शीतला षष्ठी व्रत 2025: तिथि, महत्व और पूजा विधि
हिंदू धर्म में शीतला षष्ठी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत माता शीतला की आराधना में रखा जाता है, जो संक्रामक रोगों से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं। 2025 में यह व्रत 5 मार्च को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस व्रत की पूजन विधि, कथा और शुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से…
शीतला षष्ठी व्रत 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- व्रत तिथि: 5 मार्च 2025 (बुधवार)
- षष्ठी तिथि प्रारंभ: 4 मार्च रात 9:58 बजे
- षष्ठी तिथि समाप्त: 5 मार्च रात 11:42 बजे
- पूजा का शुभ समय: प्रातः 6:30 बजे से 9:00 बजे तक
शीतला षष्ठी व्रत का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, माता शीतला की पूजा से चेचक, खसरा, त्वचा रोग और बुखार जैसी बीमारियों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की रक्षा और परिवार के स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर माता शीतला के मंत्रों का जाप करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
क्यों कहते हैं ‘बासी भोजन का पर्व’?
इस व्रत की विशेष परंपरा है कि एक दिन पहले बना भोजन ही षष्ठी के दिन ग्रहण किया जाता है। इसका कारण यह है कि माता शीतला को बासी भोजन अर्पित करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह संकेत देता है कि देवी हमें संयम और सादगी का पाठ पढ़ाती हैं।
शीतला षष्ठी व्रत की पूजा विधि
पूजन सामग्री
- माता शीतला की मूर्ति/तस्वीर
- बासी भोजन (पूर्व दिन का बना हुआ)
- छाछ, दही और मिश्री
- हल्दी, कुमकुम, चावल
- फूल, धूप, दीप
- कलश (जल से भरा हुआ)
विस्तृत पूजन विधि
- प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
- माता शीतला के चित्र को स्थापित करें
- कलश स्थापना करके उस पर देवी का आवाहन करें
- बासी भोजन, दही और छाछ का भोग लगाएं
- निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें:
मंत्र:
“वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्।
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्॥”
शीतला षष्ठी व्रत कथा
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, एक गाँव में सात भाई रहते थे जिनकी एक बहन थी। षष्ठी के दिन बहन ने सभी भाइयों से व्रत का महत्व बताया, परंतु एक भाई ने उसकी बात नहीं मानी। कुछ दिनों बाद उस भाई के बच्चे चेचक से पीड़ित हो गए। जब उसने माता शीतला की पूजा की और व्रत किया, तो बच्चे स्वस्थ हो गए। तभी से यह व्रत संतान की रक्षा के लिए मनाया जाने लगा।
व्रत के नियम और सावधानियां
- व्रत के दिन नए भोजन का सेवन न करें
- पूजा के समय मन में शुद्ध भावना रखें
- गरीबों को भोजन या दान अवश्य दें
- इस दिन क्रोध या झूठ से बचें
शीतला माता के प्रसिद्ध मंदिर
भारत में माता शीतला के कई प्राचीन मंदिर हैं जहाँ षष्ठी के दिन विशेष पूजा होती है:
- शीतला माता मंदिर, गुड़गाँव (हरियाणा)
- चक्रेश्वर शीतला मंदिर (राजस्थान)
- शीतला माता मंदिर (जयपुर)
- शीतला देवी मंदिर (वृंदावन)
निष्कर्ष
शीतला षष्ठी व्रत हमें स्वास्थ्य और सफाई का महत्व सिखाता है। यह पर्व हमारी प्राचीन परंपराओं और आयुर्वेदिक ज्ञान का प्रतीक है। 2025 में 5 मार्च को इस व्रत को श्रद्धापूर्वक मनाकर हम माता शीतला का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें, सच्ची भक्ति और स्वच्छता ही इस व्रत का मूल संदेश है।
