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परिवर्तिनी एकादशी 2025: 25 सितंबर को है यह पावन तिथि
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और परिवर्तिनी एकादशी इनमें से एक पवित्र तिथि है। वर्ष 2025 में यह पर्व 25 सितंबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह एकादशी भगवान विष्णु के शयन से जागरण (देवशयनी से देवउठनी) की अवधि के बीच आती है, इसलिए इसे ‘परिवर्तिनी’ नाम दिया गया है। इस दिन व्रत रखने से भक्तों के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से 100 अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु का परिवर्तन रूप (शेषशायी से जागृत स्वरूप) पूजा जाता है। यह तिथि मनुष्य को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों सुख प्रदान करने वाली मानी गई है।
- इस एकादशी को पद्मिनी एकादशी या वामन एकादशी भी कहते हैं।
- यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी है।
- मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान से सभी पाप धुल जाते हैं।
परिवर्तिनी एकादशी 2025 का शुभ मुहूर्त
25 सितंबर 2025 के दिन एकादशी तिथि का समय निम्नलिखित रहेगा:
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 सितंबर 2025 को रात 09:14 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 25 सितंबर 2025 को रात 11:44 बजे
- व्रत पारण का समय: 26 सितंबर सुबह 06:13 से 08:29 बजे तक
नोट: व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि के भीतर ही करना चाहिए। यदि द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए, तो पारण एकादशी तिथि में ही कर लेना चाहिए।
परिवर्तिनी एकादशी की पूजा विधि
पूजन सामग्री
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर
- तुलसी दल, पुष्प, फल और तिल
- घी का दीपक, धूप, चंदन
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- नैवेद्य (फल, मिठाई या खीर)
विस्तृत पूजा विधि
1. प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति को स्थापित करें।
3. ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हुए भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं।
4. तुलसी दल, फूल और चंदन अर्पित करें।
5. घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं।
6. इस मंत्र का 108 बार जाप करें:
“ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
7. विष्णु सहस्रनाम या परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
8. रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।
9. अगले दिन सूर्योदय के बाद ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा दें।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा
पद्म पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में मान्धाता नामक एक राजा थे। उनके राज्य में भयंकर अकाल पड़ा। ऋषियों ने बताया कि यह एक राक्षस के कारण हो रहा है जिसे केवल भगवान विष्णु ही मार सकते हैं। राजा ने ॠषियों के कहने पर परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्होंने राक्षस का वध कर दिया। तब से यह व्रत संकटों को दूर करने वाला माना जाता है।
व्रत के नियम एवं सावधानियां
- एकादशी के दिन चावल, अनाज, लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित है।
- फलाहार या सात्विक भोजन लें।
- क्रोध, झूठ और किसी का अपमान करने से बचें।
- पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना शुभ माना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी का आध्यात्मिक लाभ
यह व्रत मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। इससे:
- पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है
- मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
- आर्थिक समृद्धि और सुख-शांति मिलती है
- पारिवारिक कलह दूर होती है
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है
निष्कर्ष
परिवर्तिनी एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है जो 25 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में शुभ परिवर्तन आते हैं। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर है। आइए, हम सभी इस पावन एकादशी पर भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूरे विधि-विधान से व्रत का पालन करें।
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