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Pitru Paksha 2025 पितृपक्ष शुरू तिथि महत्व श्राद्ध तिथियां

Pitru Paksha 2025 starts on this date Know the significance and important Shraddha dates for ancestral rituals in Hindi

Published July 2, 2026
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4 Min Read

हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। यह वह समय होता है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। 2025 में पितृपक्ष 10 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर तक रहेगा। इस अवधि में पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने से उनकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Contents
पितृपक्ष का महत्व: पूर्वजों की कृपा पाने का समयपितृपक्ष 2025 की महत्वपूर्ण तिथियांश्राद्ध क्यों और कैसे करें?श्राद्ध विधि: सरल चरणक्या न करें पितृपक्ष में?पितृपक्ष की कथा: कर्ण का प्रायश्चितअंतिम विचार: पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग

पितृपक्ष का महत्व: पूर्वजों की कृपा पाने का समय

शास्त्रों में कहा गया है कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण होता है। पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म करने से पितर प्रसन्न होते हैं और वे अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद देते हैं। गरुड़ पुराण में उल्लेख है:

“पितृणां प्रीतये श्राद्धं, दद्याद्विप्राय भक्तितः।
तृप्ताः पितरः प्रयच्छन्ति, धनं पुत्रान् आयुरारोग्यमेव च॥”

अर्थात, भक्ति भाव से ब्राह्मण को श्राद्ध देने से पितर प्रसन्न होते हैं और धन, पुत्र, आयु व आरोग्य प्रदान करते हैं।

पितृपक्ष 2025 की महत्वपूर्ण तिथियां

  • 10 सितंबर 2025 (बुधवार): पितृपक्ष प्रारंभ (प्रतिपदा)
  • 14 सितंबर 2025 (रविवार): महालया अमावस्या (विशेष श्राद्ध दिवस)
  • 20 सितंबर 2025 (शनिवार): अष्टमी श्राद्ध
  • 25 सितंबर 2025 (गुरुवार): सर्वपितृ अमावस्या (पितृपक्ष समापन)

श्राद्ध क्यों और कैसे करें?

श्राद्ध का अर्थ है पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना। इस दिन पितरों के निमित्त भोजन, जल तर्पण और पिंड दान किया जाता है। यह कर्म मुख्य रूप से ब्राह्मणों को भोजन कराकर, दान देकर और पितृ गायत्री मंत्र का जाप करके संपन्न किया जाता है।

श्राद्ध विधि: सरल चरण

  1. स्नान व संकल्प: सुबह स्नान करके पवित्र होकर संकल्प लें।
  2. तर्पण: काले तिल, जल और दूध से पितरों का तर्पण करें।
  3. ब्राह्मण भोज: शुद्ध भोजन बनाकर ब्राह्मण को भोजन कराएं।
  4. दान-पुण्य: गरीबों को अनाज, वस्त्र या दक्षिणा दान करें।

क्या न करें पितृपक्ष में?

पितृपक्ष के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

  • मांस-मदिरा का सेवन न करें।
  • नए कार्य (विवाह, गृहप्रवेश) शुरू न करें।
  • क्रोध या झगड़े से बचें।
  • पितरों का अपमान न करें।

पितृपक्ष की कथा: कर्ण का प्रायश्चित

महाभारत के अनुसार, जब कर्ण की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा स्वर्ग पहुंची, तो उसे सोने-चांदी के बदले भोजन दिया गया। जब उसने इसका कारण पूछा, तो देवताओं ने बताया कि उसने जीवनभर दान तो दिया, लेकिन अपने पितरों को भोजन नहीं दिया। तब कर्ण को पृथ्वी पर वापस भेजा गया और 15 दिनों तक पितरों का श्राद्ध करने का अवसर दिया गया। यही काल पितृपक्ष के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

अंतिम विचार: पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग

पितृपक्ष हमें याद दिलाता है कि हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए जो त्याग किया है, उसका ऋण हम श्राद्ध कर्म से चुका सकते हैं। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं:

“पितृन् यज्ञैः तर्पयन्ति, देवान् यज्ञैः तर्पयन्ति।”

अर्थात, पितरों को श्राद्ध से तृप्त किया जाता है और देवताओं को यज्ञ से। इसलिए, इस पवित्र अवसर पर पूरे विधि-विधान से श्राद्ध करें और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें।

आप सभी को पितृपक्ष 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏

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