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भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले क्यों? जानें पौराणिक कथा

Published September 29, 2025
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4 Min Read

गणेश जी का विशेष स्थान

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। चाहे विवाह हो, गृहप्रवेश हो या कोई नया व्यवसाय, सबसे पहले विघ्नहर्ता गणपति का आह्वान किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सभी देवताओं में गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों माना जाता है? आइए, आज हम इसकी पौराणिक कथा और गहन अर्थ को समझते हैं।

Contents
गणेश जी का विशेष स्थानगणेश जी को प्रथम पूज्य मानने का कारण1. पौराणिक कथा: शिव-पार्वती और गणेश का जन्म2. गणेश जी का बुद्धि और विवेक में सर्वोच्च स्थानगणेश पूजा का महत्व1. विघ्नहर्ता: बाधाओं को दूर करने वाले2. मंगलमूर्ति: शुभता के प्रतीक3. प्रथम पूज्य: किसी भी पूजा का आरंभगणेश जी के प्रसिद्ध मंत्रगणेश जी की कृपा सभी पर बनी रहे

गणेश जी को प्रथम पूज्य मानने का कारण

1. पौराणिक कथा: शिव-पार्वती और गणेश का जन्म

एक बार माता पार्वती ने स्नान करने से पहले अपने शरीर के मैल से एक बालक का निर्माण किया और उसे अपना द्वारपाल बना दिया। उन्होंने आदेश दिया कि “जब तक मैं स्नान कर रही हूँ, किसी को भी अंदर मत आने देना।” कुछ समय बाद भगवान शिव वहाँ आए, लेकिन उस बालक ने उन्हें रोक दिया। यह देखकर शिवजी क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया।

जब पार्वती जी को यह पता चला तो वे अत्यंत दुखी हुईं। उनके क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर उस बालक के धड़ पर लगा दिया और उसे नया जीवन दिया। इस प्रकार गणेश जी का जन्म हुआ। शिवजी ने उन्हें यह वरदान दिया कि “संसार का कोई भी मंगल कार्य तुम्हारी पूजा के बिना पूर्ण नहीं होगा।”

2. गणेश जी का बुद्धि और विवेक में सर्वोच्च स्थान

एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार सभी देवताओं ने यह निर्णय लिया कि ब्रह्मांड का सबसे बुद्धिमान देवता कौन है? इसका निर्णय करने के लिए एक प्रतियोगिता रखी गई। शर्त यह थी कि जो भी सृष्टि का तीन बार चक्कर सबसे तेजी से लगा लेगा, वही विजयी होगा।

  • कार्तिकेय जी ने अपने मयूर पर सवार होकर पूरी गति से चक्कर लगाना शुरू किया।
  • लेकिन गणेश जी ने अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) के तीन परिक्रमा करके यह सिद्ध कर दिया कि “माता-पिता ही पूरी सृष्टि के समान हैं।”

इससे प्रसन्न होकर सभी देवताओं ने गणेश जी को सर्वप्रथम पूजनीय घोषित किया।

गणेश पूजा का महत्व

1. विघ्नहर्ता: बाधाओं को दूर करने वाले

गणेश जी को “विघ्नहर्ता” कहा जाता है, यानी वे सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं। उनकी पूजा से कार्यों में आने वाली समस्याएँ स्वतः हट जाती हैं।

2. मंगलमूर्ति: शुभता के प्रतीक

उनका स्वरूप ही शुभता का प्रतीक है – बड़ा पेट (समस्त विश्व को समेटने की क्षमता), छोटी आँखें (ध्यान केंद्रित करने की शक्ति) और बड़े कान (सबकी बात सुनने की क्षमता)।

3. प्रथम पूज्य: किसी भी पूजा का आरंभ

यही कारण है कि देवी-देवताओं की पूजा से पहले गणेश जी की आराधना की जाती है। यह परंपरा आज भी हर हिंदू घर में निभाई जाती है।

गणेश जी के प्रसिद्ध मंत्र

गणेश जी की पूजा में इन मंत्रों का विशेष महत्व है:

  • “ॐ गं गणपतये नमः” – यह गणेश जी का बीज मंत्र है।
  • “वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥” – यह मंत्र किसी भी कार्य को बिना बाधा पूरा करने के लिए जपा जाता है।

गणेश जी की कृपा सभी पर बनी रहे

भगवान गणेश न केवल बुद्धि और समृद्धि के दाता हैं, बल्कि वे हमारे जीवन से सभी कष्टों को दूर करने वाले हैं। उनकी कृपा पाने के लिए हमें नियमित रूप से उनकी पूजा-आराधना करनी चाहिए। हर मंगल कार्य की शुरुआत गणपति बप्पा के नाम से करें, और सफलता आपके कदम चूमेगी।

आप सभी के जीवन में गणेश जी की असीम कृपा बनी रहे – यही हमारी कामना है। गणपति बप्पा मोरया!

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