पितृपक्ष का महत्व और सर्व पितृ अमावस्या
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। यह वह पावन समय होता है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए विभिन्न कर्मकांड करते हैं। सर्व पितृ अमावस्या 2025 पर पितृपक्ष का समापन हो रहा है, इसलिए इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है।
क्यों मनाई जाती है सर्व पितृ अमावस्या?
शास्त्रों के अनुसार, जिन पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका तर्पण नहीं किया जाता, उनकी आत्मा की शांति के लिए सर्व पितृ अमावस्या पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन पितरों को जल देने, ब्राह्मण भोजन कराने और दान-पुण्य करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सर्व पितृ अमावस्या 2025: शुभ मुहूर्त और तिथि
- तिथि: 22 सितंबर 2025 (सोमवार)
- अमावस्या प्रारंभ: 21 सितंबर 2025, रात 11:49 बजे
- अमावस्या समाप्त: 22 सितंबर 2025, रात 08:14 बजे
- तर्पण मुहूर्त: प्रातः 05:43 से 06:11 तक (सर्वोत्तम समय)
सर्व पितृ अमावस्या पर क्या करें? (पितरों को प्रसन्न करने के उपाय)
1. पितृ तर्पण और जल दान
इस दिन सुबह स्नान करके काले तिल, जल और कुशा लेकर पितरों का नाम लेते हुए तर्पण करें। मंत्र है:
“ॐ पितृगणाय स्वधा नमः, अद्य अमुक गोत्रस्य (अपना गोत्र बोलें) पितृ (नाम बोलें) स्वधा नमः।”
2. ब्राह्मण भोजन और दान
- ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।
- गरीबों को अनाज, वस्त्र, फल आदि का दान करें।
- गाय को हरा चारा खिलाएं, कुत्ते को रोटी दें।
3. पिंड दान और श्राद्ध कर्म
यदि संभव हो, तो गया जी या किसी पवित्र नदी के किनारे पिंड दान करें। श्राद्ध कर्म के लिए यह मंत्र पढ़ें:
“ॐ असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय।”
4. पीपल के पेड़ की पूजा
पीपल के वृक्ष को जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं। मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
सर्व पितृ अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व
हमारे ऋषि-मुनियों ने कहा है कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण होता है। जो व्यक्ति अपने पितरों का श्राद्ध और तर्पण नहीं करता, उसके जीवन में कष्ट बने रहते हैं। पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन निम्न कार्य करें:
- गीता का पाठ करें या सुनें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- अपने घर में शांति बनाए रखें, कलह से बचें।
पितृपक्ष में क्या न करें?
- इस दिन मांस-मदिरा का सेवन न करें।
- किसी का अपमान न करें, झूठ न बोलें।
- नए कार्य (विवाह, गृह प्रवेश आदि) शुरू न करें।
पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए विशेष मंत्र
“ॐ पितृ देवाय विद्महे, जगत धारिणी धीमहि, तन्नो पितृ प्रचोदयात्।”
इस मंत्र का 108 बार जाप करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।
सर्व पितृ अमावस्या 2025 पर पितृपक्ष का समापन हो रहा है। यह दिन हमें अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन दान-पुण्य, तर्पण और श्राद्ध कर्म अवश्य करें। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
आप सभी को सर्व पितृ अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏

