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खरमास क्या है और शुभ कार्य क्यों नहीं करते?

खरमास क्या है और इस दौरान शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते? जानिए खरमास की महत्वपूर्ण जानकारी, इसकी मान्यताएं और वैज्ञानिक कारण। समझें क्यों इस अवधि को अशुभ माना जाता है।

Published July 2, 2026
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5 Min Read

क्या होता है खरमास, इस दौरान क्यों नहीं किए जाते कोई भी शुभ कार्य?

हिंदू धर्म में माह, तिथि और नक्षत्रों का विशेष महत्व होता है। इन्हीं में से एक है खरमास, जिसे अशुभ मानकर कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खरमास क्या होता है और इस दौरान शुभ कार्यों पर प्रतिबंध क्यों लगाया जाता है? आइए, इस लेख में विस्तार से समझते हैं।

Contents
क्या होता है खरमास, इस दौरान क्यों नहीं किए जाते कोई भी शुभ कार्य?खरमास क्या है?खरमास का पौराणिक महत्वखरमास में क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य?खरमास में क्या नहीं करना चाहिए?खरमास में क्या कर सकते हैं?खरमास की समाप्ति और विशेष महत्वनिष्कर्ष

खरमास क्या है?

खरमास सूर्य देवता के एक विशेष संक्रमण काल को कहते हैं। जब सूर्य धनु (धनुराशि) और मकर (मकर राशि) राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस अवधि को खरमास कहा जाता है। यह समय लगभग 14 दिनों का होता है और इसे अशुभ माना जाता है।

  • खरमास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – “खर” (गधा) और “मास” (महीना)।
  • इस दौरान सूर्य की किरणों को कमजोर माना जाता है, जिससे शुभ कार्यों में बाधा आती है।
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय देवता निद्रा में होते हैं, इसलिए कोई मांगलिक कार्य नहीं किया जाता।

खरमास का पौराणिक महत्व

शास्त्रों में खरमास के संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब भगवान सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तो उनका तेज कम हो जाता है। इस दौरान उन्हें गधे की सवारी करनी पड़ती है, जिसके कारण इस समय को अशुभ माना जाता है।

एक अन्य मान्यता यह है कि खरमास के दौरान देवी-देवता विश्राम करते हैं, इसलिए कोई भी नया शुभ कार्य शुरू नहीं किया जाता। इस अवधि में केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान ही किए जाते हैं।

खरमास में क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य?

खरमास को अशुभ मानने के पीछे कई धार्मिक और ज्योतिषीय कारण हैं:

  • सूर्य का तेज कम होना: इस समय सूर्य की किरणें कमजोर होती हैं, जिससे शुभ फल प्राप्त नहीं होते।
  • देवताओं का विश्राम: माना जाता है कि इस अवधि में देवता सोए रहते हैं, इसलिए उनकी कृपा प्राप्त नहीं होती।
  • ज्योतिषीय दोष: धनु और मकर राशि में सूर्य के प्रवेश से कुछ ग्रह दोष उत्पन्न होते हैं, जो शुभ कार्यों में बाधक होते हैं।
  • पितृ दोष: कुछ मान्यताओं के अनुसार, इस समय पितृ दोष बढ़ जाता है, जिससे किसी भी नए कार्य की शुरुआत अशुभ हो सकती है।

खरमास में क्या नहीं करना चाहिए?

इस अवधि में निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:

  • विवाह, मुंडन, नामकरण: कोई भी संस्कार या मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।
  • गृह प्रवेश या नए घर की खरीद: इस समय नया घर लेना या प्रवेश करना अशुभ माना जाता है।
  • नया व्यवसाय शुरू करना: कोई भी नया काम या निवेश टाल देना चाहिए।
  • बड़ी खरीदारी: गाड़ी, जमीन या कीमती सामान खरीदने से बचें।

खरमास में क्या कर सकते हैं?

हालांकि इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं, लेकिन कुछ धार्मिक गतिविधियों को करने की अनुमति है:

  • पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन: इस समय भगवान की आराधना करने से विशेष फल मिलता है।
  • दान-पुण्य: गरीबों को अन्न, वस्त्र या दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • व्रत और उपवास: इस समय व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
  • पितृ तर्पण: यदि पितृ दोष है, तो इस समय तर्पण करने से शांति मिलती है।

खरमास की समाप्ति और विशेष महत्व

जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो खरमास समाप्त हो जाता है। इस दिन को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, जो एक अत्यंत शुभ त्योहार है। इसके बाद सभी शुभ कार्यों की शुरुआत की जा सकती है।

निष्कर्ष

खरमास हिंदू धर्म में एक विशेष अवधि है, जिसमें शुभ कार्यों को टाला जाता है। इसका मुख्य कारण सूर्य की कमजोर स्थिति और देवताओं के विश्राम की मान्यता है। हालांकि, इस समय धार्मिक कार्यों को करने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है। अतः खरमास के नियमों का पालन करके हम अशुभ प्रभावों से बच सकते हैं और जीवन में सुख-शांति प्राप्त कर सकते हैं।

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