प्राण प्रतिष्ठा: किस शिला से बनी है रामलला की मूर्ति, इसका रंग क्यों है काला?
भगवान राम के भक्तों के लिए 22 जनवरी 2024 का दिन ऐतिहासिक है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का पावन अवसर आने वाला है। इस पवित्र अवसर पर सभी भक्तों के मन में एक सवाल उठता है – रामलला की मूर्ति किस शिला से बनी है और उसका रंग काला क्यों है? आइए, इस लेख में हम इसी रहस्य को जानते हैं।
रामलला की मूर्ति किस पत्थर से बनी है?
अयोध्या में स्थापित होने वाली रामलला की मूर्ति कृष्ण शिला (काला पत्थर) से निर्मित है। यह शिला दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर जिले से लाई गई है। इस काले पत्थर को कृष्णा शिला या ग्रेनाइट भी कहा जाता है।
- काला रंग: श्रीराम की मूर्ति का काला रंग भगवान विष्णु के श्याम वर्ण का प्रतीक है।
- दुर्लभ शिला: यह पत्थर अपनी मजबूती और चमक के लिए प्रसिद्ध है।
- आध्यात्मिक महत्व: हिंदू धर्म में काले पत्थर को दिव्य और ऊर्जावान माना जाता है।
क्यों चुनी गई कृष्ण शिला?
मूर्ति निर्माण के लिए कृष्ण शिला का चयन करने के पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं:
- धार्मिक मान्यता: भगवान विष्णु और उनके अवतारों की मूर्तियाँ प्रायः काले पत्थर से बनाई जाती हैं।
- स्थायित्व: यह पत्थर हजारों साल तक टिका रह सकता है, जो मंदिर की शाश्वतता को दर्शाता है।
- कलात्मक सुंदरता: इस पत्थर पर बारीक नक्काशी आसानी से की जा सकती है।
मूर्ति का काला रंग: आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
रामलला की मूर्ति के काले रंग को लेकर भक्तों के मन में प्रश्न उठना स्वाभाविक है। आइए इसके पीछे के रहस्य को समझते हैं:
आध्यात्मिक कारण
- काला रंग अनंतता और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है।
- यह भगवान विष्णु के श्यामल वर्ण का प्रतिनिधित्व करता है।
- हिंदू शास्त्रों में काले रंग को समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना गया है।
वैज्ञानिक कारण
- काला पत्थर विकिरणों को अवशोषित करने की क्षमता रखता है।
- यह पत्थर सदियों तक अपने मूल रूप में बना रहता है।
- मूर्ति पर चढ़ाए गए चंदन और हल्दी जैसे पदार्थ काले पत्थर पर विशेष प्रभाव छोड़ते हैं।
मूर्ति निर्माण की कला और कारीगरी
रामलला की इस दिव्य मूर्ति का निर्माण मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया है। इसे बनाने में पारंपरिक शिल्प शास्त्र के नियमों का पालन किया गया है:
- मूर्ति की ऊँचाई: 51 इंच
- आयु: 5 वर्ष के बालक के रूप में
- मुद्रा: सौम्य और आशीर्वाद देने वाली
- वेशभूषा: दिव्य बालक के रूप में
प्राण प्रतिष्ठा का महत्व
22 जनवरी 2024 को होने वाली प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह मूर्ति साक्षात देवत्व को प्राप्त कर लेगी। इस संस्कार के बाद:
- मूर्ति में दिव्य चेतना का आवास होगा।
- भक्तों की प्रार्थनाएँ सीधे भगवान तक पहुँचेंगी।
- मंदिर तीर्थस्थल बन जाएगा।
निष्कर्ष
अयोध्या में स्थापित होने वाली रामलला की मूर्ति न सिर्फ एक शिल्पकृति है, बल्कि करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। कृष्ण शिला से निर्मित यह मूर्ति अपने काले रंग में भगवान विष्णु के श्याम वर्ण की छाप लिए हुए है। इस मूर्ति का हर एक अंश शास्त्रीय नियमों और भक्ति भाव से परिपूर्ण है। 22 जनवरी के बाद से यह मूर्ति साक्षात देवत्व धारण कर लेगी और भक्तों के लिए कल्याण का स्रोत बन जाएगी।
जय श्री राम!
