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Utpanna Ekadashi 2025 उत्पन्ना एकादशी व्रत नियम पूजा मुहूर्त विधि

उत्पन्ना एकादशी 2025 के व्रत-नियम, पूजा मुहूर्त और विधि जानें। इस पावन दिन व्रत रखने के लिए सही तरीका और महत्व समझें, मोक्ष प्राप्ति का अद्भुत अवसर पाएं।

Published July 2, 2026
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4 Min Read

उत्पन्ना एकादशी 2025: महत्व और परिचय

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और उत्पन्ना एकादशी इनमें से एक प्रमुख व्रत माना जाता है। यह व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। 2025 में, उत्पन्ना एकादशी 15 नवंबर, शनिवार को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस लेख में हम आपको उत्पन्ना एकादशी व्रत के नियम, पूजा विधि, मुहूर्त और इसकी कथा के बारे में विस्तार से बताएंगे।

Contents
उत्पन्ना एकादशी 2025: महत्व और परिचयउत्पन्ना एकादशी का महत्वपौराणिक कथाउत्पन्ना एकादशी 2025 का पूजा मुहूर्तउत्पन्ना एकादशी व्रत विधिव्रत के नियमपूजा विधिउत्पन्ना एकादशी व्रत के लाभविशेष सावधानियांनिष्कर्ष

उत्पन्ना एकादशी का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को मृत्यु के बाद वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा

पद्म पुराण में उल्लेख है कि एक बार मुर नामक राक्षस ने देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया। उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर देवता भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने मुर से युद्ध किया, लेकिन वह थककर बदरिकाश्रम के एक गुफा में विश्राम करने लगे। मुर ने उसी समय उन पर आक्रमण कर दिया। तभी भगवान के शरीर से एक कन्या प्रकट हुई, जिसने मुर का वध कर दिया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उस कन्या को वरदान दिया कि तुम्हारी पूजा एकादशी के दिन की जाएगी और तुम्हारा नाम उत्पन्ना एकादशी होगा।

उत्पन्ना एकादशी 2025 का पूजा मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 14 नवंबर 2025, शाम 06:42 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 15 नवंबर 2025, शाम 05:06 बजे
  • पारण का समय (व्रत तोड़ने का समय): 16 नवंबर, सुबह 06:45 से 08:55 बजे तक
  • व्रत रखने का दिन: 15 नवंबर, शनिवार

उत्पन्ना एकादशी व्रत विधि

व्रत के नियम

  • एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  • पूरे दिन व्रत रखें और अन्न ग्रहण न करें। फलाहार या दूध-फल से ही संतोष करें।
  • झूठ बोलने, क्रोध करने और बुरे विचारों से बचें।
  • रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।

पूजा विधि

  • सुबह पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • तुलसी दल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • इस मंत्र का जाप करें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • शाम को आरती करें और भगवान विष्णु की कथा सुनें या पढ़ें।

उत्पन्ना एकादशी व्रत के लाभ

  • इस व्रत को करने से पापों से मुक्ति मिलती है।
  • जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
  • मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • पारिवारिक कलह दूर होती है।

विशेष सावधानियां

  • व्रत के दिन चावल का सेवन न करें।
  • दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • किसी भी प्रकार का नशा न करें।
  • अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद ही व्रत तोड़ें।
  • व्रत तोड़ने से पहले ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान दें।

निष्कर्ष

उत्पन्ना एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि मनुष्य को सांसारिक सुखों की प्राप्ति में भी सहायक होता है। 2025 में 15 नवंबर को उत्पन्ना एकादशी का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और भक्त को भगवान की असीम कृपा प्राप्त होती है।

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