“`html
वृषभ संक्रांति 2025: 14 मई को है शुभ मुहूर्त, जानें महत्व और पूजा विधि
हिंदू पंचांग के अनुसार, वृषभ संक्रांति एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है जब सूर्यदेव मेष राशि से वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं। वर्ष 2025 में यह पर्व 14 मई को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जप, तप, दान और पूजन करने से अक्षय पुण्यफल की प्राप्ति होती है। आइए जानें इस पर्व की पौराणिक मान्यताएँ, शुभ मुहूर्त और आध्यात्मिक लाभ।
वृषभ संक्रांति का पौराणिक महत्व
स्कंद पुराण के अनुसार, संक्रांति के दिन सूर्य की गति परिवर्तन से उत्पन्न ऊर्जा मनुष्य के लिए कल्याणकारी होती है। वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है जो सुख, समृद्धि और कामना पूर्ति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से:
- भगवान विष्णु की आराधना का विधान है
- गंगा स्नान और दान से पापों का नाश होता है
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप शुभफलदायी माना गया है
वृषभ संक्रांति 2025 का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, वर्ष 2025 में सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश समय निम्नलिखित है:
- संक्रांति तिथि: 14 मई 2025, बुधवार
- सूर्योदय: सुबह 05:43 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:57 बजे
- पुण्य काल: प्रातः 05:43 से 12:21 तक (6 घंटे 38 मिनट)
पूजा विधि एवं आवश्यक सामग्री
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर निम्नलिखित विधि से पूजन करें:
स्टेप 1: स्नान एवं आचमन
- गंगाजल मिले जल से स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण कर तिलक लगाएं
- आचमन करके संकल्प लें
स्टेप 2: पूजा सामग्री
- लाल फूल, अक्षत, चंदन
- दीपक, धूप, नैवेद्य (फल/मिठाई)
- जल से भरा कलश, तांबे का सिक्का
स्टेप 3: मंत्र जाप
इस मंत्र का 108 बार जाप करें:
“ॐ घृणि सूर्याय नमः”
या
“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”
विशेष दान एवं परंपराएँ
वृषभ संक्रांति पर तिल, गुड़, वस्त्र, फल आदि का दान विशेष फलदायी माना गया है:
- जल दान: मिट्टी के घड़े में शीतल जल भरकर दान करें
- वस्त्र दान: गरीबों को नए वस्त्र बाँटें
- अन्न दान: गेहूं, चावल या दालों का दान करें
- छाया दान: प्याऊ लगवाकर प्यासों को जल पिलाएं
ज्योतिषीय प्रभाव एवं उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वृषभ संक्रांति पर सूर्य की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती है:
- मेष राशि वालों के लिए शुभ फलदायी
- वृषभ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए
- उपाय: लाल वस्त्र धारण करें, सूर्य को अर्घ्य दें
प्रचलित कथाएँ एवं लोक मान्यताएँ
उड़ीसा और दक्षिण भारत में इस दिन को महा विषुव संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। एक लोककथा के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव अवतार लेकर वेदों की रक्षा की थी।
निष्कर्ष
वृषभ संक्रांति का पर्व हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है। 14 मई 2025 को इस शुभ अवसर पर सूर्योपासना, दान-पुण्य और मंत्र जाप द्वारा आत्मिक शुद्धि प्राप्त करें। यह दिन नए संकल्प लेने और पुराने कष्टों को दूर करने का सर्वोत्तम समय है।
सूर्यदेव की कृपा से सभी भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्य की वृष्टि हो, यही हमारी शुभकामना है।
“`
