हमारे पुराणों में ऐसी अनेक कथाएँ हैं जो हमें जीवन का सही मार्ग दिखाती हैं। इनमें से एक प्रमुख कथा है ब्रह्मा जी और सरस्वती जी की। कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने अपनी ही पुत्री सरस्वती जी पर मोहित होकर एक गलती की थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भारी पश्चाताप करना पड़ा। यह कथा हर पुरुष के लिए एक सीख है कि पत्नी के प्रति सम्मान और संयम कितना आवश्यक है।
ब्रह्मा जी की वह भूल जिसने उन्हें पत्नी से विमुख किया
पुराणों के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी ने सरस्वती जी को अपनी पत्नी के रूप में पाया। किन्तु, एक समय ऐसा आया जब ब्रह्मा जी ने अपनी ही पुत्री रूपी सरस्वती जी को देखकर कामातुर हो गए। यह देखकर सरस्वती जी क्रोधित हो गईं और उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया कि “संसार में कोई भी तुम्हारी पूजा नहीं करेगा।”
क्या थी ब्रह्मा जी की गलती?
- अपनी ही पुत्री पर काम भावना रखना
- पत्नी के प्रति अनुचित विचार
- संयम और मर्यादा का उल्लंघन
आधुनिक समय में इस कथा की प्रासंगिकता
आज के युग में भी अनेक पुरुष ब्रह्मा जी जैसी गलती कर बैठते हैं। पत्नी के प्रति अनादर, उपेक्षा या फिर किसी अन्य स्त्री के प्रति आसक्ति – ये सभी वही गलतियाँ हैं जो ब्रह्मा जी ने की थीं। ऐसा करने से न सिर्फ पत्नी का हृदय दुखता है बल्कि पारिवारिक सुख-शांति भी नष्ट हो जाती है।
पत्नी को कैसे न रूठने दें?
- सम्मान दें: पत्नी को सदैव सम्मान की दृष्टि से देखें।
- विश्वास बनाए रखें: किसी अन्य स्त्री के प्रति अनुचित विचार न रखें।
- संवाद करें: मन में कोई बात छुपाएँ नहीं, खुलकर बात करें।
शास्त्रों में पत्नी के महत्व का वर्णन
मनुस्मृति में कहा गया है:
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥”
अर्थात: जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं। जहाँ नारी का अपमान होता है, वहाँ सभी कर्म निष्फल हो जाते हैं।
पत्नी है लक्ष्मी का स्वरूप
हमारे शास्त्रों में पत्नी को गृहलक्ष्मी कहा गया है। जिस घर में पत्नी प्रसन्न रहती है, वहाँ धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती। इसलिए पत्नी को कभी भी रूठने न दें, उनके मन की बात समझें और उनका सम्मान करें।
कैसे बनाए रखें पत्नी का विश्वास?
यदि आप नहीं चाहते कि आपकी पत्नी ब्रह्मा जी की पत्नी की तरह रूठ जाए, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- समय दें: व्यस्त जीवन में भी पत्नी के लिए समय निकालें।
- भावनाएँ समझें: उनकी भावनाओं को नज़रअंदाज़ न करें।
- आदर करें: छोटी-छोटी बातों पर भी उनका आदर करें।
पत्नी है अनमोल रत्न
ब्रह्मा जी की कथा हमें यही सीख देती है कि पत्नी के प्रति अनुचित विचार रखना या उन्हें दुखी करना घर-परिवार के लिए अशुभ होता है। पत्नी ही घर की धुरी होती हैं, उनके बिना घर अधूरा है। इसलिए हमेशा उनका सम्मान करें, उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें खुश रखने का प्रयास करें।
जैसा कि श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है:
“स्त्रीषु दुष्टासु वैश्येऽपि जायते वर्णसंकरः।
संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च॥”
अर्थात: जब स्त्रियाँ दुखी होती हैं तो वर्णसंकर उत्पन्न होता है जो कुल और समाज के लिए अहितकर होता है। इसलिए पत्नी को सदैव प्रसन्न रखें और ब्रह्मा जी जैसी गलती कभी न करें।

