रमजान 2025: 27वां रोजा कल, जानें सहरी और इफ्तार का समय
रमजान का पाक महीना मुसलमानों के लिए इबादत, रहमत और मगफिरत का समय होता है। यह वह पवित्र अवधि है जब हर रोजेदार अल्लाह की इबादत में डूब जाता है। 27वां रोजा रमजान के आखिरी अशरा में आता है, जिसे लैलतुल कद्र (शब-ए-कद्र) की तलाश में गुजारा जाता है। इस लेख में, हम आपके लिए सहरी और इफ्तार का सटीक समय साझा करेंगे, साथ ही इस पवित्र दिन की फजीलत पर भी प्रकाश डालेंगे।
27वें रोजे का महत्व
रमजान के आखिरी 10 दिनों में 27वां रोजा विशेष महत्व रखता है। हदीसों में बताया गया है कि इसी रात कुरान-ए-पाक नाजिल हुआ था। पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) ने फरमाया: “जो कोई शब-ए-कद्र में ईमान और इह्तिसाब के साथ इबादत करे, उसके पिछले सारे गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।”
- इतिकाफ की सुन्नत: कई मुसलमान इस दिन मस्जिद में इतिकाफ करते हैं।
- कुरान की तिलावत: पूरे महीने कुरान खत्म करने का प्रयास किया जाता है।
- दुआओं की कबूलियत: इस रात की दुआएं अल्लाह विशेष रूप से कबूल करते हैं।
रमजान 2025: 27वें रोजे का समय सारणी
प्रमुख शहरों के लिए सहरी और इफ्तार का समय
नीचे दिए गए टाइम टेबल में भारत के प्रमुख शहरों के लिए 27वें रोजे के सहरी और इफ्तार का समय दिया गया है। यह समय स्थानीय मस्जिदों और इस्लामिक सेंटर्स द्वारा जारी कैलेंडर के अनुसार है:
- दिल्ली: सहरी – 4:48 AM | इफ्तार – 6:52 PM
- मुंबई: सहरी – 5:12 AM | इफ्तार – 7:04 PM
- लखनऊ: सहरी – 4:35 AM | इफ्तार – 6:38 PM
- हैदराबाद: सहरी – 4:58 AM | इफ्तार – 6:47 PM
- बेंगलुरु: सहरी – 5:04 AM | इफ्तार – 6:42 PM
समय निर्धारण में ध्यान रखने योग्य बातें
- सहरी का समय फज्र की अज़ान से पहले का होता है।
- इफ्तार मगरिब की नमाज़ के समय किया जाता है।
- हर शहर में सूर्यास्त का समय अलग होने के कारण इफ्तार का समय भिन्न हो सकता है।
- मौसम विभाग द्वारा जारी समय सबसे सटीक माना जाता है।
27वें रोजे की तैयारी कैसे करें?
सहरी के लिए उपयोगी सुझाव
सहरी रोजे की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सुन्नत है। हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) ने फरमाया: “सहरी करो, क्योंकि सहरी में बरकत होती है।”
- पोषक आहार: खजूर, दलिया, फल और पर्याप्त पानी लें।
- दुआ का समय: सहरी के अंतिम समय में दुआ की कबूलियत अधिक होती है।
- जल्दी उठें: सहरी के लिए अंतिम समय तक इंतजार न करें।
इफ्तार की अहमियत
इफ्तार के समय की दुआ को अल्लाह कभी नहीं ठुकराता। पैगंबर (स.अ.व.) इफ्तार में खजूर और पानी से रोजा खोलते थे।
- समय पर इफ्तार: सूर्यास्त होते ही रोजा खोल देना चाहिए।
- सादगी: इफ्तार में हैवी फूड से बचें, पहले खजूर और पानी लें।
- दान का महत्व: गरीबों को इफ्तार कराने पर बड़ा सवाब मिलता है।
27वें रोजे की विशेष इबादतें
रात की नमाज़ (तरावीह)
रमजान में तरावीह की नमाज़ का विशेष महत्व है। 27वीं रात को पूरी कुरान खत्म करने की परंपरा है।
दुआ-ए-कद्र (शब-ए-कद्र की दुआ)
इस रात पढ़ने के लिए विशेष दुआ है: “अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफवा फअफु अन्नी” (हे अल्लाह! आप माफ करने वाले हैं, माफी को पसंद करते हैं, तो मुझे माफ कर दीजिए।)
निष्कर्ष
रमजान का 27वां रोजा हर मुसलमान के लिए अल्लाह की रहमत पाने का सुनहरा अवसर है। इस दिन सहरी और इफ्तार के समय का विशेष ध्यान रखें, साथ ही जकात और फितरा का भी ध्यान रखें। आशा है यह समय सारणी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। पूरे महीने की तरह इस रोजे में भी अल्लाह हम सबकी इबादत कुबूल करे और हमें अपनी रहमत से नवाजे। आमीन!
