्व हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो लें
  • देवी को लाल चुनरी, फूल और नारियल अर्पित करें
  • मंदिर के पुजारी द्वारा बताई गई विधि से आरती में सम्मिलित हों
  • प्रसाद के रूप में रामपत्री के पत्ते ग्रहण करें

नवरात्रि 2025 में ज्वालादेवी के दर्शन का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि 2025 में ज्वालादेवी दर्शन के लिए विशेष तिथियां और समय:

  • घटस्थापना: 26 सितंबर 2025, प्रातः 6:15 से 7:30 बजे तक
  • अष्टमी पूजन: 3 अक्टूबर 2025, संध्या 5:00 बजे से
  • नवमी हवन: 4 अक्टूबर 2025, प्रातः 8:00 बजे से
  • दशमी विसर्जन: 5 अक्टूबर 2025, दोपहर 12:00 बजे के बाद

ज्वालादेवी आरती और मंत्र

ज्वालादेवी की आरती में इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है:

“ॐ ज्वालायै विद्महे ज्वालिन्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्॥”

देवी के इस स्तोत्र का पाठ भी विशेष फलदायी माना जाता है:

“या देवी सर्वभूतेषु ज्वाला रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

निष्कर्ष

ज्वालादेवी शक्तिपीठ न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि प्रकृति के अद्भुत रहस्यों को भी समेटे हुए है। नवरात्रि 2025 में इस पावन स्थल के दर्शन कर आप देवी के नौ रूपों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यहां की नौ ज्वालाएं मां के नौ स्वरूपों का प्रतीक हैं जो भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं।

जय माता दी!

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