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आज है वह व्रत जिससे यमलोक नहीं जाना पड़ता है

आज के इस विशेष व्रत से बचें यमलोक की यात्रा! जानें इस व्रत का महत्व, पूजा विधि और कैसे पाएं मोक्ष। सीखें आसान तरीके से।

Published November 1, 2026
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4 Min Read
आज है वह व्रत जिससे यमलोक नहीं जाना पड़ता है

आज है वह व्रत जिससे यमलोक नहीं जाना पड़ता है

हिंदू धर्म में व्रत और उपवास का विशेष महत्व है। इनमें से कुछ व्रत ऐसे हैं जो मनुष्य को मृत्यु के बाद यमलोक के दर्शन से बचाते हैं। आज हम ऐसे ही एक पावन व्रत के बारे में जानेंगे जिसे करने से भक्तों को यमलोक नहीं जाना पड़ता। यह व्रत न केवल आत्मा की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी लाता है।

Contents
आज है वह व्रत जिससे यमलोक नहीं जाना पड़ता हैइस व्रत का नाम और महत्वव्रत की पौराणिक कथाव्रत विधि: Step-by-Step Guideविशेष मंत्र और प्रार्थनाव्रत के लाभआधुनिक संदर्भ में व्रत की प्रासंगिकतानिष्कर्ष

इस व्रत का नाम और महत्व

यह व्रत “यमद्वितीया” या “भाई दूज” के नाम से प्रसिद्ध है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन व्रत रखकर यमुना नदी में स्नान करने और यमराज की पूजा करने से मनुष्य को यमलोक के दुखों से मुक्ति मिलती है। इसका उल्लेख स्कन्द पुराण और नारद पुराण में भी मिलता है।

  • यह व्रत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।
  • इस दिन बहनें अपने भाइयों के लिए विशेष पूजा करती हैं।
  • यमराज और यमुना देवी की कथा सुनने का विधान है।

व्रत की पौराणिक कथा

पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, एक बार यमराज ने अपनी बहन यमुना से कहा कि जो कोई इस दिन तुम्हारे नाम का व्रत रखेगा और तुम्हारी पूजा करेगा, उसे मृत्यु के पश्चात यमलोक के कष्ट नहीं भोगने पड़ेंगे। तभी से यह व्रत मनुष्यों के लिए मोक्ष का द्वार बन गया।

व्रत विधि: Step-by-Step Guide

सुबह की तैयारी

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • साफ वस्त्र धारण कर यमुना नदी या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करें।
  • सूर्यदेव को अर्घ्य दें।

पूजा विधान

  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • यमराज और यमुना देवी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • निम्न मंत्र से आवाहन करें: “ॐ यमाय नमः, यमुनायै नमः”
  • धूप, दीप, फल, फूल और मिष्ठान्न से पूजा करें।

विशेष मंत्र और प्रार्थना

इस व्रत में निम्न मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना गया है:

  • यमुना स्तोत्र: “यमुने त्वमसि साक्षात् विष्णुपादोद्भवा शुभे…”
  • यमराज मंत्र: “ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नो यम: प्रचोदयात्”

व्रत के लाभ

इस व्रत को करने से अनेकों लाभ प्राप्त होते हैं:

  • मोक्ष की प्राप्ति: मृत्यु के पश्चात यमलोक के दुखों से मुक्ति
  • आयु में वृद्धि: भाइयों की दीर्घायु के लिए विशेष फलदायी
  • पारिवारिक सुख: कलह और विवादों का अंत
  • कर्मों का शुद्धिकरण: पाप कर्मों से मुक्ति

आधुनिक संदर्भ में व्रत की प्रासंगिकता

आज के भागदौड़ भरे जीवन में यह व्रत भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। यह न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि पारिवारिक एकता को भी बढ़ावा देता है।

निष्कर्ष

यमद्वितीया का यह पावन व्रत हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और सही विधि से किया गया व्रत मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिला सकता है। आइए, हम सभी इस व्रत का पालन करके न केवल अपने भाइयों की दीर्घायु की कामना करें बल्कि अपने आध्यात्मिक विकास का मार्ग भी प्रशस्त करें।

जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है: “यमद्वितीयाव्रतं पुण्यं सर्वपापप्रणाशनम्, ददाति मोक्षं भक्तानां यमलोकभयापहम्” (यमद्वितीया का पुण्य व्रत सभी पापों को नष्ट करता है और भक्तों को यमलोक के भय से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करता है।)

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