MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: Rukmini Ashtami 2025 रुक्मिणी अष्टमी तिथि पूजा महत्व
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

Rukmini Ashtami 2025 रुक्मिणी अष्टमी तिथि पूजा महत्व

रुक्मिणी अष्टमी 2025 की तिथि, पूजा विधि और महत्व जानें। इस विशेष दिन पर भगवान कृष्ण और रुक्मिणी की पूजा का सही तरीका और आशीर्वाद पाने के उपाय यहाँ पढ़ें।

Published October 31, 2026
Share
4 Min Read

Rukmini Ashtami 2025: रुक्मिणी अष्टमी आज, जानिए तिथि, पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म में रुक्मिणी अष्टमी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी और अष्टभार्या में प्रमुख देवी रुक्मिणी को समर्पित है। इस दिन व्रत रखकर पूजा-अर्चना करने से सुखी दांपत्य जीवन और संतान सुख की प्राप्ति होती है। आइए, जानते हैं रुक्मिणी अष्टमी 2025 की तिथि, पूजन विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से।

Contents
Rukmini Ashtami 2025: रुक्मिणी अष्टमी आज, जानिए तिथि, पूजा विधि और महत्वरुक्मिणी अष्टमी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्तक्यों मनाई जाती है रुक्मिणी अष्टमी?रुक्मिणी अष्टमी पूजा विधिसुबह की तैयारीपूजन सामग्रीपूजा विधिरुक्मिणी अष्टमी व्रत कथारुक्मिणी अष्टमी का महत्वविशेष नियमरुक्मिणी अष्टमी पर विशेष भोगनिष्कर्ष

रुक्मिणी अष्टमी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

2025 में रुक्मिणी अष्टमी 25 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह व्रत रखा जाता है।

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 24 अगस्त 2025, सुबह 10:15 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 25 अगस्त 2025, सुबह 08:30 बजे
  • पूजा का शुभ समय: प्रातः 06:00 बजे से 10:00 बजे तक

क्यों मनाई जाती है रुक्मिणी अष्टमी?

पौराणिक कथा के अनुसार, देवी रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए इसी दिन कठोर व्रत किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से यह व्रत सुहागिनों द्वारा मनाया जाता है।

रुक्मिणी अष्टमी पूजा विधि

इस व्रत को करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:

सुबह की तैयारी

  • प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें (पीले या लाल रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं)।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।

पूजन सामग्री

  • श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी की मूर्ति/तस्वीर
  • फूल, फल, तुलसी दल
  • धूप, दीप, नैवेद्य
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)

पूजा विधि

  • चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर श्रीकृष्ण-रुक्मिणी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • पंचामृत से अभिषेक करें, फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं।
  • चंदन, अक्षत, फूल अर्पित करें।
  • धूप-दीप दिखाकर निम्न मंत्र का जाप करें:

मंत्र:
“ॐ देवी रुक्मिण्यै नमः”
“ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:॥”

रुक्मिणी अष्टमी व्रत कथा

पुराणों में वर्णित है कि विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी भगवान कृष्ण से प्रेम करती थीं। परंतु उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया। तब रुक्मिणी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को पत्र भेजकर उद्धार की याचना की। भगवान कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह किया। मान्यता है कि रुक्मिणी ने इसी अष्टमी को व्रत रखकर कृष्ण को पति रूप में प्राप्त किया था।

रुक्मिणी अष्टमी का महत्व

यह व्रत विशेष रूप से सुहागिनों के लिए फलदायी माना जाता है:

  • वैवाहिक जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है।
  • पति की दीर्घायु और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • भक्तों को भगवान कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • कुंडली के दोष दूर होते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

विशेष नियम

  • इस दिन अन्न ग्रहण न करें, फलाहार करें।
  • पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • गरीबों को भोजन या वस्त्र दान करें।
  • रात्रि में भजन-कीर्तन करें।

रुक्मिणी अष्टमी पर विशेष भोग

इस दिन भगवान को माखन-मिश्री, पंचामृत और फलाहार भोग लगाएं। कुछ स्थानों पर इन विशेष व्यंजनों का प्रसाद बनाया जाता है:

  • बेसन के लड्डू
  • साबुदाना खिचड़ी
  • सिंघाड़े के आटे का हलवा
  • दूध और मेवे से बने पकवान

निष्कर्ष

रुक्मिणी अष्टमी का व्रत भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। यह हमें देवी रुक्मिणी के अनन्य प्रेम और श्रीकृष्ण के प्रति उनकी निष्ठा की शिक्षा देता है। इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और दांपत्य जीवन में आनंद की प्राप्ति होती है। 25 अगस्त 2025 को इस पावन व्रत को पूरी विधि-विधान से मनाएं और भगवान कृष्ण व देवी रुक्मिणी का आशीर्वाद प्राप्त करें।

You Might Also Like

हनुमानजी गुस्से में क्यों हैं तस्वीर बनाने वाला कौन

केदारनाथ दर्शन का फल इनके दर्शन से भी मिलता है

श्रावणी पर्व: धरती पर जीवन जागा

मौत की आहट सुन सकते हैं छह महीने पहले करें यह उपाय

Moon Black Spot: चंद्रमा को क्यों और किसने दिया श्राप दाग का रहस्य?

Share

Latest News

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
Religion Spirituality October 31, 2026
राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
Religion Spirituality October 31, 2026
Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
Religion Spirituality October 31, 2026
Durga Puja 2025 आज से शुरू जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Religion Spirituality October 31, 2026

You Might also Like

शिव और कृष्ण में छिड़ा संग्राम Shiv Krishna Yudh
ReligionSpirituality

शिव और कृष्ण में छिड़ा संग्राम Shiv Krishna Yudh

October 31, 2026
गणेश पूजा और उत्सव की खास बातें जानिए
ReligionSpirituality

गणेश पूजा और उत्सव की खास बातें जानिए

October 31, 2026
जनेऊ दाएं कान पर ही क्यों लपेटते हैं? Why is Janeu worn on the right ear?
ReligionSpirituality

जनेऊ दाएं कान पर ही क्यों लपेटते हैं? Why is Janeu worn on the right ear?

October 31, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
  • राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
  • Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech HTML sitemap
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?