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नवरात्रि कलश स्थापना मंत्र और पूजन विधि

Published June 26, 2026
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3 Min Read

नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव है, जिसमें माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। कलश स्थापना नवरात्रि के पहले दिन की जाने वाली प्रमुख रस्म है, जिसे शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाता है। इस लेख में हम आपको कलश स्थापना की विधि, मंत्र और पूजन की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

Contents
कलश स्थापना का महत्वकलश स्थापना की तैयारीआवश्यक सामग्रीशुभ मुहूर्तकलश स्थापना विधिचरण 1: स्थान की शुद्धिचरण 2: कलश की सजावटचरण 3: कलश स्थापना मंत्रचरण 4: जौ बोनादेवी आवाहन और पूजन विधिदेवी आवाहन मंत्रपूजा विधि

कलश स्थापना का महत्व

कलश को समृद्धि, शक्ति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में कलश स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और देवी माँ की कृपा प्राप्त होती है।

  • धार्मिक महत्व: कलश में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: तांबे के कलश में जल भरकर रखने से वातावरण शुद्ध होता है।
  • आध्यात्मिक लाभ: कलश स्थापना से मन शांत होता है और भक्ति भाव बढ़ता है।

कलश स्थापना की तैयारी

आवश्यक सामग्री

  • मिट्टी या तांबे का कलश
  • जल (गंगाजल या साफ पानी)
  • आम या अशोक के पत्ते
  • नारियल (साबुत, लाल कपड़े में लिपटा हुआ)
  • लाल कपड़ा
  • कुमकुम, हल्दी, चावल, फूल
  • सुपारी, सिक्के
  • मिट्टी का बर्तन (जहाँ जौ बोए जाते हैं)

शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना की जाती है। सुबह का समय (प्रातःकाल) सबसे शुभ माना जाता है।

कलश स्थापना विधि

चरण 1: स्थान की शुद्धि

पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ।

चरण 2: कलश की सजावट

  • कलश में जल भरें और उसमें सुपारी, सिक्के, हल्दी, कुमकुम डालें।
  • कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और लाल कपड़े से ढक दें।
  • नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर रखें।

चरण 3: कलश स्थापना मंत्र

  
ॐ आगच्छ वरदे देवि क्षीरोदार्णव सम्भवे ।  
नवदुर्गे प्रसीद त्वं कलशं पूरयाम्यहम् ॥  

इस मंत्र का उच्चारण करते हुए कलश को स्थापित करें।

चरण 4: जौ बोना

मिट्टी के बर्तन में जौ बोएँ और उसे कलश के पास रखें। यह समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक है।

देवी आवाहन और पूजन विधि

देवी आवाहन मंत्र

  
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।  
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥  

पूजा विधि

  • कलश के सामने दीप जलाएँ।
  • देवी को फूल, अक्षत, धूप-दीप अर्पित करें।
  • नवरात्रि के नौ दिनों तक नियमित पूजा करें।

नवरात्रि में कलश स्थापना एक पवित्र और आवश्यक अनुष्ठान है। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और देवी माँ की कृपा प्राप्त होती है। सही विधि और श्रद्धा से पूजा करने पर मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होती हैं।

आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ! जय माता दी!

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