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Til Dwadashi 2025 तिल द्वादशी व्रत पूजा विधि स्वर्ग प्राप्ति

तिल द्वादशी व्रत 2025 में स्वर्ग प्राप्ति और कष्ट मुक्ति के लिए पूजा विधि जानें आज ही इस पावन अवसर पर

Published July 2, 2026
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3 Min Read

हिंदू धर्म में तिल द्वादशी का विशेष महत्व है। यह व्रत मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से मनुष्य को पापों से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

Contents
पौराणिक कथातिल द्वादशी व्रत की विधितिल द्वादशी व्रत के लाभतिल द्वादशी पर विशेष सावधानियांनिष्कर्ष

पौराणिक कथा

एक बार एक ब्राह्मणी ने तिल द्वादशी का व्रत रखा, लेकिन उसने अनजाने में बिना स्नान किए ही पूजा कर ली। इससे नाराज होकर देवी लक्ष्मी ने उसे विधवा होने का श्राप दे दिया। बाद में, जब उसे अपनी गलती का पता चला, तो उसने पुनः श्रद्धा से व्रत किया। इससे प्रसन्न होकर देवी लक्ष्मी ने उसे पति का सुख वापस दिलाया। तभी से यह व्रत कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।

तिल द्वादशी व्रत की विधि

इस व्रत को करने के लिए निम्न विधि अपनाएं:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और तिल से भगवान विष्णु का चित्र बनाएं।
  • तिल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • निम्न मंत्र का जाप करें:

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥”

  • दिन भर उपवास रखें और सायंकाल में तिल से बने भोजन का दान करें।

तिल द्वादशी व्रत के लाभ

इस व्रत को करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे:

  • पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
  • आर्थिक संकट दूर होते हैं।
  • स्वास्थ्य लाभ होता है और दीर्घायु प्राप्त होती है।
  • विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।

तिल द्वादशी पर विशेष सावधानियां

इस व्रत में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • क्रोध और झूठ से बचें।
  • तिल का दान अवश्य करें।
  • ब्राह्मण को भोजन कराएं या दक्षिणा दें।

निष्कर्ष

तिल द्वादशी का व्रत भक्ति और विश्वास के साथ करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। यह व्रत न केवल मोक्ष प्रदान करता है, बल्कि सुख-समृद्धि का मार्ग भी खोलता है। इसलिए, इस पावन अवसर पर पूर्ण श्रद्धा से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करें।

“यस्तु द्वादश्यां तिलैर्हरिं पूजयेद्भक्तिभावतः।
स याति विष्णुलोकं हि नात्र कार्या विचारणा॥”

अर्थात, जो व्यक्ति तिल द्वादशी पर भक्ति भाव से भगवान विष्णु की पूजा करता है, वह निश्चित रूप से विष्णु लोक को प्राप्त करता है।

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