एकादशी का महत्व और बैकुण्ठ प्राप्ति
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि भक्तों को बैकुण्ठ धाम में स्थान प्रदान करने वाला माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से एकादशी का व्रत रखता है, उसे भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।
कौन सी है वह पावन एकादशी?
सभी एकादशियों में मोक्षदा एकादशी को सर्वाधिक पुण्यदायी माना गया है। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने से मनुष्य को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और अंततः बैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है।
मोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथा
पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा: “हे प्रभु! कौन सी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है?” तब भगवान कृष्ण ने मोक्षदा एकादशी की महिमा बताते हुए कहा:
“मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहते हैं। इस दिन व्रत रखकर भक्ति पूर्वक पूजन करने वाला व्यक्ति सभी पापों से मुक्त होकर बैकुण्ठ में मेरे साथ निवास करता है।”
मोक्षदा एकादशी व्रत विधि
इस व्रत को करने की विधि निम्नलिखित है:
- दशमी की रात्रि: एकादशी से एक दिन पहले (दशमी) सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- एकादशी के दिन: प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की पूजा करें और निम्न मंत्र का जाप करें:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
- फलाहार: पूरे दिन निर्जला व्रत रखें या फलाहार ग्रहण करें।
- रात्रि जागरण: भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें।
- द्वादशी पर पारण: अगले दिन (द्वादशी) ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।
विशेष पूजा सामग्री
- तुलसी दल
- पीले फूल और चंदन
- घी का दीपक
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र
मोक्षदा एकादशी का आध्यात्मिक लाभ
इस व्रत के नियमित पालन से:
- जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
- पितृ दोष और कालसर्प दोष का निवारण होता है।
- मनुष्य को अंततः भगवान विष्णु का सान्निध्य प्राप्त होता है।
अन्य एकादशियाँ जो दिलाती हैं बैकुण्ठ प्राप्ति
मोक्षदा एकादशी के अलावा, निम्नलिखित एकादशियाँ भी बैकुण्ठ प्राप्ति में सहायक हैं:
1. वैकुण्ठ एकादशी
पौष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह एकादशी सीधे वैकुण्ठ धाम का द्वार खोलती है। इस दिन वैकुण्ठ द्वार खुला होता है और भगवान विष्णु स्वयं इस व्रत का फल प्रदान करते हैं।
2. निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ मास की इस एकादशी में बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने से सालभर की एकादशियों का फल मिलता है। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं।
भक्ति ही है मोक्ष का मार्ग
एकादशी व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम साधन है। जो मनुष्य सच्चे मन से इस व्रत का पालन करता है, उसे निश्चित ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। मोक्षदा एकादशी का व्रत करके हम न केवल अपने लिए, बल्कि अपने पितृों के लिए भी मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
“एकादश्यां नरो यस्तु भक्तिभावेन संयुतः।
विष्णोः पदं स गच्छेत नात्र कार्या विचारणा॥”
(पद्म पुराण)
अर्थात, जो मनुष्य भक्तिभाव से एकादशी व्रत करता है, वह निश्चित ही भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त होता है। इसमें कोई संदेह नहीं है।
आइए, इस पावन एकादशी पर हम सभी भक्ति भाव से व्रत रखकर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें। हरि ॐ!

