भोलेनाथ की पूजा में सावधानी जरूरी
भगवान शिव को ‘भोले भंडारी’ कहा जाता है क्योंकि वे सरल स्वभाव के हैं और भक्तों की छोटी-सी भक्ति से भी प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसी वस्तुओं का उल्लेख मिलता है जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए। अनजाने में की गई ये गलतियाँ भोलेनाथ को नाराज़ कर सकती हैं। आइए, जानते हैं कि शिव पूजा में किन चीजों का प्रयोग वर्जित माना गया है।
1. केतकी के फूल (केवड़ा): शिवजी को कभी न चढ़ाएं
क्या कहती है पौराणिक कथा?
शिव पुराण के अनुसार, केतकी के फूल ने भगवान शिव और भगवान विष्णु के बीच हुए एक विवाद में झूठ बोला था। इस कारण शिवजी ने इसे अपनी पूजा में वर्जित कर दिया।
ध्यान रखें:
- केतकी के फूलों की खुशबू तेज होती है, लेकिन इन्हें शिवलिंग पर न चढ़ाएं।
- इसकी जगह धतूरा, बेलपत्र, आक के फूल या नागकेसर अर्पित करें।
2. तुलसी दल: शिव पूजा में क्यों नहीं चढ़ाते?
तुलसी और शिवजी का संबंध
तुलसी को विष्णु प्रिया माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी (वृंदा) के श्राप के कारण शिवजी ने इसे अपनी पूजा में निषिद्ध बताया।
क्या करें?
- शिवलिंग पर तुलसी दल न चढ़ाएं।
- इसकी जगह बिल्व पत्र (बेलपत्र) अर्पित करें, जो शिवजी को अत्यंत प्रिय हैं।
3. हल्दी और कुमकुम: शिवलिंग पर वर्जित
हल्दी का संबंध स्त्री ऊर्जा से
हल्दी और कुमकुम का प्रयोग मां लक्ष्मी और देवी पूजन में किया जाता है। शिवजी निराकार और निर्गुण हैं, इसलिए उनकी पूजा में इनका प्रयोग नहीं किया जाता।
सही विधि:
- शिवलिंग पर चंदन, भस्म या दूध ही चढ़ाएं।
- हल्दी-कुमकुम का तिलक शिवजी के मस्तक पर भी न लगाएं।
4. शंख से जल अर्पण न करें
शंख है विष्णु प्रतीक
शंख भगवान विष्णु का प्रिय है और इसका संबंध समुद्र मंथन की कथा से है। शिवजी को शंख से जल चढ़ाने से उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।
उचित विकल्प:
- शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे या कलश का प्रयोग करें।
- शंखध्वनि भी शिव मंदिर में नहीं की जाती।
5. नारियल का जल: शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाते?
नारियल का संबंध गणेशजी से
नारियल को शुभ माना जाता है, लेकिन इसे शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता। क्योंकि नारियल को गणेशजी का प्रतीक माना जाता है और शिव पूजा में इसका प्रयोग वर्जित है।
सही तरीका:
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध या शहद ही अर्पित करें।
- नारियल का प्रयोग अन्य देवताओं की पूजा में करें।
6. लाल रंग के फूल: शिवजी को न चढ़ाएं
लाल रंग का संबंध मां लक्ष्मी से
लाल रंग के फूल (जैसे गुलाब, अनार के फूल) मां लक्ष्मी को प्रिय हैं। शिवजी को सफेद या नीले रंग के फूल ही चढ़ाने चाहिए।
क्या चढ़ाएं?
- धतूरा, अकुआ, नीलकमल, सफेद आक के फूल।
- लाल फूलों का प्रयोग शिवजी की पूजा में न करें।
7. सिंदूर: शिवलिंग पर न लगाएं
सिंदूर है पार्वती का प्रतीक
सिंदूर का संबंध विवाहित स्त्रियों और मां पार्वती से है। शिवजी योगी और संन्यासी हैं, इसलिए उनकी पूजा में सिंदूर वर्जित है।
पूजा विधि:
- शिवलिंग पर भस्म या चंदन लगाएं।
- सिंदूर का प्रयोग केवल माता पार्वती की पूजा में करें।
8. तुलसी माला: शिवजी को न चढ़ाएं
तुलसी की माला विष्णु भक्ति में
तुलसी की माला से शिवजी का जप नहीं किया जाता। शिवभक्तों को रुद्राक्ष की माला धारण करनी चाहिए।
सही उपाय:
- शिवजी की आराधना के लिए रुद्राक्ष या कमलगट्टे की माला प्रयोग करें।
- तुलसी माला का प्रयोग विष्णु सहस्रनाम या हरिनाम जप में करें।
शिव पूजा में शुद्धता का ध्यान रखें
भगवान शिव सहज भाव से प्रसन्न होने वाले देव हैं, लेकिन पूजा की शुद्धता का विशेष महत्व है। शिवलिंग पर गलत वस्तुएं चढ़ाने से पूजा का फल नहीं मिलता। इसलिए, इन नियमों का पालन करें और बेलपत्र, धतूरा, चंदन, भस्म जैसी पवित्र वस्तुओं से ही भोलेनाथ की आराधना करें।
शिवमंत्र:
ॐ नमः शिवाय।
(इस मंत्र का जप करते हुए शिवजी की पूजा करें)

