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रमज़ान 2025: 03 अप्रैल के सहरी और इफ्तार का समय
रमज़ान का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए आत्मशुद्धि, इबादत और रोज़े का समय होता है। यह महीना अल्लाह की रहमतों, बरकतों और माफ़ी का होता है। 03 अप्रैल 2025 को रमज़ान का चौथा रोज़ा होगा, और इस दिन के सहरी व इफ्तार के समय को जानना हर रोज़ेदार के लिए ज़रूरी है। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि इस दिन सहरी कब तक खाई जा सकती है और इफ्तार का समय क्या होगा।
सहरी और इफ्तार का महत्व
रमज़ान में सहरी और इफ्तार दोनों का विशेष महत्व है। सहरी रोज़े की शुरुआत है, जबकि इफ्तार रोज़े के समापन का समय होता है। हदीस में सहरी को बरकत वाला समय बताया गया है।
- सहरी: फज्र की अज़ान से पहले खाया जाने वाला भोजन।
- इफ्तार: मग़रिब की अज़ान के बाद रोज़ा खोलने का समय।
03 अप्रैल 2025 के सहरी और इफ्तार का समय
भारत के विभिन्न शहरों में 03 अप्रैल 2025 को सहरी और इफ्तार का समय थोड़ा-थोड़ा अलग हो सकता है। नीचे कुछ प्रमुख शहरों के समय दिए गए हैं:
दिल्ली
- सहरी का अंतिम समय: 04:45 AM
- इफ्तार का समय: 06:42 PM
मुंबई
- सहरी का अंतिम समय: 05:12 AM
- इफ्तार का समय: 06:58 PM
लखनऊ
- सहरी का अंतिम समय: 04:38 AM
- इफ्तार का समय: 06:35 PM
हैदराबाद
- सहरी का अंतिम समय: 04:58 AM
- इफ्तार का समय: 06:45 PM
रमज़ान में इबादत का महत्व
रमज़ान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का महीना नहीं है, बल्कि यह तक़वा (ईश्वर-भय) और इबादत का समय है। इस महीने में क़ुरान का पाठ, नमाज़, दुआ और दान का विशेष महत्व है।
- तरावीह: रात की विशेष नमाज़ जो सिर्फ रमज़ान में पढ़ी जाती है।
- ज़कात: गरीबों और ज़रूरतमंदों की मदद करने का पवित्र कर्तव्य।
- इतिकाफ: आखिरी 10 दिनों में मस्जिद में बैठकर इबादत करना।
सहरी और इफ्तार के दौरान स्वास्थ्य सुझाव
रोज़े के दौरान सेहत का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप स्वस्थ रह सकते हैं:
सहरी में क्या खाएं?
- पानी: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- प्रोटीन: अंडे, दूध, दही और दालें लें।
- फाइबर: साबुत अनाज, फल और सब्ज़ियां खाएं।
इफ्तार में क्या खाएं?
- खजूर: सुन्नत के अनुसार खजूर से रोज़ा खोलें।
- हल्का भोजन: तला हुआ भोजन कम मात्रा में लें।
- फलों का रस: ताज़ा जूस या शरबत पिएं।
निष्कर्ष
रमज़ान का महीना हमें सब्र, इबादत और दूसरों की मदद करने का सुनहरा मौका देता है। 03 अप्रैल 2025 को सहरी का समय सुबह फज्र से पहले और इफ्तार का समय मग़रिब की अज़ान के बाद होगा। इस पवित्र महीने में अल्लाह की रहमतों और बरकतों का लाभ उठाएं और अपने रोज़े व इबादत को पूरी निष्ठा से अदा करें। रमज़ान मुबारक!
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