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परिक्रमा के प्रकार और महत्व – जानिए हिंदी में

Published June 26, 2026
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Contents
जानिए कितने प्रकार की होती हैं परिक्रमाएं और क्या होता है इसका महत्वपरिक्रमा क्या है?परिक्रमा के प्रमुख प्रकार1. देवी-देवताओं की परिक्रमा2. पवित्र वृक्षों की परिक्रमा3. तीर्थ स्थलों की परिक्रमा4. अग्नि परिक्रमापरिक्रमा का आध्यात्मिक महत्व1. ऊर्जा चक्रों का संतुलन2. कर्मों का शुद्धिकरण3. मनोकामना पूर्तिपरिक्रमा के वैज्ञानिक लाभ1. शारीरिक स्वास्थ्य2. मानसिक शांतिपरिक्रमा करते समय ध्यान रखने योग्य बातेंनिष्कर्ष

जानिए कितने प्रकार की होती हैं परिक्रमाएं और क्या होता है इसका महत्व

हिंदू धर्म में परिक्रमा का विशेष महत्व है। यह एक पवित्र क्रिया है जिसमें भक्त किसी देवी-देवता, पवित्र वृक्ष या तीर्थस्थल के चारों ओर घूमकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। परिक्रमा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का सशक्त माध्यम है। आइए जानते हैं परिक्रमा के प्रकार और इसके गहन आध्यात्मिक रहस्यों के बारे में…

परिक्रमा क्या है?

परिक्रमा संस्कृत के शब्द “परि” (चारों ओर) और “क्रम” (चलना) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है “चारों ओर घूमना”। यह एक ऐसी साधना है जिसमें व्यक्ति दैवीय शक्ति के प्रतीक के चारों ओर घूमकर अपनी भक्ति प्रकट करता है।

  • प्राचीन ग्रंथों में परिक्रमा को प्रदक्षिणा भी कहा गया है
  • यह सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का सरल उपाय है
  • परिक्रमा से मन को शांति और एकाग्रता मिलती है

परिक्रमा के प्रमुख प्रकार

1. देवी-देवताओं की परिक्रमा

मंदिरों में देव प्रतिमाओं की परिक्रमा सबसे आम है। इसमें विशेष नियमों का पालन किया जाता है:

  • घड़ी की दिशा में (दक्षिणावर्त) परिक्रमा करनी चाहिए
  • परिक्रमा की संख्या विषम (1,3,5,7…) हो तो अधिक शुभ मानी जाती है
  • परिक्रमा के समय मन में देवता का ध्यान करना चाहिए

2. पवित्र वृक्षों की परिक्रमा

कुछ वृक्षों को दैवीय माना जाता है और इनकी परिक्रमा का विशेष महत्व है:

  • पीपल: मोक्ष प्रदान करने वाला वृक्ष, इसकी 7 परिक्रमा शुभ
  • तुलसी: प्रतिदिन 3 या 11 परिक्रमा करने से सुख-समृद्धि मिलती है
  • बरगद: इसकी परिक्रमा से लंबी आयु प्राप्त होती है

3. तीर्थ स्थलों की परिक्रमा

कई पवित्र तीर्थ स्थलों की परिक्रमा का विशेष महत्व है:

  • गोवर्धन परिक्रमा: 21 किमी की यह परिक्रमा भगवान कृष्ण से जुड़ी है
  • पंचकोसी परिक्रमा: वाराणसी में 5 कोस (लगभग 15 किमी) की यात्रा
  • नर्मदा परिक्रमा: पूरी नदी के किनारे 3,300 किमी की पदयात्रा

4. अग्नि परिक्रमा

वैदिक काल से चली आ रही यह परंपरा विवाह और यज्ञ में की जाती है:

  • विवाह में सप्तपदी के समय अग्नि की 7 परिक्रमा
  • यज्ञ की अग्नि की 3 परिक्रमा करने का विधान
  • अग्नि देवता को साक्षी मानकर की जाने वाली परिक्रमा

परिक्रमा का आध्यात्मिक महत्व

1. ऊर्जा चक्रों का संतुलन

परिक्रमा करने से शरीर के सात चक्र सक्रिय होते हैं और ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है।

2. कर्मों का शुद्धिकरण

शास्त्रों में कहा गया है:

“प्रदक्षिणा शतं कृत्वा सर्वपापै: प्रमुच्यते”
(सौ परिक्रमा करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है)

3. मनोकामना पूर्ति

विशेष संख्या में की गई परिक्रमा से इच्छाएं पूर्ण होती हैं:

  • 11 परिक्रमा: संतान प्राप्ति
  • 21 परिक्रमा: धन लाभ
  • 108 परिक्रमा: मोक्ष की प्राप्ति

परिक्रमा के वैज्ञानिक लाभ

1. शारीरिक स्वास्थ्य

परिक्रमा एक प्रकार की प्राकृतिक व्यायाम है जो:

  • रक्त संचार बढ़ाती है
  • हृदय को स्वस्थ रखती है
  • जोड़ों के दर्द में लाभकारी

2. मानसिक शांति

परिक्रमा करते समय मन शांत होता है और:

  • तनाव कम होता है
  • एकाग्रता बढ़ती है
  • नकारात्मक विचार दूर होते हैं

परिक्रमा करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • परिक्रमा हमेशा दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) करें
  • मन में पवित्र भावना रखें और मंत्र जपें
  • जूते-चप्पल उतारकर ही परिक्रमा करें
  • गर्भवती महिलाएं और रजस्वला स्त्रियां परिक्रमा न करें

निष्कर्ष

परिक्रमा हिंदू धर्म की एक पवित्र परंपरा है जो आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से लाभकारी है। यह न केवल हमें दैवीय कृपा प्रदान करती है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उत्तम साधन है। परिक्रमा का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए। आइए, हम भी इस पावन परंपरा को अपनाकर जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करें।

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