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Margashirsha Amavasya 2025 महत्व पूजा विधि शुभ मुहूर्त

मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 का महत्व पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानें इस पवित्र दिन की विशेषताएं और आराधना के तरीके

Published July 2, 2026
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4 Min Read

# Margashirsha Amavasya 2025: जानिए मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Contents
प्रस्तावनामार्गशीर्ष अमावस्या का धार्मिक महत्वमार्गशीर्ष अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्तमार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा विधिसुबह की तैयारीपूजा विधानदान-पुण्यमार्गशीर्ष अमावस्या की कथानिष्कर्ष

प्रस्तावना

हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व होता है, और मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को मार्गशीर्ष अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि पितृ तर्पण, दान-पुण्य और भगवान की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। 2025 में मार्गशीर्ष अमावस्या 21 नवंबर, शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

मार्गशीर्ष अमावस्या का धार्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, मार्गशीर्ष माह को अगहन मास भी कहा जाता है। इस महीने की अमावस्या पर पितरों को तर्पण देने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। इसके अलावा, इस दिन निम्नलिखित कार्यों का विशेष महत्व है:

  • पितृ तर्पण: पितरों को जल अर्पित करने से वंशवृद्धि और कुल की रक्षा होती है।
  • दान-पुण्य: गरीबों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • भगवान विष्णु की आराधना: इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • वट सावित्री व्रत: कुछ क्षेत्रों में इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखा जाता है, जो सुहागिन स्त्रियों के लिए विशेष फलदायी है।

मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्त

2025 में मार्गशीर्ष अमावस्या 21 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन के शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 20 नवंबर 2025, रात 10:15 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 21 नवंबर 2025, रात 08:41 बजे
  • स्नान-दान का श्रेष्ठ समय: प्रातः 05:30 बजे से 08:00 बजे तक
  • पितृ तर्पण मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 02:30 बजे तक

मार्गशीर्ष अमावस्या की पूजा विधि

सुबह की तैयारी

  • प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
  • साफ वस्त्र धारण करके पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • भगवान विष्णु या शिवजी की मूर्ति/तस्वीर स्थापित करें।

पूजा विधान

  • सर्वप्रथम भगवान का आवाहन करें और धूप-दीप दिखाएं।
  • निम्न मंत्र का उच्चारण करें:

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”

  • तुलसी दल, फल और मेवे का भोग लगाएं।
  • पितरों के नाम से तर्पण करें और काले तिल व जल अर्पित करें।

दान-पुण्य

  • गरीबों को अनाज, वस्त्र या दक्षिणा दान करें।
  • यदि संभव हो, तो गाय को हरा चारा खिलाएं।

मार्गशीर्ष अमावस्या की कथा

पुराणों में एक कथा प्रचलित है कि एक बार एक ब्राह्मण ने मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। ब्राह्मण ने कहा, “हे प्रभु, जो भी व्यक्ति इस दिन पवित्र नदी में स्नान करके दान-पुण्य करेगा, उसे पितृ दोष से मुक्ति मिलेगी।” भगवान ने तथास्तु कहा और तभी से इस तिथि का विशेष महत्व माना जाने लगा।

निष्कर्ष

मार्गशीर्ष अमावस्या एक पावन अवसर है जिसमें पितृ तर्पण, दान और भगवान की भक्ति से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 2025 में इस शुभ तिथि पर विधिपूर्वक पूजन करके अपने जीवन को धन्य बनाएं।

“अमावस्या के दिन किया गया दान-पुण्य सौ गुना फल देता है।” — स्कन्द पुराण

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