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पराई स्त्री और पराए पुरुष से संबंध की ऐसी सजा दहल जाएंगे
धर्म और नैतिकता के नियमों को तोड़ने वालों के लिए प्राचीन शास्त्रों में कठोर दंड का विधान है। पराई स्त्री या पराए पुरुष से अनुचित संबंध बनाना न केवल समाज के विरुद्ध अपराध है, बल्कि ईश्वरीय न्याय के घोर दंड को आमंत्रित करता है। इस लेख में हम शास्त्रों, पुराणों और जीवन के उदाहरणों के माध्यम से जानेंगे कि ऐसे कर्मों का फल कितना भयानक हो सकता है।
धर्मशास्त्रों में वर्जित संबंधों की चेतावनी
मनुस्मृति, गरुड़ पुराण और महाभारत जैसे ग्रंथों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि परस्त्रीगमन या परपुरुष संग महापाप की श्रेणी में आते हैं। ऐसे कर्म करने वालों को न केवल इस जन्म में, बल्कि अगले जन्मों तक कष्ट भोगने पड़ते हैं।
- मनुस्मृति (अध्याय 8, श्लोक 352): “परदारेषु रतो नरः नरकं प्रतिपद्यते” (पराई स्त्री के साथ संबंध बनाने वाला मनुष्य नरक को प्राप्त होता है)
- गरुड़ पुराण: ऐसे पापियों को यमलोक में क्रूर यातनाएं सहनी पड़ती हैं
- विष्णु पुराण: परस्त्रीगामी व्यक्ति की 7 पीढ़ियों तक उन्नति रुक जाती है
ऐसे संबंधों के भयंकर दुष्परिणाम
शास्त्रों के अनुसार, पर स्त्री/पुरुष से संबंध बनाने वालों को इन भयानक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है:
- कुल का नाश: ऐसे पाप से पूरे परिवार की प्रतिष्ठा धूमिल होती है
- आर्थिक पतन: धन-संपत्ति का अचानक नुकसान होने लगता है
- रोगों का प्रकोप: कुष्ठ रोग जैसी भयंकर बीमारियां घेर लेती हैं
- मानसिक अशांति: अपराधबोध और भय जीवनभर सताते हैं
- मृत्यु के बाद की यातनाएं: यमदूतों द्वारा कष्टदायक दंड मिलते हैं
ऐतिहासिक उदाहरणों से सीख
इतिहास में कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं जहां परस्त्रीगमन के कारण महान व्यक्तियों का पतन हुआ:
1. राजा दशरथ का श्राप
श्रवण कुमार की माता ने राजा दशरथ को “पुत्र वियोग” का श्राप दिया था, जिसका कारण उनका युवावस्था में परस्त्री के प्रति आसक्त होना था।
2. भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा
महाभारत में भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया क्योंकि वे जानते थे कि परस्त्री संग से ही युद्धों की नींव पड़ती है।
क्या है इस पाप से बचने का उपाय?
यदि कोई व्यक्ति इस पाप में फंस चुका है, तो शास्त्रों में कुछ प्रायश्चित्त बताए गए हैं:
- गायत्री मंत्र: नियमित 108 बार जप करें
- महामृत्युंजय मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…” का पाठ
- दान-पुण्य: गरीबों को अन्न, वस्त्र दान दें
- तीर्थ यात्रा: गंगा स्नान और प्रयाग तीर्थ का महत्व
संतों के उपदेश
संत तुलसीदासजी ने रामचरितमानस में लिखा है:
“परधन परनारी परनिंदा, इन तीनों तजिए सोई संत।
जो नहिं तजत मूढ़ मन मोही, ताको फल भोगै दुख सोई॥”
निष्कर्ष
पराई स्त्री या पराए पुरुष से संबंध रखना न केवल सामाजिक अपराध है, बल्कि ईश्वरीय व्यवस्था के विरुद्ध पाप भी है। ऐसे कर्मों का फल अत्यंत कष्टदायक होता है, जो इस जन्म और परलोक दोनों में भोगना पड़ता है। हमें संयमित जीवन जीकर, अपने मन को ईश्वर भक्ति में लगाकर ही सच्चे सुख की प्राप्ति करनी चाहिए।
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