कृष्ण संग करें रूक्मिणी की पूजा, होगी धन-धान्य में वृद्धि
भगवान श्रीकृष्ण और देवी रूक्मिणी की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक इन दोनों की आराधना करते हैं, उनके घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती। यह पूजा न केवल भौतिक समृद्धि लाती है, बल्कि आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करती है। आइए जानते हैं कैसे करें यह पवित्र पूजन और क्या हैं इसके लाभ।
रूक्मिणी और श्रीकृष्ण की पूजा का महत्व
देवी रूक्मिणी भगवान कृष्ण की अर्धांगिनी और लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं। इनकी संयुक्त पूजा से:
- धन प्राप्ति के साथ-साथ मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है
- पारिवारिक सुख-शांति बढ़ती है
- कर्ज से मुक्ति मिलती है
- व्यापार में उन्नति के द्वार खुलते हैं
पूजा की तैयारी
आवश्यक सामग्री
- श्रीकृष्ण और रूक्मिणी की संयुक्त मूर्ति/चित्र
- पीले फूल, तुलसी दल
- माखन-मिश्री का भोग
- घी का दीपक
- चंदन, अक्षत, धूप
शुभ मुहूर्त
इस पूजा के लिए शुक्ल पक्ष की एकादशी, जन्माष्टमी या शुक्रवार का दिन विशेष शुभ माना जाता है। प्रातःकाल या संध्या का समय उत्तम रहता है।
पूजा विधि
सबसे पहले पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। फिर निम्न क्रम में पूजन करें:
- आसन पर पीला वस्त्र बिछाकर श्रीकृष्ण-रूक्मिणी की प्रतिमा स्थापित करें
- कलश स्थापना कर जल, आम्रपत्र और नारियल रखें
- घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं
- इस मंत्र से आवाहन करें: “ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात्”
- रूक्मिणी जी को इस मंत्र से अर्पित करें फूल: “या देवी सर्वभूतेषु श्रिय रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:”
- माखन-मिश्री का भोग लगाएं
- आरती करें और प्रसाद वितरित करें
विशेष उपाय
धन प्राप्ति के लिए इन विशेष उपायों को अपनाएं:
- शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं
- हर शुक्रवार को रूक्मिणी-कृष्ण को पीले फूल अर्पित करें
- मंत्र जाप: “ॐ श्रीं कृष्णाय नम:” का 108 बार जाप करें
- गरीबों को मीठा भोजन दान दें
कथा प्रसंग
पुराणों में वर्णित है कि द्वारका में एक गरीब ब्राह्मण ने श्रीकृष्ण और रूक्मिणी की भक्तिपूर्वक पूजा की थी। उसकी निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर माता रूक्मिणी ने उसे अक्षय धन का आशीर्वाद दिया। कहते हैं इसी दिन से यह पूजा विधि प्रचलित हुई।
निष्कर्ष
श्रीकृष्ण और देवी रूक्मिणी की संयुक्त पूजा सच्चे मन से करने पर भक्तों को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की समृद्धि प्राप्त होती है। याद रखें, पूजा में श्रद्धा और नियमितता सबसे महत्वपूर्ण हैं। भगवान की कृपा से हर कठिनाई दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
