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Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष आरंभ जानें परंपराएं

Pitru Paksha 2025 begins today. Learn about its traditions rituals and significance to honor ancestors during this sacred period.

Published July 2, 2026
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5 Min Read

पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में पूर्वजों को समर्पित एक विशेष अवधि है। यह समय हमें अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान करने का अवसर देता है। 2025 में, पितृ पक्ष 17 सितंबर से आरंभ होकर 2 अक्टूबर तक रहेगा।

Contents
पितृ पक्ष का महत्व: क्यों है यह अवधि इतनी पवित्र?पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ और विशेष दिनपितृ पक्ष से जुड़ी प्रमुख परंपराएँ1. तर्पण: जल अर्पित करने की विधि2. श्राद्ध: पितरों को भोजन अर्पित करना3. दान: पितरों की शांति के लिएपितृ पक्ष में क्या न करें?पितृ पक्ष की कथा: कैसे हुई इसकी शुरुआत?अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न1. क्या पितृ पक्ष में बाल कटवाना चाहिए?2. यदि पितरों की तिथि याद न हो तो क्या करें?3. क्या महिलाएँ श्राद्ध कर सकती हैं?पितरों का आशीर्वाद है अनमोल

पितृ पक्ष का महत्व: क्यों है यह अवधि इतनी पवित्र?

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा दिए गए तर्पण व श्राद्ध से तृप्त होते हैं। गरुड़ पुराण में कहा गया है:

“पितृणां तर्पणं येन कृतं श्राद्धं विधानतः।
तस्य तृप्ताः पितृगणाः प्रयच्छन्ति शुभं फलम्॥”

अर्थात, जो व्यक्ति विधिपूर्वक श्राद्ध व तर्पण करता है, उसके पितृ प्रसन्न होकर उसे मंगलमय फल प्रदान करते हैं।

पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ और विशेष दिन

इस वर्ष पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियाँ इस प्रकार हैं:

  • 17 सितंबर 2025 – पितृ पक्ष प्रारंभ (प्रतिपदा)
  • 25 सितंबर 2025 – महालया अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या)
  • 2 अक्टूबर 2025 – पितृ पक्ष समापन (अमावस्या)

महालया अमावस्या को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी तिथि ज्ञात नहीं होती।

पितृ पक्ष से जुड़ी प्रमुख परंपराएँ

1. तर्पण: जल अर्पित करने की विधि

तर्पण पितृ पक्ष का एक अनिवार्य अनुष्ठान है। इसमें काले तिल, जल, दूध और फूलों को मिलाकर पितरों को अर्पित किया जाता है। तर्पण करते समय यह मंत्र बोलें:

“ॐ पितृदेवताभ्यो नमः, अस्य तर्पणस्य अक्षयत्वाय स्वाहा।”

2. श्राद्ध: पितरों को भोजन अर्पित करना

श्राद्ध में पितरों के निमित्त विशेष भोजन तैयार किया जाता है। इसमें ये चीजें अवश्य शामिल करें:

  • खीर – पवित्रता का प्रतीक
  • पिंड – चावल और तिल से बना
  • सब्जियाँ – विशेष रूप से लौकी और बैंगन

3. दान: पितरों की शांति के लिए

पितृ पक्ष में दान का विशेष महत्व है। आप निम्नलिखित वस्तुएँ दान कर सकते हैं:

  • वस्त्र – सफेद या पीले रंग के
  • अनाज – चावल, गेहूँ, दाल
  • गाय – गोदान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है

पितृ पक्ष में क्या न करें?

इस पवित्र अवधि में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • मांस-मदिरा का सेवन न करें
  • नए कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश आदि न करें
  • क्रोध या झगड़े से बचें

पितृ पक्ष की कथा: कैसे हुई इसकी शुरुआत?

महाभारत काल में, जब कर्ण की मृत्यु हुई, तो उनकी आत्मा को स्वर्ग में सोने-चाँदी के भोजन दिए गए। जब उन्होंने पूछा कि असली भोजन क्यों नहीं मिल रहा, तो देवताओं ने बताया कि उन्होंने जीवनभर दान तो किया, लेकिन पितरों के नाम पर कुछ नहीं दिया।

तब कर्ण को 15 दिनों के लिए पृथ्वी पर लौटने की अनुमति मिली, जिसमें उन्होंने अपने पितरों को तर्पण व श्राद्ध दिया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या पितृ पक्ष में बाल कटवाना चाहिए?

नहीं, इस अवधि में बाल कटवाना या नाखून काटना अशुभ माना जाता है।

2. यदि पितरों की तिथि याद न हो तो क्या करें?

ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या (महालया) के दिन श्राद्ध करना चाहिए।

3. क्या महिलाएँ श्राद्ध कर सकती हैं?

हाँ, यदि परिवार में कोई पुरुष सदस्य न हो, तो महिलाएँ श्राद्ध कर सकती हैं।

पितरों का आशीर्वाद है अनमोल

पितृ पक्ष हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों के आशीर्वाद के बिना हमारा जीवन अधूरा है। इस पावन अवधि में थोड़ा समय निकालकर उनकी स्मृति को सम्मान दें। याद रखें, “जो पितरों को तृप्त करता है, वह स्वयं भी तृप्त होता है।”

“पितृदेवो भव, मातृदेवो भव”
(तैत्तिरीय उपनिषद)

क्या आपने इस वर्ष पितृ पक्ष के लिए कोई विशेष तैयारी की है? हमें कमेंट में बताएँ!

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