पितृ पक्ष की पावन अवधि
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह वह समय होता है जब हमारे पूर्वजों की आत्माओं को याद किया जाता है और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। पितृ पक्ष 2025 में भी लाखों भक्त श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म करेंगे, ताकि पितरों का आशीर्वाद बना रहे। इस लेख में हम जानेंगे कि श्राद्ध क्यों जरूरी है, इसका महत्व क्या है और कैसे इसे सही तरीके से करें।
पितृ पक्ष क्या है?
पितृ पक्ष, जिसे महालय पक्ष भी कहा जाता है, हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ
- प्रारंभ: 5 सितंबर 2025 (भाद्रपद पूर्णिमा)
- समाप्ति: 19 सितंबर 2025 (सर्वपितृ अमावस्या)
श्राद्ध कर्म का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि “पितृऋण” सबसे बड़ा ऋण होता है। हमारे पूर्वजों ने हमें जीवन दिया, संस्कार दिए और हमारे कल्याण के लिए तपस्या की। श्राद्ध कर्म उनके प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है।
श्राद्ध क्यों जरूरी है?
- पितरों की आत्मा की शांति: मान्यता है कि श्राद्ध कर्म से पितरों की आत्मा को मोक्ष मिलता है।
- परिवार की सुख-समृद्धि: श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर आशीर्वाद बरसाते हैं।
- धार्मिक कर्तव्य: गरुड़ पुराण में कहा गया है कि श्राद्ध न करने वाला व्यक्ति पितृऋण से मुक्त नहीं हो पाता।
श्राद्ध कैसे करें? (विधि एवं मंत्र)
श्राद्ध करने की सही विधि जानना बेहद जरूरी है। गलत तरीके से किया गया श्राद्ध अशुभ फल दे सकता है।
श्राद्ध की तैयारी
- स्नान एवं स्वच्छ वस्त्र: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पितरों का स्मरण: श्राद्ध स्थल पर काले तिल, जल और कुशा रखें।
- ब्राह्मण भोज: योग्य ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें।
मुख्य श्राद्ध मंत्र
श्राद्ध के समय यह मंत्र पढ़ें:
“ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः॥”
पितृ पक्ष में क्या न करें?
पितृ पक्ष में कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं:
- नए कार्य का शुभारंभ न करें: इस समय शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश आदि नहीं करने चाहिए।
- मांस-मदिरा का त्याग: पितृ पक्ष में शुद्ध शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करें।
- पेड़-पौधों की कटाई न करें: मान्यता है कि इस समय पितर पेड़ों पर निवास करते हैं।
पितृ पक्ष की कथाएँ एवं पौराणिक महत्व
शास्त्रों में पितृ पक्ष से जुड़ी अनेक कथाएँ मिलती हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब महाभारत युद्ध में कर्ण की मृत्यु हुई, तो उसकी आत्मा को स्वर्ग में सोने-चांदी के भोजन दिए गए। कर्ण ने पूछा कि इनका पोषण कहाँ है? तब यमराज ने बताया कि उसने जीवनभर दान तो किया, लेकिन पितरों को भोजन नहीं दिया। इसके बाद कर्ण को 15 दिनों के लिए पृथ्वी पर भेजा गया ताकि वह पितरों का तर्पण कर सके। यही 15 दिन पितृ पक्ष कहलाए।
निष्कर्ष: पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग
पितृ पक्ष हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों के बिना हमारा अस्तित्व संभव नहीं था। श्राद्ध कर्म न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपराओं को भी जीवित रखता है। पितृ पक्ष 2025 में अपने पितरों को याद करें, उनका तर्पण करें और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करें।
ॐ शांति: शांति: शांति:

