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सकट चौथ 2025: 31 जनवरी को है यह पावन व्रत, जानिए इसकी पौराणिक कथा और महत्व
हिंदू धर्म में सकट चौथ का विशेष महत्व है। यह व्रत संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। साल 2025 में यह पावन पर्व 31 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश और चंद्रमा की विशेष पूजा की जाती है। आइए जानते हैं इस व्रत की पौराणिक कथा, विधि और महत्व के बारे में विस्तार से।
सकट चौथ क्या है?
सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। माघ माह की सकट चौथ को विशेष माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा करने से सभी संकट दूर होते हैं।
- तिथि: 31 जनवरी 2025 (शुक्रवार)
- चतुर्थी प्रारंभ: 30 जनवरी रात 10:15 बजे
- चतुर्थी समाप्त: 31 जनवरी रात 08:54 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:23 से 08:54 तक
सकट चौथ की पौराणिक कथा
सकट चौथ से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है जो भगवान गणेश के संकटमोचक स्वरूप को दर्शाती है:
राजा हरिश्चंद्र और सकट चौथ
प्राचीन काल में राजा हरिश्चंद्र अपनी सत्यनिष्ठा और दानशीलता के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार ऋषि विश्वामित्र ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। उन्होंने राजा से उनका सारा राज्य और धन दान में मांग लिया। सत्य के पालन हेतु राजा ने सब कुछ दान कर दिया।
निर्धन होकर राजा को अपनी पत्नी और पुत्र के साथ काशी में रहना पड़ा। एक दिन उनके पुत्र की एक सर्प ने डस लिया और वह मृत्यु को प्राप्त हो गया। शोकाकुल राजा पुत्र के शव को लेकर श्मशान गए। वहां उन्हें एक ब्राह्मण मिला जिसने उन्हें सकट चौथ व्रत के बारे में बताया।
राजा और रानी ने विधि-विधान से यह व्रत रखा। भगवान गणेश प्रसन्न हुए और उनके पुत्र को पुनर्जीवन दान दिया। इसके बाद राजा को उनका खोया हुआ राज्य भी वापस मिल गया। तभी से यह व्रत संकटों को दूर करने वाला माना जाता है।
सकट चौथ व्रत विधि
इस व्रत को रखने की विशेष विधि है जिसका पालन करने से अधिक फल प्राप्त होता है:
व्रत से एक दिन पहले
- सायंकाल स्नान करके घर की सफाई करें
- रात को सात्विक भोजन ग्रहण करें
- मन में भगवान गणेश का ध्यान करते हुए सोएं
व्रत के दिन
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण करके भगवान गणेश की मूर्ति/तस्वीर स्थापित करें
- लाल फूल, दूर्वा, मोदक और लड्डू का भोग लगाएं
- निम्न मंत्र का जाप करें: “ॐ गं गणपतये नमः”
- संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें
- शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें
- फिर भगवान गणेश को भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें
- अंत में व्रत कथा सुनकर आरती करें
सकट चौथ का महत्व
हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष स्थान है:
- संकटों का नाश: यह व्रत जीवन के सभी संकटों को दूर करता है
- संतान की रक्षा: संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए यह व्रत रखा जाता है
- धन-समृद्धि: आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है
- मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से व्रत रखने पर मनोवांछित फल प्राप्त होता है
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
इस व्रत में चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है। चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है। व्रत के दिन चंद्र दर्शन से मानसिक शांति मिलती है। उपवास रखने से शरीर को विषाक्त पदार्थों से मुक्ति मिलती है और पाचन तंत्र को आराम मिलता है।
सकट चौथ के विशेष उपाय
इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से अधिक लाभ प्राप्त होता है:
- गणेश जी को दूर्वा (एक विशेष घास) अर्पित करें – यह उन्हें अत्यंत प्रिय है
- मूंग की दाल और गुड़ का दान करें – इससे राहु-केतु के दोष शांत होते हैं
- 21 मोदक या लड्डू का भोग लगाएं – यह संख्या गणेश जी को प्रिय है
- पूजा के बाद किसी ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएं
निष्कर्ष
सकट चौथ का यह पावन पर्व हमें जीवन के संकटों से मुक्ति दिलाने वाला है। 31 जनवरी 2025 को इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मनाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए इस व्रत को पूरी निष्ठा से मनाएं।
ॐ गणेशाय नमः
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