# हनुमानजी की ऐसी मूर्ति की पूजा करने पर बनते हैं सारे काम…
प्रस्तावना: हनुमानजी की विशेष मूर्तियों का महत्व
भगवान हनुमानजी को संकटमोचन और कलयुग के साक्षात देवता माना जाता है। उनकी पूजा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मूर्ति के स्वरूप के अनुसार उनकी कृपा का प्रभाव भी बदल जाता है? शास्त्रों और अनुभवी संतों के अनुसार, कुछ विशेष प्रकार की हनुमान मूर्तियों की पूजा करने से जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन आते हैं।
हनुमानजी की इन 5 मूर्तियों की पूजा से मिलता है विशेष फल
1. पंचमुखी हनुमान मूर्ति: पाँचों दिशाओं से रक्षा
- स्वरूप: पाँच मुख (हनुमान, नरसिंह, गरुड़, वराह, हयग्रीव) और दस भुजाएँ।
- महत्व: इनकी पूजा से नकारात्मक शक्तियाँ, भूत-प्रेत बाधा और ग्रह दोष दूर होते हैं।
- मंत्र: “ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पूर्वकपये श्रीरामदूताय स्वाहा।”
2. बजरंगबली की वीर मुद्रा वाली मूर्ति: शक्ति और साहस
- स्वरूप: दाहिने हाथ में गदा और बाएँ हाथ में पर्वत (संजीवनी बूटी का प्रतीक)।
- महत्व: ऐसी मूर्ति घर में होने से डर, आत्मविश्वास की कमी और शत्रु भय दूर होता है।
- आराधना: मंगलवार को चमेली के तेल का दीपक जलाएँ।
3. बाल हनुमान (बालाजी) मूर्ति: निर्दोष भक्ति का प्रतीक
- स्वरूप: बच्चे के रूप में, हाथ में मक्खन या फल लिए हुए।
- महत्व: संतान सुख, पढ़ाई में सफलता और पारिवारिक शांति के लिए पूजनीय।
- कथा: भगवान श्रीराम ने बाल हनुमान को “कलयुग में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता” का वरदान दिया था।
4. संकटमोचन हनुमान (भूमि स्पर्श मुद्रा)
- स्वरूप: एक पैर जमीन पर टिका हुआ, दूसरा उठा हुआ। हाथ में खड्ग और खप्पर।
- महत्व: कानूनी समस्याएँ, रोग या आर्थिक संकट हो तो ऐसी मूर्ति की पूजा करें।
- प्रसाद: गुड़-चना या बेसन के लड्डू चढ़ाएँ।
5. हनुमानजी की योग मुद्रा: आध्यात्मिक उन्नति
- स्वरूप: पद्मासन में बैठे हुए, हाथों में ज्ञान मुद्रा।
- महत्व: ध्यान, मन की एकाग्रता और मोक्ष प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ।
- मंत्र: “ॐ हं हनुमते नमः” का 108 बार जाप करें।
मूर्ति स्थापना के 5 नियम (वास्तु अनुसार)
- हनुमानजी की मूर्ति हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में रखें।
- मूर्ति का मुख दक्षिण या पश्चिम की ओर नहीं होना चाहिए।
- घर के मंदिर में रखें तो राम-सीता के बाईं ओर स्थापित करें।
- लाल या केसरिया वस्त्र से ही पूजा करें, काले रंग का उपयोग न करें।
- मूर्ति टूटी-फूटी, खंडित या अशुद्ध नहीं होनी चाहिए।
कैसे करें प्रतिदिन हनुमान पूजा? (सरल विधि)
- सुबह: स्नान के बाद लाल चंदन का तिलक लगाएँ।
- फूल: लाल गुलाब, गेंदा या अड़हुल अर्पित करें।
- धूप-दीप: गुग्गुल की धूप और तिल के तेल का दीपक जलाएँ।
- भोग: गुड़-चना, बूंदी या मालपुआ चढ़ाएँ।
- आरती: “आरती कीजै हनुमान लला की…” गाकर प्रणाम करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. क्या हनुमानजी की मूर्ति घर के मुख्य द्वार पर लगा सकते हैं?
उत्तर: हाँ! द्वारपाल हनुमान की मूर्ति लगाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। ध्यान रखें कि मूर्ति का मुख बाहर की ओर हो।
Q2. हनुमान चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर: प्रातः 4-6 बजे (ब्रह्म मुहूर्त) या सूर्यास्त के समय। मंगलवार और शनिवार को विशेष फल मिलता है।
समापन: हनुमानजी की कृपा पाने का सरल मंत्र
सार यह है कि हनुमानजी की पूजा में भावना सबसे महत्वपूर्ण है। चाहे छोटी मूर्ति हो या बड़ी, नियमित पूजा और “श्रीराम दुताय नमः” मंत्र का जाप करने वाले भक्तों पर बजरंगबली की कृपा सदैव बनी रहती है।
“बिना भाव के भक्ति, बिना दीपक के ज्योति और बिना विश्वास के पूजा निष्फल है।”
