MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: शिवरात्रि विशेष ऐसे हुआ था द्वादश ज्योतिर्लिंग प्रकट
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

शिवरात्रि विशेष ऐसे हुआ था द्वादश ज्योतिर्लिंग प्रकट

शिवरात्रि विशेष: जानें कैसे प्रकट हुए द्वादश ज्योतिर्लिंग और उनकी पौराणिक कथा। इस पवित्र अवसर पर ज्ञानवर्धक कहानी के साथ आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करें।

Published July 2, 2026
Share
4 Min Read

शिवरात्रि विशेष: ऐसे हुआ था द्वादश ज्योतिर्लिंग प्रकट

महादेव के भक्तों के लिए महाशिवरात्रि सबसे पावन पर्व है। इस दिन भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए लाखों भक्त व्रत, पूजा और जागरण करते हैं। शिव पुराण के अनुसार, इसी रात्रि में भोलेनाथ ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों के रूप में स्वयं प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए थे। आइए, जानते हैं कैसे हुआ था यह चमत्कारिक प्राकट्य और क्या है इन ज्योतिर्लिंगों की महिमा।

Contents
शिवरात्रि विशेष: ऐसे हुआ था द्वादश ज्योतिर्लिंग प्रकटज्योतिर्लिंग क्या है?कैसे हुआ था ज्योतिर्लिंगों का प्राकट्य?प्रमुख ज्योतिर्लिंगों की कथाएंज्योतिर्लिंग दर्शन का महत्वमहाशिवरात्रि और ज्योतिर्लिंगनिष्कर्ष

ज्योतिर्लिंग क्या है?

ज्योतिर्लिंग का अर्थ है ‘प्रकाश का स्तंभ‘। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद को समाप्त करने के लिए एक अंतहीन ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। यही ज्योति बाद में 12 पवित्र स्थानों पर प्रकट हुई, जिन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।

  • सोमनाथ (गुजरात)
  • मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश)
  • महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश)
  • ॐकारेश्वर (मध्य प्रदेश)
  • केदारनाथ (उत्तराखंड)
  • भीमाशंकर (महाराष्ट्र)
  • विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश)
  • त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र)
  • वैद्यनाथ (झारखंड)
  • नागेश्वर (गुजरात)
  • रामेश्वरम (तमिलनाडु)
  • घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)

कैसे हुआ था ज्योतिर्लिंगों का प्राकट्य?

शिव पुराण के कोटिरुद्र संहिता में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। तब शिव ने उनके अहंकार को चूर करने के लिए एक अनंत ज्योति स्तंभ के रूप में प्रकट होकर कहा, “जो इस ज्योति का अंत या आदि ढूंढ लेगा, वही श्रेष्ठ होगा।”

विष्णु नीचे की ओर और ब्रह्मा ऊपर की ओर गए, लेकिन दोनों असफल रहे। तब शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए और घोषणा की कि यह ज्योति 12 स्थानों पर स्थापित होगी। इन्हीं स्थानों पर आज द्वादश ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं।

प्रमुख ज्योतिर्लिंगों की कथाएं

1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

यह पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। कथा के अनुसार, चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने के लिए यहां तपस्या की थी। शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया और सोमनाथ के रूप में यहां स्थापित हुए।

2. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने भगवान शिव से मिलने की इच्छा की। शिव उनसे रूष्ट होकर केदारनाथ में बैल रूप में प्रकट हुए। भीम ने उनकी पूंछ पकड़ ली, तब शिव ने प्रकट होकर केदारनाथ के रूप में यहां वास करने का वरदान दिया।

3. विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

काशी में स्थित इस ज्योतिर्लिंग की महिमा अपरंपार है। मान्यता है कि यहां शिव ने स्वयं मोक्षदायिनी नगरी की रक्षा के लिए प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए।

ज्योतिर्लिंग दर्शन का महत्व

शास्त्रों में कहा गया है:

“द्वादश ज्योतिर्लिंगानि यः पश्यति समाहितः।
तस्य जन्मसहस्राणां पापं नश्यति तत्क्षणात्॥”

अर्थात: जो भक्त श्रद्धापूर्वक द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करता है, उसके हजार जन्मों के पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं।

  • सभी ज्योतिर्लिंगों में शिवलिंग स्वयंभू हैं
  • इन स्थानों पर शिव की आराधना विशेष फलदायी मानी गई है
  • महाशिवरात्रि पर इनके दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है

महाशिवरात्रि और ज्योतिर्लिंग

महाशिवरात्रि के दिन इन ज्योतिर्लिंगों पर विशेष पूजा-अर्चना होती है। मान्यता है कि इस रात्रि में शिव अपने सभी ज्योतिर्लिंग रूपों में विशेष रूप से विराजते हैं। भक्तगण इस दिन:

  • रुद्राभिषेक करते हैं
  • शिव मंत्रों का जाप करते हैं
  • जागरण करके शिव की कथाएं सुनते हैं
  • ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करते हैं

निष्कर्ष

द्वादश ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के साक्षात प्रकाश स्वरूप हैं। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इनकी कथा सुनने, स्मरण करने और दर्शन करने से भक्तों को शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए, हम सभी इस शिवरात्रि पर इन पवित्र ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करें और भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें।

हर हर महादेव!

You Might Also Like

हनुमानजी गुस्से में क्यों हैं तस्वीर बनाने वाला कौन

केदारनाथ दर्शन का फल इनके दर्शन से भी मिलता है

श्रावणी पर्व: धरती पर जीवन जागा

मौत की आहट सुन सकते हैं छह महीने पहले करें यह उपाय

Moon Black Spot: चंद्रमा को क्यों और किसने दिया श्राप दाग का रहस्य?

Share

Latest News

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
Religion Spirituality July 2, 2026
राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
Religion Spirituality July 2, 2026
Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
Religion Spirituality July 2, 2026
Durga Puja 2025 आज से शुरू जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Religion Spirituality July 2, 2026

You Might also Like

शिव और कृष्ण में छिड़ा संग्राम Shiv Krishna Yudh

July 2, 2026

गणेश पूजा और उत्सव की खास बातें जानिए

July 2, 2026

जनेऊ दाएं कान पर ही क्यों लपेटते हैं? Why is Janeu worn on the right ear?

July 2, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
  • राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
  • Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech HTML sitemap
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?