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कनकधारा स्त्रोत पाठ से पाएं अपार धन तिजोरी भर जाएगी

कनकधारा स्त्रोत का पाठ करके अपार धन-संपत्ति पाएं और अपनी तिजोरी भरें। इस पावन मंत्र के लाभ, विधि और महत्व जानें। समृद्धि पाने का सरल उपाय!

Published July 2, 2026
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4 Min Read

अपार धन-संपत्ति पाने के लिए करें कनकधारा स्त्रोत का पाठ, भर जाएगी तिजोरी

धन और समृद्धि की कामना हर किसी के मन में होती है। भक्ति और आस्था के साथ यदि कोई साधना की जाए, तो उसका फल अवश्य मिलता है। कनकधारा स्त्रोत ऐसा ही एक दिव्य मंत्र है, जिसके नियमित पाठ से माँ लक्ष्मी की कृपा बरसती है और घर में धन-धान्य की वर्षा होने लगती है। आइए, जानते हैं इस स्त्रोत की महिमा, पाठ विधि और इससे जुड़े रहस्यमयी प्रभावों के बारे में।

Contents
अपार धन-संपत्ति पाने के लिए करें कनकधारा स्त्रोत का पाठ, भर जाएगी तिजोरीकनकधारा स्त्रोत क्या है?कनकधारा स्त्रोत की कथाकनकधारा स्त्रोत पाठ करने की विधिसही समय और स्थानपाठ से पहले की तैयारीकनकधारा स्त्रोत का पाठकनकधारा स्त्रोत के लाभकनकधारा स्त्रोत से जुड़ी सावधानियाँनिष्कर्ष

कनकधारा स्त्रोत क्या है?

कनकधारा स्त्रोत संस्कृत भाषा में रचित एक पावन स्तुति है, जिसे आदि शंकराचार्य ने माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए लिखा था। इस स्त्रोत का नाम “कनकधारा” इसलिए पड़ा, क्योंकि यह स्तोत्र सुनने या पढ़ने से स्वर्ण (कनक) की वर्षा होने लगती है। कहा जाता है कि इसके पाठ से गरीबी दूर होती है और अचानक धन लाभ के अवसर प्राप्त होते हैं।

कनकधारा स्त्रोत की कथा

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, आदि शंकराचार्य एक बार भिक्षा माँगने किसी गरीब महिला के घर पहुँचे। उस महिला के पास देने के लिए एक सूखा आँवला ही था, जिसे उसने श्रद्धापूर्वक भिक्षा में दे दिया। शंकराचार्य ने उसकी दरिद्रता देखकर माँ लक्ष्मी की स्तुति में कनकधारा स्त्रोत की रचना की। माँ लक्ष्मी प्रसन्न हुईं और उस महिला के घर में स्वर्ण वर्षा होने लगी। तभी से यह स्त्रोत धन प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन माना जाता है।

कनकधारा स्त्रोत पाठ करने की विधि

इस स्त्रोत का पाठ करते समय कुछ नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि माँ लक्ष्मी की कृपा शीघ्र प्राप्त हो सके।

सही समय और स्थान

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त (4 से 6 बजे) या सायंकाल (संध्या समय) इसका पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करके लाल कपड़ा बिछाएँ।
  • माँ लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र सामने रखें और दीपक जलाएँ।

पाठ से पहले की तैयारी

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • मन को शांत करके माँ लक्ष्मी का ध्यान करें।
  • पाठ शुरू करने से पहले ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 11 बार जाप करें।

कनकधारा स्त्रोत का पाठ

नीचे दिए गए मूल मंत्रों का उच्चारण करें (संस्कृत श्लोकों की पुष्टि की गई है):

अंगं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
भृंगाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।
अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला
माङ्गल्यदाऽस्तु मम मङ्गळदेवतायाः ॥१॥

इसके बाद पूरा स्त्रोत पढ़ें या सुनें। पाठ पूरा होने पर माँ लक्ष्मी को फल, मिठाई या पुष्प अर्पित करें।

कनकधारा स्त्रोत के लाभ

  • धन संकट दूर होता है: नियमित पाठ से आर्थिक समस्याएँ समाप्त होती हैं।
  • नौकरी या व्यवसाय में वृद्धि: करियर में उन्नति और लाभ के नए रास्ते खुलते हैं।
  • ऋण से मुक्ति: कर्ज की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है।
  • सुख-समृद्धि: घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कनकधारा स्त्रोत से जुड़ी सावधानियाँ

  • स्त्रोत का पाठ पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता से करें।
  • गलत उच्चारण से बचें, संस्कृत मंत्रों को सही तरीके से बोलें।
  • पाठ करते समय नकारात्मक विचार न लाएँ।
  • स्त्रोत का उपयोग किसी को हानि पहुँचाने के लिए न करें।

निष्कर्ष

कनकधारा स्त्रोत माँ लक्ष्मी की कृपा पाने का एक सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय है। यदि आप नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं, तो धन की कमी दूर होकर समृद्धि का आगमन होता है। याद रखें, भक्ति और विश्वास के साथ किया गया हर प्रयास सफल होता है। माँ लक्ष्मी आपके घर में सुख, शांति और धन की वर्षा करें!

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