MSHBMSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
Reading: मां कामाख्या देवी रजस्वला उत्सव और पूजा विधि
Share
Notification Show More
MSHBMSHB
  • MSHB.IN
  • Latest News
  • Sarkari Yojana
© 2024 MSHB.in. All Rights Reserved.

मां कामाख्या देवी रजस्वला उत्सव और पूजा विधि

मां कामाख्या देवी के रजस्वला होने का उत्सव जानिए किस रूप में की जाती है देवी की पूजा और इसका महत्व

Published July 2, 2026
Share
4 Min Read

असम की पवित्र नीलाचल पर्वतमाला पर स्थित कामाख्या देवी मंदिर 51 शक्तिपीठों में सर्वाधिक रहस्यमय और चमत्कारिक माना जाता है। यहाँ माँ भगवती की योनि रूप में पूजा होती है, जो प्रकृति के सृजन और शक्ति का प्रतीक है। सबसे अनूठा है अम्बुबाची मेला, जब माँ कामाख्या के रजस्वला होने का उत्सव मनाया जाता है।

Contents
कामाख्या देवी की पौराणिक कथासती का योनि रूप में प्रकट होनाकामदेव का श्राप और मुक्तिअम्बुबाची: माँ के रजस्वला होने का पावन उत्सवक्या है अम्बुबाची?मंदिर बंद होने की परंपराकामाख्या देवी की पूजा विधिप्रमुख आराधना रूपविशेष मंत्र और स्तोत्रमंदिर की अनूठी परंपराएँअंगुरीयक (अँगूठी) चढ़ाने की रीतिप्रसाद के रूप में अंगवस्त्रकामाख्या यात्रा के विशेष तथ्यनिष्कर्ष: शक्ति का अनंत स्रोत

कामाख्या देवी की पौराणिक कथा

सती का योनि रूप में प्रकट होना

पुराणों के अनुसार, भगवान शिव जब क्रोध में सती के दग्ध शरीर को लेकर विचर रहे थे, तब विष्णुजी ने सुदर्शन चक्र से उन्हें खंडित किया। सती की योनि इसी स्थान पर गिरी, जहाँ आज कामाख्या शक्तिपीठ स्थापित है।

कामदेव का श्राप और मुक्ति

एक अन्य कथा के अनुसार, शिवजी के तीसरे नेत्र से भस्म हुए कामदेव ने यहीं तप करके पुनः जन्म पाया, इसीलिए इस स्थान को “कामाख्या” (काम + आख्या) कहा जाता है।

अम्बुबाची: माँ के रजस्वला होने का पावन उत्सव

क्या है अम्बुबाची?

हर साल आषाढ़ माह में माँ कामाख्या के रजस्वला होने का यह उत्सव 4 दिन तक मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दौरान नीलाचल पर्वत की धरती से लाल रंग का जल प्रवाहित होता है, जिसे माँ का रज मानकर पवित्र कपड़े (अम्बुबाची वस्त्र) में संग्रहित किया जाता है।

मंदिर बंद होने की परंपरा

  • इन 4 दिनों में मंदिर के पट बंद रहते हैं।
  • तीसरे दिन विशेष पूजा के बाद ही दर्शन की अनुमति मिलती है।
  • इस अवधि में किसान खेत जोतने से परहेज करते हैं।

कामाख्या देवी की पूजा विधि

प्रमुख आराधना रूप

माँ कामाख्या की पूजा दस महाविद्याओं में से एक “काली” के रूप में की जाती है। यहाँ की प्रमुख उपासना पद्धतियाँ हैं:

  • योनि पूजा: गुप्त रूप से गर्भगृह में होने वाली विशेष साधना।
  • तंत्र साधना: मंत्र, यंत्र और न्यास की परंपरा।
  • पशु बलि: प्राचीन काल में इसकी प्रथा थी, अब प्रतीकात्मक रूप से कद्दू की बलि दी जाती है।

विशेष मंत्र और स्तोत्र

कामाख्या देवी का बीज मंत्र है:

“क्लीं कामाख्यै स्वाहा”

कामाख्या अष्टकम् का पाठ विशेष फलदायी माना गया है:

“नमामि कामाख्यां देवीं, नीलपर्वतवासिनीम्।
ब्रह्मविष्णुशिवाद्यैभिः, सेवितां सिद्धिदायिनीम्॥”

मंदिर की अनूठी परंपराएँ

अंगुरीयक (अँगूठी) चढ़ाने की रीति

श्रद्धालु यहाँ चाँदी की अँगूठी चढ़ाते हैं, जिसे “दानी” कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से माँ सभी कष्ट हर लेती हैं।

प्रसाद के रूप में अंगवस्त्र

यहाँ का प्रसाद सामान्य नहीं है! दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को लाल रंग का कपड़ा (माँ के रजस्वला वस्त्र का प्रतीक) प्रसाद रूप में दिया जाता है।

कामाख्या यात्रा के विशेष तथ्य

  • सर्वोत्तम समय: अम्बुबाची मेले के दौरान (जून-जुलाई)।
  • विशेष सावधानी: गर्भगृह में मोबाइल/कैमरा ले जाना वर्जित।
  • निकटस्थ स्थल: उमानंद मंदिर, नवग्रह मंदिर और भुवनेश्वरी पीठ।

निष्कर्ष: शक्ति का अनंत स्रोत

कामाख्या देवी का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति और प्रकृति के चक्र का जीवंत प्रतीक है। अम्बुबाची का पर्व हमें सिखाता है कि रजस्वला होना अशुद्ध नहीं, बल्कि सृजन की पवित्र प्रक्रिया है। जैसे धरती वर्षा से उर्वर होती है, वैसे ही माँ का यह रूप समस्त सृष्टि को पोषण देता है।

“या देवी सर्वभूतेषु, शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

माँ कामाख्या की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे!

You Might Also Like

Religion: अध्यात्म के बिना मानव जीवन अधूरा

Navratri Day 3 Chandraghanta Devi Puja Ka Rahasya

Jai Dev Jai Dev Jai Mangal Murti Lyrics जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ति

Ganga Saptami 2025 मां गंगा स्तोत्रम पाठ से पाप मुक्ति

Shabari Jayanti 2025: शबरी ने पशु बलि के खिलाफ बड़ा कदम उठाया

Share

Latest News

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
Religion Spirituality July 2, 2026
राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
Religion Spirituality July 2, 2026
Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
Religion Spirituality July 2, 2026
Durga Puja 2025 आज से शुरू जानें कल्पारंभ पूजा का शुभ मुहूर्त
Religion Spirituality July 2, 2026

You Might also Like

Navratri 2025 राशि अनुसार मंत्रों से मां की आराधना सफलता पाएं

July 2, 2026

जब द्रौपदी और भीम ने युधिष्ठिर का अपमान किया When Draupadi and Bhim Insulted Yudhishthir

July 2, 2026

Kabirdas Jayanti 2025 Date कबीर दास जयंती तिथि और जीवन तथ्य

July 2, 2026
MshbMshb

MSHB.in is your reliable source for the latest news in Government Schemes, Sarkari Yojana, Govt Jobs, Spirituality, lifestyle, and more.

Quick Link

  • MSHB.IN
  • About Us
  • Blogs
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • My Bookmarks
  • Contact Us

Category

  • Religion
  • Latest News
  • Sarkari Yojana

Recent Post

  • Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा पाठ का सही समय और विधि
  • राधा कृष्णा का युगल रूप हैं बांके बिहारी
  • Kheer Bhawani Temple: कश्मीर के चमत्कारी खीर भवानी मंदिर की परंपराएं
© 2025 MSHB. All Rights Reserved. | Website Designed By Dinox Tech HTML sitemap
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?