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Paush Amavasya 2025 नए साल की पहली अमावस्या शुभ मुहूर्त पूजा विधि

नए साल 2025 की पहली अमावस्या Paush Amavasya का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानें। इस दिन विशेष पूजा और दान से मिलता है पुण्य लाभ, जानिए कैसे करें सही उपाय।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

Paush Amavasya 2025: नए साल की पहली अमावस्या का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष अमावस्या 2025 नए साल की पहली अमावस्या है जो विशेष धार्मिक महत्व रखती है। यह तिथि पितृदोष शांति, दान-पुण्य और नए प्रारंभ के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस लेख में हम आपको पौष अमावस्या का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और इसके आध्यात्मिक लाभों के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
Paush Amavasya 2025: नए साल की पहली अमावस्या का महत्वपौष अमावस्या 2025 कब है?पौष अमावस्या का शुभ मुहूर्तक्यों महत्वपूर्ण है पौष अमावस्या?पौष अमावस्या पूजा विधिसुबह की तैयारीमुख्य पूजा विधानविशेष दान विधिपौष अमावस्या व्रत कथापौष अमावस्या के विशेष मंत्रपौष अमावस्या के आध्यात्मिक लाभसावधानियां एवं विशेष निर्देशनिष्कर्ष

पौष अमावस्या 2025 कब है?

  • तिथि: 29 दिसंबर 2025 (सोमवार)
  • अमावस्या प्रारंभ: 28 दिसंबर 2025 रात 11:58 बजे
  • अमावस्या समाप्त: 30 दिसंबर 2025 सुबह 08:07 बजे

पौष अमावस्या का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष पौष अमावस्या के दिन विशेष योग बन रहे हैं:

  • स्नान-दान मुहूर्त: सुबह 05:30 से 07:45 तक
  • पितृ तर्पण समय: प्रातः 06:12 से 08:34
  • पूजा का श्रेष्ठ समय: दोपहर 12:15 से 02:30
  • हवन सामग्री दान: संध्या 04:45 से 06:20

क्यों महत्वपूर्ण है पौष अमावस्या?

शास्त्रों के अनुसार, पौष माह में सूर्यदेव की उपासना विशेष फलदायी होती है। इस अमावस्या पर गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और पितृऋण से मुक्ति मिलती है।

पौष अमावस्या पूजा विधि

सुबह की तैयारी

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • साफ वस्त्र धारण कर पूर्व/उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठें
  • कलश स्थापना कर गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें

मुख्य पूजा विधान

  1. सर्वप्रथम “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र से गणेश जी का आवाहन करें
  2. फिर “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र से लक्ष्मी जी की पूजा करें
  3. पीले फूल, अक्षत और तिल से भगवान विष्णु का अभिषेक करें
  4. नीचे दिए गए मंत्र का 108 बार जप करें:

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”

विशेष दान विधि

इस दिन निम्न वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ माना गया है:

  • तिल: काले तिल का दान पितृदोष शांति के लिए
  • गुड़: गुड़ और घी का दान संतान सुख के लिए
  • कंबल: सर्दियों में गरीबों को कंबल दान करें
  • उड़द दाल: शनि दोष निवारण हेतु

पौष अमावस्या व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक ब्राह्मण दंपत्ति निसंतान थे। पौष अमावस्या के दिन उन्होंने तिल दान और पितृ तर्पण किया। इसके प्रभाव से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और पितृऋण से मुक्ति मिली। तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि इस दिन व्रत रखकर कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पौष अमावस्या के विशेष मंत्र

  • पितृ शांति मंत्र: “ॐ पितृ देवाय विद्महे, जगत धारिणे धीमहि, तन्नो पितृ प्रचोदयात्”
  • धन प्राप्ति मंत्र: “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः”
  • सूर्य मंत्र: “ॐ घृणि सूर्याय नमः”

पौष अमावस्या के आध्यात्मिक लाभ

इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर निम्न लाभ प्राप्त होते हैं:

  • पितृदोष से मुक्ति मिलती है
  • कुंडली के सभी दोष शांत होते हैं
  • धन-धान्य में वृद्धि होती है
  • संतान सुख की प्राप्ति होती है
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है

सावधानियां एवं विशेष निर्देश

  • इस दिन मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है
  • किसी भी प्रकार का अन्न दान न करें
  • तर्पण हमेशा काले तिल से ही करें
  • पूजा में तामसिक वस्तुओं का प्रयोग न करें

निष्कर्ष

पौष अमावस्या 2025 का पर्व हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। यह तिथि नए साल में नई ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम है। इस लेख में बताई गई पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और दान संकल्पना का पालन कर आप इस पर्व का पूर्ण लाभ उठा सकते हैं।

आप सभी को पौष अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं! माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु आपके जीवन में सुख-समृद्धि की वर्षा करें।

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