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PM Modi Prays at Lingaraj Temple Where Shiva Quenched Parvati’s Thirst

PM मोदी ने लिंगराज मंदिर में पूजा की, जहां भगवान शिव ने देवी पार्वती की प्यास खुद बुझाई थी। जानें इस पावन स्थल का इतिहास और महत्व।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

लिंगराज मंदिर में पीएम मोदी की भक्ति: एक दिव्य अनुभव

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में श्री लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। यह मंदिर न केवल अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ का एक चमत्कारिक इतिहास भी है – जहाँ स्वयं भगवान शिव ने देवी पार्वती की प्यास बुझाई थी। आइए, इस पावन स्थल की गहराई में उतरते हैं।

Contents
लिंगराज मंदिर में पीएम मोदी की भक्ति: एक दिव्य अनुभवलिंगराज मंदिर: भुवनेश्वर की आध्यात्मिक धरोहरमंदिर से जुड़े प्रमुख तथ्य:पीएम मोदी की पूजा: भक्ति और राष्ट्र निर्माण का संगमपूजा विधि की खास बातें:वह पौराणिक कथा: जब शिव ने बुझाई थी पार्वती की प्यासकथा का आध्यात्मिक महत्व:मंदिर की वास्तुकला: पत्थरों में बसा दिव्य संगीतवास्तुशिल्प के विशेष तत्व:आध्यात्मिक अनुभूति: जहाँ भक्ति और इतिहास मिलते हैंदर्शन का सही समय:निष्कर्ष: शिव की नगरी का अमर प्रेम

लिंगराज मंदिर: भुवनेश्वर की आध्यात्मिक धरोहर

11वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर कलिंग वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। मंदिर परिसर में मुख्य लिंग (शिवलिंग) 8 फीट ऊँचा है और यहाँ हरिहर (शिव-विष्णु के संयुक्त स्वरूप) की पूजा होती है।

मंदिर से जुड़े प्रमुख तथ्य:

  • स्थापना: राजा जजाति केशरी द्वारा
  • विशेषता: 250 फीट ऊँचा विमान (शिखर)
  • पवित्र जलाशय: बिंदुसागर तालाब
  • प्रमुख उत्सव: शिवरात्रि, चंदन यात्रा

पीएम मोदी की पूजा: भक्ति और राष्ट्र निर्माण का संगम

प्रधानमंत्री ने मंदिर के मुख्य पुजारियों के मार्गदर्शन में रुद्राभिषेक किया। इस दौरान उन्होंने शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्व पत्र चढ़ाए। यह दृश्य देशवासियों के लिए एक आध्यात्मिक प्रेरणा बना।

पूजा विधि की खास बातें:

  • पारंपरिक ओडिशी शैली में आरती
  • संस्कृत मंत्रों का उच्चारण: “ॐ नमः शिवाय”
  • मंदिर के 1500 वर्ष पुराने रीति-रिवाजों का पालन

वह पौराणिक कथा: जब शिव ने बुझाई थी पार्वती की प्यास

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ देवी पार्वती ने तपस्या की थी। प्यास से व्याकुल होने पर भगवान शिव ने भूमि से जल प्रकट किया, जो आज बिंदुसागर तालाब के रूप में विद्यमान है। इसी जल से आज भी शिवलिंग का अभिषेक होता है।

कथा का आध्यात्मिक महत्व:

  • भक्ति की शक्ति का प्रतीक
  • प्रकृति और देवता का अटूट संबंध
  • स्त्री शक्ति के सम्मान का संदेश

मंदिर की वास्तुकला: पत्थरों में बसा दिव्य संगीत

मंदिर का जगमोहन (सभा मंडप) और विमान (गर्भगृह) पत्थरों पर उकेरी गई 500 से अधिक मूर्तियों से सुशोभित है। यहाँ शैव, वैष्णव और शाक्त परंपराओं का अद्वितीय समन्वय देखने को मिलता है।

वास्तुशिल्प के विशेष तत्व:

  • कलश: 40 टन वजनी चंदन की लकड़ी से निर्मित
  • अर्धमंडप: नृत्य मुद्राओं वाली अप्सराओं की मूर्तियाँ
  • प्राकार: 7 फीट मोटी दीवारें

आध्यात्मिक अनुभूति: जहाँ भक्ति और इतिहास मिलते हैं

लिंगराज मंदिर में प्रवेश करते ही एक दिव्य शांति का अनुभव होता है। यहाँ की वायु में घुली धूप, फूलों और घंटियों की ध्वनि मन को भक्ति में डुबो देती है।

दर्शन का सही समय:

  • सुबह 5 बजे: मंगला आरती
  • दोपहर 12 बजे: भोग लगान का समय
  • रात 9 बजे: शयन आरती

निष्कर्ष: शिव की नगरी का अमर प्रेम

लिंगराज मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि भारतीय संस्कृति का जीवित विश्वकोश भी है। पीएम मोदी की यह पूजा हमें अपनी प्राचीन परंपराओं से जुड़ने का संदेश देती है। जैसे शिव ने पार्वती की प्यास बुझाई, वैसे ही यह मंदिर आज भी करोड़ों भक्तों की आध्यात्मिक प्यास शांत करता है।

हर शिवभक्त के लिए यह स्थान एक बार अवश्य देखने योग्य है – जहाँ पत्थर पूजा बन जाते हैं और भक्ति इतिहास के पन्नों में अमर हो जाती है।

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