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Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में पितृ स्त्रोत पाठ से मिलेगी पितृ दोष से राहत

पितृपक्ष 2025 में पितृ स्त्रोत का पाठ करके पितृ दोष से मुक्ति पाएं। जानें कैसे यह पूजा आपके पूर्वजों को शांति देगी और आपके जीवन में सुख-समृद्धि लाएगी।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

पितृ पक्ष 2025: पितृ स्त्रोत का पाठ और पितृ दोष से मुक्ति

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह वह समय होता है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं। पितृ पक्ष 2025 में पितृ स्त्रोत का पाठ करने से सभी प्रकार के पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कि कैसे यह पवित्र कर्म आपके जीवन को सुख और शांति से भर सकता है।

Contents
पितृ पक्ष 2025: पितृ स्त्रोत का पाठ और पितृ दोष से मुक्तिपितृ पक्ष क्या है?पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ और महत्वपितृ स्त्रोत का पाठ क्यों करें?पितृ स्त्रोत का पाठ विधिपितृ दोष के लक्षणपितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करेंपितृ पक्ष की कथा और महत्वनिष्कर्ष

पितृ पक्ष क्या है?

पितृ पक्ष हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक चलने वाला 16 दिनों का समय होता है। इस दौरान पितरों को याद किया जाता है और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंड दान जैसे कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में पितृ लोक से हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और हमारे द्वारा किए गए श्राद्ध कर्म से तृप्त होते हैं।

पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ और महत्व

पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 13 सितंबर 2025 से होगी और यह 28 सितंबर 2025 तक चलेगा। इस दौरान विशेष रूप से:

  • पितरों के नाम पर ब्राह्मण भोजन कराया जाता है
  • गाय, कुत्ते और कौए को भोजन दिया जाता है
  • पितृ स्त्रोत, गायत्री मंत्र और अन्य मंत्रों का पाठ किया जाता है
  • तिल, जल और काले तिल के साथ तर्पण किया जाता है

पितृ स्त्रोत का पाठ क्यों करें?

पितृ स्त्रोत वह पवित्र मंत्र समूह है जिसका पाठ करने से पितरों को शांति मिलती है। गरुड़ पुराण और अन्य धर्म ग्रंथों में इसके महत्व को विस्तार से बताया गया है:

  • पितृ दोष से मुक्ति मिलती है
  • पारिवारिक कलह समाप्त होती है
  • धन-धान्य में वृद्धि होती है
  • संतान सुख प्राप्त होता है
  • आयु और स्वास्थ्य लाभ मिलता है

पितृ स्त्रोत का पाठ विधि

पितृ स्त्रोत का पाठ करने की सरल विधि इस प्रकार है:

  • सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन बिछाएं
  • पितरों का स्मरण करते हुए निम्न मंत्र का जाप करें:

“ॐ नमः पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
पितृभ्यो नमः स्वधायिभ्यो नमो नमः॥”

  • इसके बाद गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें
  • अंत में पितरों को जल अर्पित करें और प्रार्थना करें

पितृ दोष के लक्षण

यदि आपके जीवन में निम्न समस्याएं हैं तो समझ लें कि पितृ दोष का प्रभाव है:

  • बिना कारण आर्थिक समस्याएं आना
  • पारिवारिक सदस्यों में मतभेद रहना
  • संतान प्राप्ति में बाधा आना
  • हमेशा मानसिक अशांति महसूस करना
  • किसी भी कार्य में सफलता न मिलना

पितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • प्रतिदिन पितरों को जल अर्पित करें
  • ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान दें
  • पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं
  • गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं

क्या न करें:

  • इस अवधि में कोई शुभ कार्य न करें
  • मांस-मदिरा का सेवन न करें
  • किसी भी प्राणी को दुःख न दें
  • पितरों के नाम से कुछ भी बुरा न बोलें

पितृ पक्ष की कथा और महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, जब महाभारत युद्ध में कर्ण की मृत्यु हुई तो उसकी आत्मा स्वर्ग पहुंची। वहां उसे सोने और गहनों के अलावा भोजन नहीं मिला। जब उसने यमराज से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि उसने जीवन भर सोना दान किया लेकिन कभी पितरों के नाम पर अन्न दान नहीं किया। तब कर्ण को 15 दिनों के लिए पृथ्वी पर भेजा गया जहां उसने पितरों के नाम पर अन्न दान किया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

निष्कर्ष

पितृ पक्ष 2025 में पितृ स्त्रोत का पाठ करने से न केवल पितृ दोष से मुक्ति मिलती है बल्कि पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। यह समय अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष कर्म करने का होता है। पितरों की कृपा से ही परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। इसलिए इस पवित्र अवसर पर पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ श्राद्ध कर्म अवश्य करें।

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