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शंख में देवताओं का वास अमंगल दूर करता है

शंख में देवताओं का वास होता है और इसकी ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। जानिए शंख के पवित्र महत्व, वैज्ञानिक तथ्य और इसके आध्यात्मिक लाभ।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

शंख में होता है देवताओं का वास, इसकी ध्वनि से अमंगल हो जाता है दूर

हिंदू धर्म में शंख का विशेष स्थान है। इसे केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि दिव्य आभूषण और पवित्र प्रतीक माना जाता है। पुराणों के अनुसार, शंख की ध्वनि न सिर्फ वातावरण को शुद्ध करती है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके देवी-देवताओं का आह्वान भी करती है। आइए जानते हैं इस पावन धार्मिक वस्तु का रहस्यमयी महत्व!

Contents
शंख में होता है देवताओं का वास, इसकी ध्वनि से अमंगल हो जाता है दूरशंख: समुद्र मंथन से प्रकट हुआ दिव्य उपहारवैज्ञानिक दृष्टिकोण: शंखनाद के चमत्कारी प्रभावशंख पूजन की विधि एवं मंत्रसुबह की पूजा विधिशंख में जल भरकर छिड़काव का महत्वअलग-अलग देवताओं के शंख1. विष्णु भगवान का पंचजन्य शंख2. देवी दुर्गा का देवदत्त शंख3. भगवान शिव का धर्म शंखशंख से जुड़ी सावधानियाँनिष्कर्ष: शंख है संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक

शंख: समुद्र मंथन से प्रकट हुआ दिव्य उपहार

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान पंचजन्य शंख प्रकट हुआ था, जिसे भगवान विष्णु ने धारण किया। इसकी उत्पत्ति के बारे में एक मान्यता यह भी है:

  • दक्षिणावर्ती शंख: लक्ष्मी जी का प्रतीक, घर में समृद्धि लाता है
  • वामावर्ती शंख: शिवजी से जुड़ा, तांत्रिक क्रियाओं में उपयोगी
  • गोमुखी शंख: जल चढ़ाने के लिए पूजा में प्रयुक्त

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: शंखनाद के चमत्कारी प्रभाव

आधुनिक विज्ञान ने भी माना है कि शंख की ध्वनि में अद्भुत शक्ति होती है:

  • इससे निकलने वाली सोनिक बूम वायुमंडल के हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करती है
  • प्रतिदिन शंख बजाने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है
  • इसकी ध्वनि मन को शांत कर एंग्जाइटी कम करती है

शंख पूजन की विधि एवं मंत्र

स्कंद पुराण में बताया गया है कि शंख की स्थापना एवं पूजन इस प्रकार करें:

सुबह की पूजा विधि

  • स्नान के बाद साफ आसन पर लाल कपड़ा बिछाएं
  • शंख पर गंगाजल छिड़कर शुद्ध करें
  • चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें

मंत्रोच्चारण:
“ॐ शंखाय नमः”
“ॐ समुद्रजाय विद्महे पाणिजाय धीमहि तन्नः शंखः प्रचोदयात्”

शंख में जल भरकर छिड़काव का महत्व

मार्कंडेय पुराण कहता है कि शंख में भरा जल अमृत तुल्य हो जाता है:

  • घर के मंदिर में रखे शंख का जल प्रतिदिन भगवान को अर्पित करें
  • इस जल को घर के कोनों में छिड़कने से वास्तुदोष दूर होता है
  • रोगी को शंखजल पिलाने से स्वास्थ्य लाभ होता है

अलग-अलग देवताओं के शंख

1. विष्णु भगवान का पंचजन्य शंख

महाभारत में वर्णित है कि भगवान कृष्ण ने इसी शंख से कौरवों की सेना में भय उत्पन्न किया था। इसका नाद अधर्म का नाश करने वाला माना जाता है।

2. देवी दुर्गा का देवदत्त शंख

दुर्गा सप्तशती में वर्णित इस शंख की ध्वनि से असुरों का मनोबल टूट जाता था। आज भी नवरात्रि में इस शंख का पूजन विशेष फलदायी माना जाता है।

3. भगवान शिव का धर्म शंख

इसकी ध्वनि को मोक्ष का मार्ग दिखाने वाली माना जाता है। तंत्र साधना में इसका विशेष महत्व है।

शंख से जुड़ी सावधानियाँ

  • कभी भी खाली शंख न बजाएं, इसमें जल अवश्य भरें
  • स्त्रियों द्वारा शंख बजाने की मनाही है (गरुड़ पुराण अनुसार)
  • टूटे हुए या दरार वाले शंख का उपयोग न करें
  • शंख को कभी भी जमीन पर न रखें, सदैव पवित्र आसन पर रखें

निष्कर्ष: शंख है संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक

शंख के बारे में यह लेख लिखते हुए हमें पता चला कि यह सिर्फ एक सीप नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। इसकी ध्वनि में वह दिव्य शक्ति है जो हमें आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ती है। प्रतिदिन शंखनाद करने और इसका सम्मान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए, हम भी इस पवित्र परंपरा को जीवन में अपनाएं और देवताओं के आशीर्वाद को प्राप्त करें!

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