एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत सबसे पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और हर माह के दोनों पक्षों (शुक्ल व कृष्ण) में आती है। लेकिन पवित्रा एकादशी का विशेष महत्व है, जो श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पवित्रा एकादशी क्यों है खास?
इस एकादशी को “पवित्रोपना एकादशी” या “पुत्रदा एकादशी” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है, जो इसके महत्व को और बढ़ाती है।
पौराणिक कथा
पद्म पुराण के अनुसार, एक बार महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या महत्व है? तब श्रीकृष्ण ने बताया कि प्राचीन काल में महीजित नामक राजा को कोई संतान नहीं थी। ऋषियों ने उन्हें इस एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने पूरी श्रद्धा से व्रत किया और कुछ समय बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से इसे “पुत्रदा एकादशी” भी कहा जाता है।
पवित्रा एकादशी व्रत विधि
इस व्रत को करने की विधि बहुत ही सरल है, लेकिन कुछ नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए:
- दशमी की रात: एकादशी से एक दिन पहले (दशमी) सात्विक भोजन करें और रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- सुबह का समय: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- संकल्प: भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- पूजा विधि: तुलसी के पत्ते, फूल, धूप-दीप से भगवान विष्णु की पूजा करें।
- मंत्र जाप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “विष्णु सहस्रनाम” का पाठ करें।
- पारण: अगले दिन (द्वादशी) सुबह स्नान करके ब्राह्मण को भोजन कराएं और फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें।
पवित्रा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
यह व्रत न सिर्फ मनोकामनाओं की पूर्ति करता है, बल्कि आत्मशुद्धि का भी मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन अन्न ग्रहण न करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
विशेष फल
- संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है।
- पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
- मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
- मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
पवित्रा एकादशी का व्रत हमारे जीवन को पवित्र और सुखमय बनाने वाला है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अतः हर व्यक्ति को इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करना चाहिए।
ध्यान रखें: व्रत के दिन क्रोध, झूठ और अहंकार से दूर रहें। मन को शांत रखकर भगवान का स्मरण करें।

