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Vaishakh Month 2025: वैशाख मास महत्व व्रत त्योहार

वैशाख मास 2025 में 7 अप्रैल से शुरू हो रहा है। जानिए इस पवित्र महीने का धार्मिक महत्व, व्रत-त्योहार और आध्यात्मिक लाभ। पूरी जानकारी हिंदी में पढ़ें।

Published July 2, 2026
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3 Min Read

वैशाख मास 2025: 7 अप्रैल से आरंभ, महत्व और व्रत-त्योहार

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह माह 7 अप्रैल 2025 से प्रारंभ होकर 6 मई 2025 तक रहेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत, त्योहार और पुण्यकाल आते हैं, जो भक्तों के लिए मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आइए जानें वैशाख मास का महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़े पर्वों के बारे में विस्तार से।

Contents
वैशाख मास 2025: 7 अप्रैल से आरंभ, महत्व और व्रत-त्योहारवैशाख मास का धार्मिक महत्ववैशाख मास 2025 के प्रमुख व्रत और त्योहारवैशाख मास की विशेष पूजा विधिवैशाख मास में क्या न करें?निष्कर्ष

वैशाख मास का धार्मिक महत्व

वैशाख मास को “माधव मास” भी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु के एक नाम माधव से संबंधित है। इस माह में किया गया दान, जप और स्नान विशेष फलदायी माना जाता है।

  • पुराणों के अनुसार: स्कन्द पुराण में वैशाख स्नान को मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है।
  • वृक्षारोपण: इस माह में पीपल, बरगद या तुलसी का पौधा लगाने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • दान का महत्व: जल, छत्र, फल या वस्त्र दान करने से अनंत पुण्य मिलता है।

वैशाख मास 2025 के प्रमुख व्रत और त्योहार

1. अक्षय तृतीया (30 अप्रैल 2025)

यह वैशाख मास का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन:

  • भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था।
  • महाभारत के रचयिता वेदव्यास ने इसी दिन ग्रंथ लेखन प्रारंभ किया था।
  • सोना खरीदना और नया व्यवसाय शुरू करना शुभ माना जाता है।

2. परशुराम जयंती (30 अप्रैल 2025)

इस दिन भगवान विष्णु के अवतार परशुराम की पूजा-अर्चना की जाती है। मंत्र:

“ॐ परशुरामाय नमः”

3. वैशाख पूर्णिमा (5 मई 2025)

इस दिन गंगा स्नान और सत्यनारायण व्रत का विशेष महत्व है। बुद्ध पूर्णिमा भी इसी दिन मनाई जाती है।

वैशाख मास की विशेष पूजा विधि

इस माह में निम्नलिखित उपाय करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है:

  • प्रातः स्नान: सूर्योदय से पहले नदी या घर पर ही जल में तिल मिलाकर स्नान करें।
  • तुलसी पूजन: प्रतिदिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं।
  • गायत्री मंत्र: “ॐ भूर्भुवः स्वः…” का 108 बार जप करें।

वैशाख मास में क्या न करें?

  • किसी भी प्राणी को कष्ट न दें।
  • तामसिक भोजन (मांस, मदिरा आदि) का सेवन न करें।
  • वृक्षों की अनावश्यक कटाई से बचें।

निष्कर्ष

वैशाख मास हिंदू धर्म में पवित्रता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। इस माह में किए गए छोटे-छोटे पुण्य कर्म भी बड़े फल देते हैं। 7 अप्रैल 2025 से प्रारंभ हो रहे इस पावन माह में व्रत-उपवास, दान और भक्ति के माध्यम से ईश्वर की कृपा प्राप्त करें।

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