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Kharmas 2025 खरमास क्या है मांगलिक कार्य नहीं क्यों

जानिए खरमास 2025 क्या है इस दौरान मांगलिक कार्य क्यों वर्जित हैं और क्या है इसकी पौराणिक कथा पूरी जानकारी यहाँ

Published July 2, 2026
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4 Min Read

हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व है। यह वह समय होता है जब सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। 2025 में यह पर्व 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगा। इस अवधि में मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन क्यों? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा और वैज्ञानिक तर्क।

Contents
खरमास क्या है? (What is Kharmas?)खरमास 2025 की तिथियाँखरमास में क्यों नहीं होते शुभ कार्य? (Why No Auspicious Works?)पौराणिक मान्यतावैज्ञानिक दृष्टिकोणखरमास से जुड़ी पौराणिक कथा (Mythological Story)खरमास में क्या करें और क्या न करें? (Do’s & Don’ts)क्या करें:क्या न करें:खरमास में विशेष पूजा विधि (Special Worship Method)अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)1. क्या खरमास में घर की मरम्मत कर सकते हैं?2. क्या खरमास में नौकरी शुरू कर सकते हैं?3. खरमास में कौन से देवता की पूजा करें?आध्यात्मिक विकास का समय

खरमास क्या है? (What is Kharmas?)

खरमास संस्कृत के दो शब्दों “खर” (धनु राशि का प्रतीक) और “मास” (माह) से मिलकर बना है। इस दौरान सूर्य धनु राशि में होते हैं, जिसे एक अशुभ समय माना जाता है।

  • समयावधि: सूर्य के धनु से मकर राशि में जाने तक (लगभग 1 माह)
  • मुख्य नियम: कोई भी शुभ कार्य न करना
  • विशेषता: इस दौरान भगवान विष्णु की आराधना की जाती है

खरमास 2025 की तिथियाँ

2025 में खरमास की अवधि निम्नलिखित रहेगी:

  • प्रारंभ: 16 दिसंबर 2025 (मंगलवार)
  • समाप्ति: 14 जनवरी 2026 (मंगलवार)

खरमास में क्यों नहीं होते शुभ कार्य? (Why No Auspicious Works?)

पौराणिक मान्यता

स्कन्द पुराण के अनुसार, जब सूर्यदेव धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो वे खर (गधे) की सवारी करते हैं। गधा को अशुभ और जड़ता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों में बाधाएँ आती हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

खरमास सर्दियों का संक्रांतिकाल होता है जब प्रकृति में निष्क्रियता होती है। इस समय नए कार्यों को टालना प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।

खरमास से जुड़ी पौराणिक कथा (Mythological Story)

पद्म पुराण में एक रोचक कथा मिलती है:

“एक बार सूर्यदेव ने अपने पुत्र शनि से क्रोधित होकर उन्हें श्राप दे दिया। शनि ने प्रतिश्राप में सूर्य को धनु राशि में प्रवेश करने पर गधे की सवारी करने का श्राप दिया। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहते हैं।”

खरमास में क्या करें और क्या न करें? (Do’s & Don’ts)

क्या करें:

  • भगवान विष्णु की पूजा: इस समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी होता है
  • दान-पुण्य: गरीबों को कंबल, अन्न आदि का दान करें
  • ध्यान व जप: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें

क्या न करें:

  • विवाह, मुंडन जैसे संस्कार: इन्हें टाल दें
  • नए व्यवसाय का प्रारंभ: शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा करें
  • गृहप्रवेश: नए घर में न जाएँ

खरमास में विशेष पूजा विधि (Special Worship Method)

इस समय निम्नलिखित विधि से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है:

  1. प्रातः स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें
  2. तुलसी के पास दीपक जलाएँ
  3. भगवान विष्णु के इस मंत्र का 108 बार जाप करें:
    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
  4. शाम को गीता का पाठ करें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या खरमास में घर की मरम्मत कर सकते हैं?

जी हाँ, आवश्यक मरम्मत कार्य कर सकते हैं, लेकिन गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य न करें।

2. क्या खरमास में नौकरी शुरू कर सकते हैं?

यदि नौकरी अत्यावश्यक हो तो कर सकते हैं, लेकिन नए व्यवसाय का प्रारंभ न करें।

3. खरमास में कौन से देवता की पूजा करें?

इस समय भगवान विष्णु, शिवजी और हनुमानजी की पूजा विशेष फलदायी होती है।

आध्यात्मिक विकास का समय

खरमास वास्तव में आत्मचिंतन और आध्यात्मिक प्रगति का समय है। इस अवधि में शुभ कार्यों पर रोक हमें धैर्य और विवेक सिखाती है। 2025 के खरमास में भगवान विष्णु की भक्ति करें और इस समय का सदुपयोग करें।

“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥”
– श्रीमद्भगवद्गीता (4.7)

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