माता शीतला का महत्व
हिंदू धर्म में माता शीतला को स्वच्छता, आरोग्य और शांति की देवी माना जाता है। इनकी पूजा विशेष रूप से चेचक, दाद, खाज-खुजली और अन्य त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति पाने के लिए की जाती है। शीतला अष्टमी का पर्व इनकी आराधना का सबसे शुभ अवसर माना जाता है, जो हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में यह पर्व 27 मार्च को पड़ रहा है।
माता शीतला की कथा और उत्पत्ति
देवी के रूप में अवतरण
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता शीतला का जन्म भगवान शिव के तेज से हुआ था। एक बार जब धरती पर महामारी फैली, तब देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने अपने तेज से एक दिव्य शक्ति को प्रकट किया, जो माता शीतला के रूप में अवतरित हुईं। उन्होंने अपने ठंडे जल से संसार के रोगों को शांत किया और लोगों को स्वास्थ्य प्रदान किया।
शीतला अष्टमी से जुड़ी पौराणिक कथा
एक प्रचलित कथा के अनुसार, एक गाँव में भयंकर चेचक की महामारी फैल गई। ग्रामीणों ने माता शीतला की आराधना की और उन्हें ठंडा भोग (बासी भोजन) अर्पित किया। प्रसन्न होकर माता ने न केवल महामारी को शांत किया, बल्कि गाँव को हमेशा के लिए रोगमुक्त कर दिया। तभी से शीतला अष्टमी पर बासी भोजन का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
शीतला अष्टमी 2025: पूजा विधि और महत्व
पूजा की तैयारी
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- माता शीतला की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- चावल, हल्दी, कुमकुम, फूल और बासी भोजन (पिछले दिन का बना हुआ) प्रसाद के रूप में तैयार रखें।
विशेष पूजा विधि
- सबसे पहले माता शीतला को जल, दूध और शहद से स्नान कराएं।
- उन्हें सफेद वस्त्र चढ़ाएं (सफेद रंग शीतलता का प्रतीक है)।
- शीतला अष्टमी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- निम्न मंत्र का जाप करें:
“वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्।
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्॥”
प्रसाद का महत्व
इस दिन बासी भोजन का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है, जो इस बात का प्रतीक है कि माता शीतला सादगी और संयम से प्रसन्न होती हैं। मान्यता है कि इस दिन बासी भोजन खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर स्वस्थ रहता है।
माता शीतला के प्रसिद्ध मंदिर
- शीतला माता मंदिर, गुड़गाँव (हरियाणा): यहाँ माता की प्राचीन मूर्ति विराजमान है, जिसे चेचक से मुक्ति के लिए पूजा जाता है।
- शीतला माता मंदिर, जयपुर (राजस्थान): इस मंदिर में शीतला अष्टमी पर विशाल मेला लगता है।
- शीतला देवी मंदिर, वृंदावन (उत्तर प्रदेश): यहाँ माता की पूजा करने से त्वचा रोग दूर होते हैं।
आधुनिक समय में शीतला पूजन का महत्व
आज के समय में जहाँ नई-नई बीमारियाँ फैल रही हैं, वहाँ माता शीतला की आराधना और भी प्रासंगिक हो गई है। उनकी पूजा हमें यह संदेश देती है कि स्वच्छता और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाकर हम रोगों से बच सकते हैं। शीतला अष्टमी के दिन लोगों को जल संरक्षण, सफाई और संयमित आहार का संकल्प लेना चाहिए।
माता की कृपा से पाएँ निरोगी जीवन
माता शीतला की कृपा से हम न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य भी प्राप्त कर सकते हैं। शीतला अष्टमी 2025 के इस पावन अवसर पर आइए, हम सभी उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को रोगमुक्त और सुखमय बनाएँ।
“या देवी सर्वभूतेषु शीतला रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
माता शीतला की कृपा आप सभी पर बनी रहे!

