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Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री व्रत में बरगद पूजा का महत्व

वट सावित्री व्रत 2025 में बरगद की पूजा का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व जानें इस पवित्र दिन की विशेषता और महत्व को समझें

Published July 2, 2026
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4 Min Read

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन बरगद (वट वृक्ष) की पूजा की जाती है, जिसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आइए, जानते हैं कि वट सावित्री व्रत के दिन बरगद की पूजा क्यों की जाती है और इसका क्या महत्व है।

Contents
वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्वसावित्री-सत्यवान की कथावट वृक्ष का पौराणिक महत्ववट सावित्री व्रत में बरगद की पूजा का वैज्ञानिक महत्वपर्यावरण संरक्षण की दृष्टिआयुर्वेदिक गुणवट सावित्री व्रत 2025 की तिथि और मुहूर्तवट सावित्री व्रत की विधिपूजा सामग्रीमंत्रनिष्कर्ष

वट सावित्री व्रत का धार्मिक महत्व

सावित्री-सत्यवान की कथा

वट सावित्री व्रत की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। इसकी कथा सावित्री और सत्यवान के अमर प्रेम से जुड़ी है। कहानी के अनुसार:

  • सावित्री एक राजकुमारी थीं, जिन्होंने सत्यवान से विवाह किया था।
  • ऋषि नारद ने भविष्यवाणी की थी कि सत्यवान की मृत्यु विवाह के एक वर्ष बाद हो जाएगी।
  • जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए, तो सावित्री ने अपनी बुद्धिमत्ता और भक्ति से उन्हें प्रसन्न कर लिया।
  • यमराज ने प्रसन्न होकर सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए और सावित्री को आशीर्वाद दिया।

इसी घटना की याद में सुहागिन स्त्रियां वट वृक्ष के नीचे बैठकर व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

वट वृक्ष का पौराणिक महत्व

हिंदू शास्त्रों में बरगद के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। इसके बारे में कुछ मान्यताएं हैं:

  • त्रिमूर्ति का प्रतीक: बरगद के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है।
  • अक्षय वट: प्रयाग में स्थित अक्षय वट को अमर वृक्ष माना जाता है। मान्यता है कि इसकी जड़ों में सभी देवताओं का निवास है।
  • भगवान कृष्ण से संबंध: श्रीमद्भागवत गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है, “वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) और वट हूं।”

वट सावित्री व्रत में बरगद की पूजा का वैज्ञानिक महत्व

पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि

बरगद का वृक्ष न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • ऑक्सीजन का भंडार: बरगद का पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है, जबकि अन्य पेड़ रात में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।
  • वायु शुद्धिकरण: यह वृक्ष हानिकारक गैसों को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध करता है।
  • जल संरक्षण: इसकी जड़ें भूमिगत जल स्तर को बनाए रखने में मदद करती हैं।

आयुर्वेदिक गुण

बरगद के पेड़ के विभिन्न भागों का उपयोग आयुर्वेद में औषधि के रूप में किया जाता है:

  • पत्ते: डायबिटीज नियंत्रण में सहायक।
  • छाल: त्वचा रोगों के इलाज में उपयोगी।
  • दूध (लैटेक्स): दांतों और मसूड़ों के लिए लाभदायक।

वट सावित्री व्रत 2025 की तिथि और मुहूर्त

वर्ष 2025 में वट सावित्री व्रत 10 जून, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05:30 बजे से 10:15 बजे तक रहेगा।

वट सावित्री व्रत की विधि

पूजा सामग्री

  • वट वृक्ष की जड़ में जल, दूध, फूल, अक्षत, मौली चढ़ाएं।
  • सूत से वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए धागा लपेटें।
  • सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें।

मंत्र

वट वृक्ष की पूजा करते समय यह मंत्र बोलें:

“वटवृक्षाय नमस्तुभ्यं, सर्वकामप्रदायक।
सावित्रीप्रियं देवं, पतिमे देहि शाश्वतम्॥”

निष्कर्ष

वट सावित्री व्रत न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। बरगद के वृक्ष की पूजा करके हम पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देते हैं। आइए, इस व्रत के पावन अवसर पर प्रकृति और धर्म के बीच के इस अद्भुत संबंध को समझें और अपने जीवन में उतारें।

सावित्री माता की कृपा से आपके पति दीर्घायु हों और आपका सुहाग अखंड रहे।

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