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कब है पौष मास कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी, जानें तिथि, मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व
हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए किया जाता है। पौष मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व होता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि पौष मास कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी कब है, इसकी तिथि, मुहूर्त, व्रत विधि और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
पौष मास कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी 2024
इस वर्ष पौष मास कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी 10 जनवरी 2024, बुधवार को मनाई जाएगी। यह तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार निर्धारित की गई है।
संकष्टी चतुर्थी तिथि और मुहूर्त
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 09 जनवरी 2024 को रात 08:54 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 10 जनवरी 2024 को रात 09:02 बजे
- व्रत का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:36 बजे से 08:48 बजे तक
- चंद्रोदय समय: रात 09:02 बजे (इसके बाद व्रत खोला जाता है)
संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि
संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि-विधान से करने पर भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं इस व्रत को करने की सही विधि:
व्रत से पहले की तैयारी
- व्रत वाले दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- साफ-सुथरे वस्त्र पहनें, अगर संभव हो तो पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
पूजा विधि
- सबसे पहले भगवान गणेश को फूल, अक्षत और रोली अर्पित करें।
- उन्हें मोदक, लड्डू या मीठे फल का भोग लगाएं।
- दीपक जलाकर धूप-दीप दिखाएं।
- निम्न मंत्र का 108 बार जप करें:
“ॐ गं गणपतये नमः”
- गणेश चालीसा या संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।
- पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
व्रत के नियम
- व्रत के दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- दिन भर उपवास रखें और केवल फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- चंद्रोदय के बाद ही व्रत खोलें।
- व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
धार्मिक महत्व
- मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप से मुक्त किया था।
- यह व्रत विघ्नहर्ता गणेश की कृपा पाने का सर्वोत्तम अवसर है।
- संकष्टी चतुर्थी पर व्रत रखने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
- इस व्रत से कुंडली के दोष दूर होते हैं और शुभ फलों में वृद्धि होती है।
आध्यात्मिक लाभ
- मन की एकाग्रता बढ़ती है।
- नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
- आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है।
- जीवन में आने वाली बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं।
संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
संकष्टी चतुर्थी से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसे व्रत के दिन सुनने का विशेष महत्व है:
प्राचीन काल में एक गरीब ब्राह्मण था जिसका नाम सुमंत था। वह भगवान गणेश का परम भक्त था। एक बार उसने संकष्टी चतुर्थी का व्रत विधि-विधान से किया। व्रत के प्रभाव से उसकी सभी समस्याएं दूर हो गईं और उसे धन-धान्य की प्राप्ति हुई। यह देखकर उसके पड़ोसी ने भी यह व्रत करना शुरू किया और उसे भी लाभ मिला। इस तरह यह व्रत संकटों को दूर करने वाला माना जाने लगा।
निष्कर्ष
पौष मास कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को प्रसन्न करने का विशेष अवसर है। इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास से करने पर जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। इस लेख में हमने आपको इस व्रत की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में विस्तार से बताया है। आशा है कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। भगवान गणेश आपके सभी संकटों का नाश करें और आपके जीवन में सुख-शांति की वर्षा करें।
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