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सूर्य देव की आरती रविवार को करें तेज और मान प्रतिष्ठा पाएं

रविवार को सूर्यदेव की आरती करने से पाएं तेज और मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि। जानें सूर्य देव की आरती का महत्व, विधि और लाभ। सफलता पाने का आसान उपाय।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

सूर्य देव की आरती: तेज, मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति का मार्ग

हिंदू धर्म में सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है और इस दिन उनकी आरती करने से व्यक्ति को सूर्य के समान तेजस्वी बनने का आशीर्वाद मिलता है। यह लेख आपको सूर्य देव की आरती के महत्व, विधि और लाभों से परिचित कराएगा।

Contents
सूर्य देव की आरती: तेज, मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति का मार्गसूर्य देव का हिंदू धर्म में महत्वसूर्य देव की आरती का महत्वसूर्य देव की आरती (संपूर्ण पाठ)सूर्य देव की आरती करने की विधिआवश्यक सामग्रीविधिसूर्य आरती के विशेष लाभशारीरिक लाभमानसिक लाभआध्यात्मिक लाभसूर्य आरती से जुड़ी महत्वपूर्ण बातेंसूर्य देव से जुड़े प्रमुख मंत्रनिष्कर्ष

सूर्य देव का हिंदू धर्म में महत्व

सूर्य देव को आदित्य, भास्कर और दिनकर जैसे नामों से भी जाना जाता है। वेदों में सूर्य को सृष्टि का आधार और समस्त प्राणियों का पालनहार कहा गया है।

  • सूर्य देव नवग्रहों में प्रमुख हैं और ज्योतिष में इन्हें आत्मा का कारक माना जाता है।
  • सूर्योपासना से व्यक्ति को स्वास्थ्य, सफलता और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
  • रविवार को सूर्य देव की विशेष पूजा करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

सूर्य देव की आरती का महत्व

सूर्य देव की आरती एक शक्तिशाली साधना है जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। इस आरती के नियमित पाठ से:

  • तेजस्विता बढ़ती है और व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है
  • कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है
  • स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं
  • मनोबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है

सूर्य देव की आरती (संपूर्ण पाठ)

नीचे दी गई आरती को रविवार के दिन सुबह सूर्योदय के समय करने से विशेष लाभ होता है:

जय जय जय सूर्य देव भगवान
जय जय जय सूर्य देव भगवान
आदित्य देव नमो नमः, सप्ताश्व रथ के राजन
आदित्य देव नमो नमः, सप्ताश्व रथ के राजन

अर्घ्य देकर हम ध्यावें, तुम्हें प्रभु सच्चिदानंद
तुम हो पालनकर्ता, तुम हो जग के स्वामी
तुम हो पालनकर्ता, तुम हो जग के स्वामी

देवताओं के देवा, तुम हो प्रकाश के दाता
दीन-दुखियों के नाथ, तुम हो भक्तों के त्राता
दीन-दुखियों के नाथ, तुम हो भक्तों के त्राता

जय जय जय सूर्य देव भगवान
जय जय जय सूर्य देव भगवान

सूर्य देव की आरती करने की विधि

आवश्यक सामग्री

  • लाल या पीला आसन
  • तांबे का लोटा (अर्घ्य पात्र)
  • लाल फूल, अक्षत (चावल)
  • रोली, चंदन
  • दीपक (घी का)

विधि

  1. सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
  2. साफ वस्त्र धारण कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
  3. तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें लाल फूल और अक्षत डालें
  4. सूर्य देव का ध्यान करते हुए अर्घ्य दें
  5. आरती करें और प्रार्थना करें
  6. अंत में सूर्य मंत्र “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का 108 बार जप करें

सूर्य आरती के विशेष लाभ

शारीरिक लाभ

  • आंखों की रोशनी बढ़ती है
  • हड्डियां मजबूत होती हैं
  • रक्त संचार सुधरता है
  • त्वचा संबंधी रोग दूर होते हैं

मानसिक लाभ

  • मन प्रसन्न रहता है
  • एकाग्रता बढ़ती है
  • नकारात्मक विचार दूर होते हैं
  • आत्मविश्वास में वृद्धि होती है

आध्यात्मिक लाभ

  • कुंडली के सूर्य दोष का शमन होता है
  • आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है

सूर्य आरती से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

सूर्य देव की आरती करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • आरती हमेशा रविवार को ही करें
  • सुबह सूर्योदय के समय आरती करना सर्वोत्तम है
  • आरती के समय लाल या पीले वस्त्र धारण करें
  • आरती के बाद प्रसाद के रूप में गुड़ या गेहूं का दान करें
  • नियमित रूप से आरती करने पर ही पूर्ण लाभ मिलता है

सूर्य देव से जुड़े प्रमुख मंत्र

सूर्य आरती के साथ इन मंत्रों का जप करने से विशेष लाभ होता है:

  • मूल मंत्र: ॐ घृणि सूर्याय नमः
  • गायत्री मंत्र: ॐ आदित्याय विद्महे मार्तण्डाय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्
  • सूर्य शांति मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

निष्कर्ष

सूर्य देव की आरती एक सरल परंतु अत्यंत प्रभावशाली साधना है जो व्यक्ति को सूर्य के समान तेजस्वी बनाती है। रविवार के दिन नियमित रूप से यह आरती करने से मनुष्य को जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। सूर्य देव की कृपा से न केवल मान-सम्मान बढ़ता है बल्कि आत्मबल और आत्मविश्वास भी प्रबल होता है। आइए, हम सभी सूर्य देव की इस दिव्य आरती को अपने दैनिक जीवन का अंग बनाकर उनके आशीर्वाद को प्राप्त करें।

ॐ सूर्याय नमः। ॐ आदित्याय नमः। ॐ भास्कराय नमः।

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