# Som Pradosh Vrat 2025: सोम प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा- विधि और महत्व
प्रस्तावना
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, खासकर जब यह सोमवार के दिन पड़ता है। सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का पावन अवसर है। यह व्रत भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना जाता है। इस लेख में हम आपको सोम प्रदोष व्रत 2025 के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और इसके महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।
सोम प्रदोष व्रत 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
2025 में सोम प्रदोष व्रत निम्नलिखित तिथियों में मनाया जाएगा:
- जनवरी 6, 2025 (सोमवार)
- फरवरी 3, 2025 (सोमवार)
- मार्च 3, 2025 (सोमवार)
- अप्रैल 7, 2025 (सोमवार)
- मई 5, 2025 (सोमवार)
- जून 2, 2025 (सोमवार)
- जुलाई 7, 2025 (सोमवार)
- अगस्त 4, 2025 (सोमवार)
- सितंबर 1, 2025 (सोमवार)
- अक्टूबर 6, 2025 (सोमवार)
- नवंबर 3, 2025 (सोमवार)
- दिसंबर 1, 2025 (सोमवार)
प्रदोष काल का समय
प्रदोष व्रत में प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। प्रदोष काल लगभग 1 घंटा 30 मिनट तक रहता है। 2025 में प्रदोष काल का समय निम्नलिखित होगा:
- सर्दियों में (दिसंबर-जनवरी): शाम 5:30 बजे से 7:00 बजे तक
- गर्मियों में (मई-जून): शाम 6:45 बजे से 8:15 बजे तक
सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि
सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि निम्नलिखित है:
1. सुबह की तैयारी
- प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का स्मरण करें।
- व्रत का संकल्प लें: “मैं आज सोम प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करूंगा/करूंगी।”
2. दिनभर का नियम
- पूरे दिन फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- शिव मंत्रों का जाप करें: “ॐ नमः शिवाय” या “महामृत्युंजय मंत्र”।
3. शाम की पूजा विधि
- सूर्यास्त से पहले स्नान करके पूजा स्थल को साफ करें।
- शिवलिंग या शिव-पार्वती की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं।
- बिल्व पत्र, धतूरा, फूल, अक्षत और दूध अर्पित करें।
- दीपक जलाकर शिव आरती करें:
“ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्धांगी धारा॥”
4. व्रत कथा का श्रवण
पूजा के बाद सोम प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
सोम प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, सोम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है:
- इस व्रत से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं।
- संतान प्राप्ति, धन-समृद्धि और रोगों से मुक्ति के लिए यह व्रत फलदायी है।
- कुंडली के दोषों को दूर करने के लिए भी इस व्रत को किया जाता है।
- सोमवार को प्रदोष व्रत रखने से चंद्रमा के दोष शांत होते हैं।
सोम प्रदोष व्रत कथा
एक बार एक गरीब ब्राह्मण था जो नियमित रूप से सोम प्रदोष व्रत रखता था। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और कहा:
“हे भक्त! तेरी निष्ठा से प्रसन्न होकर मैं तुझे धन-धान्य और सुख-समृद्धि प्रदान करता हूँ।”
अगले दिन ब्राह्मण को एक स्वर्ण कलश प्राप्त हुआ, जिससे उसकी गरीबी दूर हो गई। इस प्रकार, सोम प्रदोष व्रत का पालन करने से भक्तों को दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
निष्कर्ष
सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का एक श्रेष्ठ अवसर है। इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 2025 में आने वाले सभी सोम प्रदोष व्रत के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि का पालन करके आप भी भोलेनाथ की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
हर हर महादेव!
