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नवरात्रि आरती कात्यायिनी माता की आरती से व्रत का फल

Published June 26, 2026
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4 Min Read

# नवरात्रि आरती: कात्यायिनी माता की इस आरती से मिलता है व्रत का फल

Contents
प्रस्तावना: माँ कात्यायिनी की महिमामाँ कात्यायिनी का स्वरूप और महत्वदेवी का अवतरणनवरात्रि में छठे दिन की पूजाकात्यायिनी माता की आरती: पूर्ण पाठआरती के पहले की तैयारीकात्यायिनी माता आरती (हिंदी में)आरती का अर्थकात्यायिनी आरती के लाभआध्यात्मिक फलसांसारिक लाभनवरात्रि में आरती का सही समयकात्यायिनी मंत्र और उसका जापमंत्र जाप की विधिभक्तों के अनुभवनिष्कर्ष: माँ की कृपा पाने का सरल उपाय

प्रस्तावना: माँ कात्यायिनी की महिमा

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायिनी की पूजा-आराधना की जाती है। यह देवी दुर्गा का छठा स्वरूप हैं, जिनकी उपासना से भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, साहस और विजय प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस दिन कात्यायिनी माता की आरती पढ़ने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।

माँ कात्यायिनी का स्वरूप और महत्व

देवी का अवतरण

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर माँ दुर्गा ने कात्यायिनी के रूप में अवतार लिया। इनका वाहन सिंह है और यह चार भुजाओं वाली हैं, जो अभयमुद्रा, तलवार, कमल और त्रिशूल धारण करती हैं।

नवरात्रि में छठे दिन की पूजा

नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायिनी की पूजा का विशेष महत्व है:

  • साधकों को मिलती है आंतरिक शक्ति
  • कष्टों का नाश होता है
  • शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है

कात्यायिनी माता की आरती: पूर्ण पाठ

आरती के पहले की तैयारी

आरती से पहले माँ को लाल फूल, कुमकुम, घी का दीपक और मिष्ठान्न अर्पित करें। शुद्ध मन से इस आरती को पढ़ें:

कात्यायिनी माता आरती (हिंदी में)

  
जय कात्यायिनी माता, मैया जय कात्यायिनी माता।  
तुम ही दुर्गा हो, तुम ही काली, तुम ही अम्बे सुखदाता॥  

सिंह पर सवार होकर, खड्ग लिए कर में।  
दुष्टों का नाश करो, भक्तों का मन हर में॥  

कात्यायन ऋषि तप किया, तुम प्रकट हुई जग में।  
दया की देवी माता, पूजी जाती सब घर में॥  

छठी देवी तुम्हीं हो, नवरात्रि में आई।  
भक्तों के दुख हरो, माता मेरी सहाई॥  

आरती कात्यायिनी की, जो कोई नर गावे।  
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावे॥  

आरती का अर्थ

इस आरती में माँ कात्यायिनी की स्तुति करते हुए उनके गुणों का वर्णन किया गया है:

  • दुर्गा, काली और अम्बे – तीनों रूपों में माँ की महिमा
  • सिंह पर सवार – शक्ति और निडरता का प्रतीक
  • ऋषि कात्यायन की तपस्या – देवी के प्रकट होने की कथा

कात्यायिनी आरती के लाभ

आध्यात्मिक फल

  • मन की शुद्धि – नकारात्मक विचार दूर होते हैं
  • आत्मविश्वास बढ़ता है – भय और संदेह मिटते हैं

सांसारिक लाभ

  • रोगों से मुक्ति – शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ
  • शत्रु बाधा दूर – विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है

नवरात्रि में आरती का सही समय

माँ कात्यायिनी की आरती के लिए सुबह का ब्रह्म मुहूर्त या संध्या काल सर्वोत्तम है। नवरात्रि के छठे दिन इस आरती को नौ बार पढ़ने से विशेष फल प्राप्त होता है।

कात्यायिनी मंत्र और उसका जाप

आरती के साथ इस मंत्र का जाप करें:

  
ॐ देवी कात्यायिन्यै नमः॥  

मंत्र जाप की विधि

  • माला से 108 बार जाप – रुद्राक्ष या तुलसी की माला उपयोगी
  • ध्यान – माँ के चतुर्भुज स्वरूप का स्मरण करें

भक्तों के अनुभव

कई भक्तों ने इस आरती के प्रभाव को अपने जीवन में अनुभव किया है:

  • रोहित शर्मा (दिल्ली) – “माँ की कृपा से नौकरी में प्रमोशन मिला”
  • प्रियंका देवी (वाराणसी) – “पारिवारिक कलह समाप्त हुआ”

निष्कर्ष: माँ की कृपा पाने का सरल उपाय

नवरात्रि में माँ कात्यायिनी की आरती और व्रत करने से भक्तों को अद्भुत फल प्राप्त होते हैं। यह न सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है, बल्कि सांसारिक समस्याओं का समाधान भी। श्रद्धा और विश्वास से की गई पूजा हमेशा फलदायी होती है।

“जो भक्त सच्चे मन से मेरी आरती गाता है, उसके सभी दुख मैं हर लेती हूँ।” – देवी पुराण

🔱 जय माता दी, जय कात्यायिनी मैया की जय! 🔱

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