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Shradh Paksha 2025: पितरों का आशीर्वाद पाने का तरीका

श्राद्ध पक्ष 2025 में पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए जानें श्राद्ध करने का सही तरीका और महत्व

Published July 2, 2026
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3 Min Read

श्राद्ध पक्ष का महत्व और पितृ ऋण से मुक्ति

हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह वह समय होता है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान व दान-पुण्य करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में पितृ लोक के द्वार खुल जाते हैं और हमारे पितर धरती पर आकर हमारे द्वारा दिए गए भोजन व जल से तृप्त होते हैं।

Contents
श्राद्ध पक्ष का महत्व और पितृ ऋण से मुक्तिश्राद्ध पक्ष 2025 की तिथियाँश्राद्ध क्यों और कैसे करें?श्राद्ध करने का सही तरीकाश्राद्ध में पढ़े जाने वाले मंत्रकिन बातों का रखें ध्यान?पितरों का आशीर्वाद कैसे प्राप्त होगा?क्या न करें श्राद्ध पक्ष में?

श्राद्ध पक्ष 2025 की तिथियाँ

  • आरंभ: 16 सितंबर 2025 (पूर्णिमा श्राद्ध)
  • समाप्ति: 30 सितंबर 2025 (सर्वपितृ अमावस्या)

श्राद्ध क्यों और कैसे करें?

शास्त्रों के अनुसार, जब तक हम अपने पितरों का श्राद्ध कर्म नहीं करते, तब तक वे तृप्त नहीं होते। उनकी आत्मा को मोक्ष नहीं मिलता और हम पर पितृ ऋण बना रहता है। श्राद्ध करने से न सिर्फ पितरों को शांति मिलती है, बल्कि उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

श्राद्ध करने का सही तरीका

  • तर्पण: काले तिल, जल और दूध से पितरों को तृप्त करें।
  • पिंडदान: चावल, दूध और शहद से बने पिंड अर्पित करें।
  • ब्राह्मण भोज: श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएँ।
  • दान: गरीबों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दें।

श्राद्ध में पढ़े जाने वाले मंत्र

श्राद्ध कर्म में मंत्रों का विशेष महत्व है। यहाँ कुछ प्रमुख मंत्र दिए जा रहे हैं:

“ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।”

इसके अलावा, गायत्री मंत्र और महालय तर्पण मंत्र का जाप भी किया जाता है।

किन बातों का रखें ध्यान?

  • श्राद्ध हमेशा दोपहर के समय करें।
  • कुशा (घास) की आसन पर बैठकर ही तर्पण करें।
  • श्राद्ध में प्याज, लहसुन और मांसाहार का प्रयोग न करें।
  • श्राद्ध का भोजन गाय, कुत्ते और कौए को भी अर्पित करें।

पितरों का आशीर्वाद कैसे प्राप्त होगा?

यदि आप सच्चे मन से श्राद्ध कर्म करते हैं, तो पितर प्रसन्न होकर आपको आशीर्वाद देते हैं। उनका आशीर्वाद जीवन में सुख, समृद्धि और मान-सम्मान दिलाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण करता है, उसके जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

क्या न करें श्राद्ध पक्ष में?

  • इस दौरान नए कार्य (विवाह, गृहप्रवेश आदि) न करें।
  • किसी का अपमान या अशुभ वचन न बोलें।
  • मांसाहार और मदिरा का सेवन न करें।

श्राद्ध पक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय है। यदि हम श्रद्धा और विधि-विधान से श्राद्ध करते हैं, तो पितर हमें आशीर्वाद देकर हमारे जीवन को सुखमय बना देते हैं। श्राद्ध पक्ष 2025 में इन नियमों का पालन करें और पितृ ऋण से मुक्ति पाएँ।

ॐ शांति! शांति! शांति!

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