भगवान विष्णु, जो सृष्टि के पालनहार हैं, स्वयं अजर-अमर और सर्वशक्तिमान हैं। फिर भी, धर्म ग्रंथों में एक ऐसा प्रसंग मिलता है जहाँ उन्हें अपने ही अंश से उत्पन्न एक दिव्य शक्ति की आवश्यकता पड़ी। यह कथा न सिर्फ भगवान विष्णु की महिमा बताती है, बल्कि देवी के स्वरूप की अद्भुत शक्ति का भी प्रमाण देती है।
वह कौन-सी देवी थीं जिन्होंने विष्णु के प्राण बचाए?
यह देवी कोई और नहीं, बल्कि माँ मोहिनी हैं। जी हाँ, मोहिनी भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं, जो स्त्री के स्वरूप में प्रकट हुईं। लेकिन एक अन्य प्रसंग में, देवी योगमाया ने भगवान विष्णु की रक्षा की। यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण और देवी भागवत पुराण में वर्णित है।
कथा: जब विष्णु को अपनी ही शक्ति की आवश्यकता पड़ी
एक बार, भगवान विष्णु गहरी योगनिद्रा में लीन थे। उस समय, दो राक्षसों मधु और कैटभ ने उन पर आक्रमण कर दिया। ये दोनों अत्यंत बलशाली थे और ब्रह्मा जी को भी डरा रहे थे। तब ब्रह्मा जी ने विष्णु को जगाने के लिए देवी योगमाया का आह्वान किया।
- देवी योगमाया, विष्णु की अंतर्निहित शक्ति हैं, जो उन्हीं से प्रकट हुईं।
- उन्होंने विष्णु की नाभि से प्रकट होकर उन्हें जगाया।
- जागृत होने पर, भगवान विष्णु ने मधु-कैटभ का वध किया।
देवी योगमाया कौन हैं?
देवी योगमाया को विष्णु की माया शक्ति माना जाता है। वह अदृश्य शक्ति हैं, जो संसार के समस्त कार्यों को संचालित करती हैं। उनके बिना, भगवान विष्णु भी निद्रा में रहते हैं।
देवी योगमाया का महत्व
- विष्णु की संरक्षिका: जब विष्णु सोते हैं, तब योगमाया उनकी रक्षा करती हैं।
- माया की देवी: वह संसार की समस्त माया (भ्रम) की अधिष्ठात्री हैं।
- भक्तों की रक्षा: जो भक्त उनकी शरण में जाते हैं, उन्हें वह मोह से मुक्त करती हैं।
क्या मोहिनी और योगमाया एक ही हैं?
कुछ ग्रंथों में मोहिनी और योगमाया को अलग-अलग माना गया है, जबकि कुछ में इन्हें एक ही शक्ति के दो रूप बताया गया है।
- मोहिनी: विष्णु का स्त्री अवतार, जिसने देवताओं के लिए अमृत प्राप्त किया।
- योगमाया: विष्णु की अंतर्निहित शक्ति, जो उन्हें जगाती हैं।
श्लोक: देवी योगमाया की स्तुति
“या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
देवी की महिमा अद्वितीय
यह कथा हमें बताती है कि भगवान विष्णु भी अपनी शक्ति के बिना अधूरे हैं। देवी योगमाया या मोहिनी, दोनों ही रूपों में वह विष्णु की सहचरी हैं। भक्तों को चाहिए कि वे न सिर्फ विष्णु की, बल्कि देवी की भी उपासना करें, क्योंकि शक्ति के बिना शिव अधूरे हैं।
इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ईश्वर और शक्ति एक ही हैं, और भक्ति के मार्ग में दोनों का समान महत्व है।
आपके विचार
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