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कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक पुष्कर स्नान का महत्व

इसलिए कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक पुष्कर में स्नान का विशेष महत्व है जो पापों को धोकर मोक्ष प्रदान करता है।

Published July 2, 2026
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3 Min Read

पुष्कर, राजस्थान का एकमात्र ब्रह्मा जी का मंदिर और पवित्र तीर्थस्थल, हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्तिक मास में यहाँ का स्नान विशेष फलदायी माना जाता है, खासकर कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक का समय। इस अवधि में लाखों श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में डुबकी लगाकर पापों से मुक्ति और मोक्ष की कामना करते हैं।

Contents
कार्तिक मास: धर्म और आस्था का महीनाकार्तिक मास का धार्मिक महत्वपुष्कर सरोवर: अमृत जैसा पवित्र जलकार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक स्नान का विशेष महत्वएकादशी का पुण्य प्रभावपूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्वपुष्कर स्नान की विधि एवं मंत्रस्नान की सही विधिपाठ करने योग्य मंत्रनिष्कर्ष: पुण्य का अवसर

कार्तिक मास: धर्म और आस्था का महीना

कार्तिक मास का धार्मिक महत्व

कार्तिक मास हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस माह में किए गए धार्मिक कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा: इस मास में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • पितृ तर्पण: कार्तिक स्नान से पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है।
  • तुलसी पूजन: इस माह तुलसी के पौधे की विशेष पूजा की जाती है।

पुष्कर सरोवर: अमृत जैसा पवित्र जल

पुष्कर सरोवर को “तीर्थराज” कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, ब्रह्मा जी के कमंडल से गिरे जल से इस सरोवर का निर्माण हुआ था।

“पुष्करं तीर्थराजं च सर्वपापहरं शुभम्।
ब्रह्मणा निर्मितं पूर्वं सर्वदेवनमस्कृतम्॥”

कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक स्नान का विशेष महत्व

एकादशी का पुण्य प्रभाव

कार्तिक एकादशी को “देवउठनी एकादशी” भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार मास की निद्रा के बाद जागते हैं।

  • पापों का नाश: इस दिन पुष्कर में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
  • मोक्ष की प्राप्ति: शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन स्नान करने वाला व्यक्ति अंततः मोक्ष को प्राप्त करता है।

पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

कार्तिक पूर्णिमा को “देव दीपावली” भी कहते हैं। इस दिन पुष्कर में स्नान करने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

  • चंद्र दर्शन का फल: इस दिन चंद्रमा के दर्शन मात्र से ही पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • दान-पुण्य का विशेष महत्व: इस दिन अन्न, वस्त्र और दीपदान करने से अक्षय पुण्य मिलता है।

पुष्कर स्नान की विधि एवं मंत्र

स्नान की सही विधि

  1. प्रातःकाल स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए।
  2. संकल्प लेना: “ॐ विष्णुं नमः” कहते हुए स्नान का संकल्प लें।
  3. तीर्थ जल अर्पण: सरोवर में डुबकी लगाकर तर्पण करें।

पाठ करने योग्य मंत्र

“गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिंधु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥”

निष्कर्ष: पुण्य का अवसर

कार्तिक मास में पुष्कर सरोवर में स्नान करना मात्र एक रीति नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम मार्ग है। यह समय अपने पापों को धोकर नए जीवन की शुरुआत करने का सुअवसर प्रदान करता है।

ध्यान रखें: इस पावन अवधि में सात्विक भोजन, दान-पुण्य और भक्ति भाव से ही पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।

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