MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: Nirjala Ekadashi 2025 निर्जला एकादशी क्यों है खास जानें पौराणिक कथा
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

Nirjala Ekadashi 2025 निर्जला एकादशी क्यों है खास जानें पौराणिक कथा

निर्जला एकादशी 2025 की महिमा जानें: इस व्रत की पौराणिक कथाएं, महत्व और आध्यात्मिक लाभ। जानिए क्यों है यह एकादशी सबसे खास और कैसे पाएं मोक्ष की प्राप्ति।

Published July 2, 2026
Share
4 Min Read

निर्जला एकादशी 2025: क्यों होती है यह व्रत इतना खास?

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन निर्जला एकादशी सभी एकादशियों में सबसे कठिन और फलदायी मानी जाती है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है, जिसे 2025 में 8 जून को मनाया जाएगा। इस व्रत में भक्त बिना जल ग्रहण किए 24 घंटे तक उपवास रखते हैं। आइए जानें, क्यों यह व्रत इतना पुण्यदायी माना जाता है और इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं क्या हैं।

Contents
निर्जला एकादशी 2025: क्यों होती है यह व्रत इतना खास?निर्जला एकादशी का महत्वनिर्जला एकादशी की पौराणिक कथाभीम और वेदव्यास का संवादद्रौपदी की निर्जला एकादशीनिर्जला एकादशी व्रत विधिविशेष सावधानियांनिर्जला एकादशी का आध्यात्मिक प्रभावनिष्कर्ष

निर्जला एकादशी का महत्व

इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को करने से सालभर की सभी 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है। यह व्रत न केवल मोक्ष प्रदान करता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी लाता है।

  • महाफलदायी: अन्य एकादशियों की तुलना में इसका पुण्य 10 गुना अधिक माना गया है।
  • संयम की परीक्षा: बिना जल के रहने का संकल्प शारीरिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक है।
  • भीम की भक्ति: महाभारत के भीम ने इसी व्रत से सभी एकादशियों का फल प्राप्त किया था।

निर्जला एकादशी की पौराणिक कथा

भीम और वेदव्यास का संवाद

महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार, भीमसेन ने एक बार महर्षि वेदव्यास से पूछा: “हे ऋषिवर! मैं भोजन के बिना नहीं रह सकता, फिर एकादशी व्रत कैसे करूँ?” तब व्यासजी ने उन्हें निर्जला एकादशी का विधान बताया:

“ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को बिना जल पिए व्रत करो। इससे तुम्हें सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होगा।”

भीम ने इस व्रत को पूरी श्रद्धा से किया और आजीवन इसका पालन किया। इसीलिए इसे भीमसेनी एकादशी कहा जाने लगा।

द्रौपदी की निर्जला एकादशी

एक अन्य कथा के अनुसार, द्रौपदी ने वनवास के दौरान इस व्रत को किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें अक्षय पात्र का आशीर्वाद दिया, जिससे पांडवों को कभी भोजन की कमी नहीं हुई।

निर्जला एकादशी व्रत विधि

  • सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक बिना जल पिए व्रत रखें।
  • सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • मंत्रोच्चारण: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
  • शाम को दीपदान करके भजन-कीर्तन करें।
  • अगले दिन द्वादशी को सुबह स्नान के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दें।

विशेष सावधानियां

  • बुजुर्ग या बीमार लोग चिकित्सकीय सलाह के बाद ही व्रत रखें।
  • गर्मी के मौसम में व्रत रखने के कारण छाया में रहें।
  • व्रत तोड़ने के बाद धीरे-धीरे हल्का भोजन करें।

निर्जला एकादशी का आध्यात्मिक प्रभाव

यह व्रत केवल शारीरिक उपवास नहीं, बल्कि मन और आत्मा की शुद्धि का भी पर्व है:

  • इंद्रिय नियंत्रण: जल की लालसा पर विजय पाने का संकल्प।
  • सहनशक्ति: कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना।
  • भक्ति भाव: भगवान विष्णु के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा।

निष्कर्ष

निर्जला एकादशी हमें सिखाती है कि संयम और श्रद्धा से हर कठिनाई पर विजय पाई जा सकती है। यह व्रत न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि आत्मबल भी प्रदान करता है। 2025 में इस पावन एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे, यही हमारी कामना है।

“यस्यां विष्णुः प्रसन्नः स्यात् सा एकादशी उत्तमा।
निर्जलायां तु यत्पुण्यं तत्कोटिगुणितं भवेत्॥”

You Might Also Like

हनुमानजी गुस्से में क्यों हैं तस्वीर बनाने वाला कौन

केदारनाथ दर्शन का फल इनके दर्शन से भी मिलता है

श्रावणी पर्व: धरती पर जीवन जागा

मौत की आहट सुन सकते हैं छह महीने पहले करें यह उपाय

Moon Black Spot: चंद्रमा को क्यों और किसने दिया श्राप दाग का रहस्य?

Share

Latest News

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
Religion Spirituality July 2, 2026
राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
Religion Spirituality July 2, 2026
Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
Religion Spirituality July 2, 2026
Durga Puja 2025 आज से शुरू जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Religion Spirituality July 2, 2026

You Might also Like

शिव और कृष्ण में छिड़ा संग्राम Shiv Krishna Yudh

July 2, 2026

गणेश पूजा और उत्सव की खास बातें जानिए

July 2, 2026

जनेऊ दाएं कान पर ही क्यों लपेटते हैं? Why is Janeu worn on the right ear?

July 2, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
  • राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
  • Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech HTML sitemap
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?