रमज़ान 2025: 29वां रोज़ा कल, जानें सहरी और इफ्तार का समय
अल्लाह की रहमतों और बरकतों का पाक महीना रमज़ान अपने आखिरी पड़ाव पर है। 29वां रोज़ा कल मुसलमान भाइयों-बहनों के लिए इबादत और सब्र का एक और अवसर लेकर आ रहा है। यह वह पवित्र समय है जब हर नेकी का सवाब 70 गुना बढ़ जाता है। आइए, जानते हैं कल के सहरी और इफ्तार के सही समय के साथ-साथ इस रोज़े की फज़ीलत और दुआओं के बारे में।
29वें रोज़े का महत्व
रमज़ान के आखिरी दस दिनों में लैलतुल कद्र (शब-ए-क़द्र) की तलाश की जाती है, जो 29वें रोज़े की रात भी हो सकती है। पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) ने फरमाया: “जो शख़्स लैलतुल कद्र में ईमान और इह्तिसाब (सवाब की नीयत) के साथ क़याम करे, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।” (सहीह बुखारी)
- इस रोज़े की नीयत में विशेष बरकत है
- इफ्तार के समय दुआओं की क़ुबूलियत बढ़ जाती है
- कुरआन ख़त्म करने का सुनहरा मौक़ा
कल के सहरी और इफ्तार का समय (शहरवार)
नीचे दिए गए समय सूर्योदय और सूर्यास्त के हिसाब से अहम भारतीय शहरों के लिए हैं (29वां रोज़ा, रमज़ान 2025):
- दिल्ली: सहरी – 04:48 AM | इफ्तार – 06:52 PM
- मुंबई: सहरी – 05:12 AM | इफ्तार – 07:03 PM
- लखनऊ: सहरी – 04:42 AM | इफ्तार – 06:45 PM
- हैदराबाद: सहरी – 05:00 AM | इफ्तार – 06:47 PM
- बेंगलुरु: सहरी – 05:15 AM | इफ्तार – 06:42 PM
सहरी के समय की अहमियत
पैगंबर (स.अ.व.) ने फरमाया: “हमारे और अहले किताब के रोज़ों में सहरी खाने का फर्क़ है।” (सहीह मुस्लिम)। सहरी का समय फज्र की अज़ान से कुछ मिनट पहले तक होता है।
- सहरी में खजूर और पानी से भी रोज़ा रखा जा सकता है
- सेहरी के आखिरी समय में “वसवसा-ए-शैतानी” से बचें
- नीयत के साथ दुआ पढ़ें: “वबिसवौमी गदमिन शह्रि रमदान”
इफ्तार की सुन्नतें और दुआ
इफ्तार का समय मग़रिब की अज़ान के साथ शुरू होता है। पैगंबर (स.अ.व.) खजूर से रोज़ा खोलते थे, अगर न मिले तो पानी से।
- इफ्तार की दुआ: “अल्लाहुम्मा लक सुम्तु व अला रिज़्क़िका अफ्तरतु”
- इफ्तार में जल्दी करना सुन्नत है
- ग़रीबों को इफ्तार कराने का विशेष सवाब
29वें रोज़े की विशेष तैयारी
चूंकि यह रमज़ान के आखिरी दिनों में है, इसलिए विशेष इबादतों पर ध्यान दें:
- तेरावीह की नमाज़ पूरी लगन के साथ पढ़ें
- इस्तिग़फार और दुआओं को ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त दें
- कुरआन पाक की आखिरी सुरों का तिलावत करें
- जकात और फितरा का विशेष ध्यान रखें
समापन
रमज़ान का यह 29वां रोज़ा हमें अल्लाह की रहमतों के आखिरी दरवाज़े तक ले आया है। सहरी और इफ्तार के इन पवित्र समयों का पूरा लाभ उठाएं। ईद की खुशियों से पहले इस रोज़े को पूरी शिद्दत के साथ अदा करें। अल्लाह हम सभी के रोज़ों, नमाज़ों और दुआओं को क़ुबूल करे। आमीन!
नोट: उपरोक्त समय स्थानीय मस्जिदों या विश्वसनीय इस्लामिक कैलेंडर से सत्यापित कर लें, क्योंकि मौसमी परिस्थितियों के कारण 1-2 मिनट का अंतर हो सकता है।
