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Papankusha Ekadashi 2025 पापाकुंशा एकादशी महत्व पूजाविधि शुभ मुहूर्त

पापाकुंशा एकादशी 2025 का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानें। इस पावन दिन पर व्रत रखकर पापों से मुक्ति पाएं और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

पापांकुशा एकादशी 2025: परिचय

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और पापांकुशा एकादशी इनमें से एक पावन तिथि है। यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। 2025 में, यह तिथि 24 सितंबर को पड़ रही है। इस व्रत को करने से भक्तों के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस लेख में, हम पापांकुशा एकादशी का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और कथा जानेंगे।

Contents
पापांकुशा एकादशी 2025: परिचयपापांकुशा एकादशी का महत्वधार्मिक महत्ववैज्ञानिक दृष्टिकोणपापांकुशा एकादशी 2025 का शुभ मुहूर्तपापांकुशा एकादशी पूजा विधिव्रत की तैयारीपूजा विधानपारण विधिपापांकुशा एकादशी व्रत कथापापांकुशा एकादशी के नियमनिष्कर्ष

पापांकुशा एकादशी का महत्व

शास्त्रों में पापांकुशा एकादशी को “पापों को नष्ट करने वाली” तिथि कहा गया है। इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

धार्मिक महत्व

  • इस एकादशी का व्रत करने से 10 जन्मों के पाप धुल जाते हैं।
  • भगवान विष्णु की कृपा से मनुष्य को धन, स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है।
  • मृत्यु के बाद वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

व्रत रखने से शरीर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद मिलती है और मन को शांति मिलती है। एकादशी का उपवास पाचन तंत्र को आराम देकर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

पापांकुशा एकादशी 2025 का शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 सितंबर 2025, रात 09:14 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 24 सितंबर 2025, रात 11:42 बजे
  • पारण का समय: 25 सितंबर, सुबह 06:12 से 08:28 बजे तक
  • व्रत तोड़ने का शुभ समय: 25 सितंबर को सूर्योदय के बाद

पापांकुशा एकादशी पूजा विधि

इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:

व्रत की तैयारी

  • एकादशी से एक दिन पहले (दशमी) सात्विक भोजन करें और रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

पूजा विधान

  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • भगवान को तुलसी दल, फल, फूल और मेवे अर्पित करें।
  • इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • शाम को भजन-कीर्तन करें और पापांकुशा एकादशी व्रत कथा सुनें।

पारण विधि

अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत तोड़ें। सबसे पहले तुलसी के पत्तों के साथ जल ग्रहण करें, फिर फलाहार करें।

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार महर्षि मेधा ने राजा मान्धाता को इस व्रत का महत्व समझाया। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा से करता है, उसके सभी पाप पापांकुशा (पापों को हटाने वाली) शक्ति से नष्ट हो जाते हैं। भगवान विष्णु ने स्वयं इस व्रत को सर्वपापहारी बताया है।

पापांकुशा एकादशी के नियम

  • इस दिन क्रोध, झूठ और हिंसा से बचें।
  • पूरे दिन व्रत रखें और केवल फलाहार करें।
  • रात्रि में भूमि पर सोएं और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • गरीबों को दान-दक्षिणा अवश्य दें।

निष्कर्ष

पापांकुशा एकादशी का व्रत हमारे जीवन से नकारात्मकता को दूर करके आत्मिक शुद्धि प्रदान करता है। 2025 में इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए विधि-विधान से व्रत करें और इसका पूर्ण फल प्राप्त करें। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मन और शरीर को संयमित करने का एक सुअवसर भी प्रदान करता है।

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