22 जनवरी 2024 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। अयोध्या में श्री राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में देश-विदेश से लाखों भक्तों के साथ काशी के डोम राजा जैसे विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की अखंडता का प्रतीक है।
प्राण प्रतिष्ठा क्या है? (महत्व एवं विधि)
वैदिक परंपरा का पवित्र संस्कार
प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है देवता की मूर्ति में चेतना का आवाहन। यह वैदिक मंत्रों, यज्ञ और पूजन विधियों द्वारा संपन्न होता है:
- मंत्रोच्चारण: ऋग्वेद के मंत्रों से मूर्ति का शोधन
- नेत्रोन्मीलन: “उन्मीलन मंत्र” द्वारा देवता के दर्शन
- प्राण प्रतिष्ठा: “यथा त्वं शिवसन्निधौ…” मंत्र से जीवन का आह्वान
“यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं, तत्र तत्र कृतमस्तकांजलिम्।”
(जहाँ-जहाँ राम का नाम होता है, वहाँ-वहाँ सिर झुक जाते हैं)
प्रमुख यजमानों की सूची: समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व
धार्मिक एवं सामाजिक व्यक्तित्व
- काशी के डोम राजा: महंत दिनेश्वर दास जी के निमंत्रण पर शामिल होने वाले समाज के इस प्रतिनिधि की उपस्थिति सनातन धर्म की समावेशिता को दर्शाती है
- शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती: ज्योतिष्पीठ के पीठाधीश्वर
- योगी आदित्यनाथ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
राजनीतिक हस्तियाँ
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (मुख्य यजमान)
- गृह मंत्री अमित शाह
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
समारोह की विशेषताएँ: अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव
विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले आयोजन
- 3,000+ विद्वान: वैदिक मंत्रोच्चारण के लिए एक साथ उपस्थित
- 5,000+ मंदिरों: में सिंचकालीन प्रसाद वितरण
- विशेष ध्वनि प्रणाली: मंदिर परिसर में श्लोकों का प्रसारण
भक्तों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
दर्शन व्यवस्था
- ऑनलाइन पास: अयोध्या नगर निगम की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन
- सुरक्षा व्यवस्था: 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
- लाइव प्रसारण: प्रमुख टीवी चैनल्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर
सभ्यता का नवजागरण
यह समारोह केवल एक मंदिर का उद्घाटन नहीं, बल्कि भारतीय चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है। जैसे रामसेतु ने धर्म की रक्षा की थी, वैसे ही यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए मर्यादा का मार्गदर्शक बनेगा।
“रामो विग्रहवान् धर्मः” (श्रीराम धर्म के साक्षात स्वरूप हैं)
